राधा अष्टमी पर सिर्फ एक दिन खुलते हैं विदिशा के राधा रानी मंदिर के पट, जानें रहस्य
Kaushiki | Sept 19, 2026, 12:36 IST
Vidisha Radha Rani Temple
मध्य प्रदेश के विदिशा में स्थित राधा रानी मंदिर के कपाट 338 साल पुरानी परंपरा के तहत राधा अष्टमी पर खोले गए। मुगल काल से चली आ रही इस गुप्त पूजा में शामिल होने के लिए देश भर से हजारों श्रद्धालु पहुंचे हैं।
Radha Rani Temple Vidisha: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की संकरी गलियों में एक अनोखा रहस्य छिपा है। यहां स्थित नंदवाना इलाके की राधा रानी हवेली अपनी ऐतिहासिक परंपरा के लिए पहचानी जाती है।
इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार ही आम लोगों के लिए खुलते हैं। बाकी पूरे 364 दिन यहां केवल गुप्त पूजा की जाती है। इस बार भी सुबह तड़के 5 बजे जैसे ही कपाट खुले, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरा इलाका जयकारों से गूंज उठा।
यह कहानी केवल एक मंदिर की नहीं है। यह कहानी आस्था और समर्पण की है। लगभग 338 साल पहले मुगलों के डर से इन मूर्तियों को छुपाया गया था। तब से लेकर आज तक वही परंपरा निभाई जा रही है।
लोग साल भर इस एक दिन का इंतजार करते हैं। हर कोई राधा रानी की एक झलक पाने को उत्सुक रहता है। भक्त दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं।
![Radha Ashtami 2022: बरसाना की लाड़िली जी मध्य प्रदेश में बसी हैं ठकुराइन के रूप में, साल में बस आज ही के दिन होते हैं दर्शन - Radha Ashtami 2022 read about]()
इतिहासकारों के मुताबिक, मुगलों के शासनकाल में मंदिरों पर लगातार हमले हो रहे थे। उस समय वृंदावन के प्रसिद्ध मंदिरों की सुरक्षा पर बड़ा संकट आ गया था। राधा रानी की पवित्र निधियों को बचाने के लिए स्वामी परिवार आगे आया।
वे इन निधियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहते थे। स्वामी परिवार के सदस्य वृंदावन से गुप्त रूप से विदिशा पहुंचे। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर निधियों की रक्षा की। विदिशा पहुंचकर उन्होंने किले के बाहर एक छोटी झोपड़ी बनाई।
वहीं पर सभी निधियों को बहुत ही सुरक्षित रूप से स्थापित किया। मुगलों की नजर से बचाने के लिए पूजा सार्वजनिक नहीं की जाती थी। केवल गुप्त रूप से ही सेवा की जाती थी।
तभी से साल में सिर्फ एक दिन कपाट खोलने की प्रथा शुरू हुई। वह दिन राधा अष्टमी का तय किया गया था। आज 338 साल बीत जाने के बाद भी यह प्रथा वैसी ही है। परिवार के लोग आज भी नियम से सेवा करते हैं।
![विदिशा में 338 साल से हो रही गुप्त पूजा, आज सुबह 5 बजे खुले पट, उमड़ पड़े श्रद्धालु | Mangala Aarti Held At Radha Rani Temple In Nandwana Vidisha]()
राधा रानी मंदिर विदिशा मेंदोपहर 12 बजे से 2 बजे तक तिलक दर्शन का आयोजन किया गया है। इसके तुरंत बाद विशेष आरती की जाएगी। इसके बाद शाम साढ़े 4 बजे भक्तों को फिर से दर्शन का मौका मिलेगा।
भोग के बाद मटकी फोड़ कार्यक्रम का आयोजन होगा और शाम 6 बजे संध्या आरती की जाएगी। इसके बाद रात 7 बजे पालना दर्शन कराए जाएंगे।
स्थानीय प्रशासन भीड़ को संभालने के लिए कड़े इंतजाम कर रहा है और सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए जा रहे हैं। नंदवाना की गलियों को सुंदर रोशनी से सजाया गया है। इस गुप्त पूजा को देखने विदेशी पर्यटक भी दूर-दूर से आते हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
भगवान विष्णु के अनंत रूप से जुड़ा है गणेश विसर्जन, जानें पौराणिक रहस्य
क्यों दूसरों के विवाह में बाधा बनते थे भगवान गणेश, ब्रह्मा जी ने कैसे कराई गणेश जी की शादी
सितंबर में इस दिन करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, जाने सितंबर के एकादशी व्रत की तिथि
क्यों नहीं करने चाहिए भगवान गणेश के इस अंग के दर्शन, दर्शन करने पर होगा नुकसान
इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार ही आम लोगों के लिए खुलते हैं। बाकी पूरे 364 दिन यहां केवल गुप्त पूजा की जाती है। इस बार भी सुबह तड़के 5 बजे जैसे ही कपाट खुले, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरा इलाका जयकारों से गूंज उठा।
यह कहानी केवल एक मंदिर की नहीं है। यह कहानी आस्था और समर्पण की है। लगभग 338 साल पहले मुगलों के डर से इन मूर्तियों को छुपाया गया था। तब से लेकर आज तक वही परंपरा निभाई जा रही है।
लोग साल भर इस एक दिन का इंतजार करते हैं। हर कोई राधा रानी की एक झलक पाने को उत्सुक रहता है। भक्त दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं।
Radha Ashtami 2022: बरसाना की लाड़िली जी मध्य प्रदेश में बसी हैं ठकुराइन के रूप में, साल में बस आज ही के दिन होते हैं दर्शन - Radha Ashtami 2022 read about
338 साल पुराना इतिहास और मान्यता
वे इन निधियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहते थे। स्वामी परिवार के सदस्य वृंदावन से गुप्त रूप से विदिशा पहुंचे। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर निधियों की रक्षा की। विदिशा पहुंचकर उन्होंने किले के बाहर एक छोटी झोपड़ी बनाई।
वहीं पर सभी निधियों को बहुत ही सुरक्षित रूप से स्थापित किया। मुगलों की नजर से बचाने के लिए पूजा सार्वजनिक नहीं की जाती थी। केवल गुप्त रूप से ही सेवा की जाती थी।
तभी से साल में सिर्फ एक दिन कपाट खोलने की प्रथा शुरू हुई। वह दिन राधा अष्टमी का तय किया गया था। आज 338 साल बीत जाने के बाद भी यह प्रथा वैसी ही है। परिवार के लोग आज भी नियम से सेवा करते हैं।
विदिशा में 338 साल से हो रही गुप्त पूजा, आज सुबह 5 बजे खुले पट, उमड़ पड़े श्रद्धालु | Mangala Aarti Held At Radha Rani Temple In Nandwana Vidisha
मंदिर में चल रहे हैं दिनभर के विशेष कार्यक्रम
भोग के बाद मटकी फोड़ कार्यक्रम का आयोजन होगा और शाम 6 बजे संध्या आरती की जाएगी। इसके बाद रात 7 बजे पालना दर्शन कराए जाएंगे।
स्थानीय प्रशासन भीड़ को संभालने के लिए कड़े इंतजाम कर रहा है और सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए जा रहे हैं। नंदवाना की गलियों को सुंदर रोशनी से सजाया गया है। इस गुप्त पूजा को देखने विदेशी पर्यटक भी दूर-दूर से आते हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
भगवान विष्णु के अनंत रूप से जुड़ा है गणेश विसर्जन, जानें पौराणिक रहस्य
क्यों दूसरों के विवाह में बाधा बनते थे भगवान गणेश, ब्रह्मा जी ने कैसे कराई गणेश जी की शादी
सितंबर में इस दिन करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, जाने सितंबर के एकादशी व्रत की तिथि
क्यों नहीं करने चाहिए भगवान गणेश के इस अंग के दर्शन, दर्शन करने पर होगा नुकसान
CET 2026 New Update: राजस्थान में CET को लेकर बड़ा बदलाव, लाखों युवाओं पर पड़ेगा सीधा असर
By Jyoti Mahender Bhardwaj
चित्तौड़गढ़: पुलिस की एंटी थेफ्ट टीम से इनामी बदमाश को छुड़ा ले गए साथी, वारदात में दो कांस्टेबल घायल
By Jageshwar prasad
खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की VC पर सोशल मीडिया पोस्ट से विवाद, यूनिवर्सिटी ने आरोपों को बताया भ्रामक
By Umeshwari Baghel
त्योहार से पहले नहीं हटेंगी स्ट्रीट वेंडर्स की दुकानें, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बनेगा ढाल, जानें कैसे
By Manya Jain
रूस ने यूक्रेन में भारतीय कारोबारी की दवा फैक्ट्री पर किया ड्रोन हमला, 400 करोड़ का नुकसान
By Ashish Bhardwaj
विधायकों के आलीशान 4 बीएचके फ्लैट का नक्शा तैयार, भूपेश बघेल की योजना को अब मिलेगा आकार
By Arun Tiwari
RBSE ने लिया बड़ा फैसला, अब साल में दो बार होगी दसवीं की परीक्षा, जानें क्या किया गया है बदलाव?
By Jageshwar prasad