सवाल पूछा… और मंत्री विजय शाह निकल लिए
News In Short
विजय शाह ने सवालों से बचते हुए चुप्पी साधी। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की। सरकार फैसले में देरी कर रही है, 9 फरवरी तक इंतजार। एसआईटी रिपोर्ट पहले ही पेश हो चुकी है, फिर भी कोई कदम नहीं। मंत्री का विवादित बयान और एसआईटी की जांच में सच्चाई साबित हुई।
News In Detail
शुक्रवार का दिन था। बीजेपी प्रदेश कार्यालय में चहल-पहल थी। मंत्री आए थे, कार्यकर्ता अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था… तभी एक सवाल ने माहौल बदल दिया। मीडिया ने जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से बस इतना पूछा कि आपके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जो मामला चल रहा है, उस पर क्या कहेंगे?” सवाल सुनते ही मंत्री का चेहरा बदला। न कोई जवाब, न कोई सफाई, न कोई “बाद में बात करेंगे।” वो सीधे गाड़ी की ओर बढ़े, बैठे और निकल गए। इतनी जल्दी कि किसी को समझने का मौका भी नहीं मिला। ये खबर भी पढ़ें... किशोर वाधवानी की केस से बचने की शातिर चाल, जज के मृत पिता को बताया अपना दोस्त
कार्यकर्ताओं की सुनवाई हुई, मीडिया की नहीं
भाजपा कार्यालय में उस दिन ड्यूटी लगी थी। विजय शाह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री शिवाजी पटेल कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुन रहे थे। कार्यकर्ता संतुष्ट दिखे, लेकिन मीडिया खाली हाथ रह गई। जब बाहर निकलते वक्त सवाल पूछा गया, तो जवाब देने के बजाय चुप्पी चुन ली गई। बाद में प्रेस ब्रीफिंग हुई, लेकिन उसमें सिर्फ शिवाजी पटेल नजर आए। विजय शाह कहीं नहीं दिखे। यही चुप्पी अब सवाल बन गई है। ये खबर भी पढ़ें... संपत्ति विवाद: डॉ. हेमलता की जमीन पर सफाई देने प्रेस वार्ता में घिरे डॉ. सुमित जैन
जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तो डर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, जांच पूरी हो चुकी है तो मंत्री सवालों से क्यों बच रहे हैं? विशेषज्ञों की मानें तो मध्यप्रदेश सरकार इस पूरे मामले में समय खींच रही है। रणनीति साफ दिखती है कि अभियोजन की मंजूरी पर फैसला टालना और सुप्रीम कोर्ट से और वक्त मांगने की तैयारी।
कोर्ट का सख्त आदेश, फिर भी देरी
- जांच पूरी हो चुकी है।
- एसआईटी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंप दी गई है।
- मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है।
20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा था- सरकार को दो हफ्ते में फैसला लेने को कहा गया था। अब अगली सुनवाई 9 फरवरी को है। कार्यदिवसों के हिसाब से सरकार के पास सिर्फ तीन दिन बचे हैं। फिर भी फैसला अटका हुआ है। ये खबर भी पढ़ें... इंदौर में यूरिया को दो करोड़ की ड्रग्स बताने के केस में 3 IPS की कार्य़शैली पर उठे सवाल, HC में याचिका
पूरा मामला आखिर है क्या?
- कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान का मामला।
- एसआईटी ने आरोप सही माने।
- छह महीने पहले रिपोर्ट आ चुकी।
- सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी।
- फिर भी सरकार चुप।
बजट सत्र का इंतजार या कार्रवाई से परहेज?
- सरकार की नीयत पर
- भाजपा संगठन की भूमिका पर
- और कानून के साथ हो रही देरी पर
सूत्र बताते हैं कि सरकार और पार्टी नेतृत्व बजट सत्र के बाद ही कोई कदम उठाना चाहते हैं। लेकिन सवाल यही है कि क्या कानून भी अब राजनीतिक कैलेंडर देखकर चलेगा? क्या सत्ता और संगठन, दोनों विजय शाह को लेकर असहज हैं? अब यह मामला सिर्फ विजय शाह तक सीमित नहीं रहा। यह सवाल बन गया है- जब रिपोर्ट आ चुकी है, जब कोर्ट सख्त है, जब समय खत्म हो रहा है तो आखिर बचाने की कोशिश क्यों? ये खबर भी पढ़ें... Top News : खबरें आपके काम की
9 फरवरी से पहले फैसला या नया बहाना?
भाजपा दफ्तर में उस दिन जो चुप्पी दिखी, वो अब भारी पड़ती नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, मीडिया के सवाल और सरकार की देरी- तीनों मिलकर यही कह रहे हैं कि मामला सिर्फ कानूनी नहीं, पूरी तरह राजनीतिक भी है।
अब देखना ये है...
9 फरवरी से पहले फैसला आता है या फिर एक और बहाना।