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News in short
- डॉक्टर सुमित जैन की प्रायोजित प्रेस वार्ता, पत्रकारों को पहले दिए गए लिखित सवाल।
- दान पत्र में डॉ. हेमलता की किसी भी बहन के गवाह के तौर पर हस्ताक्षर नहीं।
- खुद डॉ. सुमित जैन ने माना दोनों गवाह उनके ही पक्ष के थे।
- सालों तक सेवा के दावे पर केयरटेकर से जुड़े सवालों में लड़खड़ाए।
News in detail
जबलपुर में रिटायर्ड महिला डॉक्टर डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की करोड़ों की संपत्ति को लेकर विवाद में नया मोड़ आया है। आरोपों से घिरे डॉक्टर सुमित जैन को गुरुवार को पुलिस ने बयान के लिए बुलाया था। आज उनके एसडीएम के सामने बयान हुए। इसके बाद उन्होंने सफाई देने के लिए प्रेस वार्ता की, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस उनके लिए संकट बन गई। पत्रकारों के तीखे सवालों ने उनकी दलीलों को कमजोर किया और दान पत्र व सेवा के दावों की परतें खोल दीं।
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सुमित जैन ने दी सफाई
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की जमीन को लेकर उठे गंभीर आरोपों के बीच डॉक्टर सुमित जैन ने अपनी सफाई के लिए एक प्रेस वार्ता आयोजित की। लेकिन यह प्रेस वार्ता शुरू से ही संदेहों के घेरे में आ गई। ऐसा पहली बार देखा गया जब पत्रकारों को पहले से लिखे हुए सवाल थमा दिए गए और यह कहा गया कि पूरा मुद्दा ही सवालों में कवर हो रहा है, इसमें से कुछ भी पूछ सकते हैं। हालांकि जब पत्रकारों ने तय स्क्रिप्ट से बाहर जाकर सवाल पूछे, तो हालात पलट गए और डॉक्टर सुमित जैन खुद ही जवाबों में उलझते चले गए।
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दान पत्र में गवाहों ने खोल दी पोल
डॉक्टर सुमित जैन को सबसे बड़ा झटका उस वक्त लगा जब दान पत्र को लेकर सवाल उठे। डॉक्टर सुमित जैन जिस दान पत्र के आधार पर यह दावा कर रहे हैं कि डॉ. हेमलता श्रीवास्तव ने 1100 स्क्वायर फीट जमीन उन्हें दान की, उसमें डॉ. हेमलता की किसी भी बहन के हस्ताक्षर गवाह के रूप में नहीं हैं।
डॉ. सुमित जैन ने स्वीकार किया कि दान पत्र में जिन दो गवाहों के हस्ताक्षर हैं, वे उनकी ओर के लोग हैं। इससे बड़ा सवाल खड़ा हुआ जिस महिला की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे एम्बुलेंस और स्ट्रेचर पर रजिस्ट्री कार्यालय लाया गया, उसकी जमीन के दान पत्र में उसकी ओर से कोई गवाह क्यों नहीं था?
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मौजूद थीं बहन-जीजा, फिर भी गवाह नहीं बनीं
हैरानी की बात यह है कि दान पत्र के निष्पादन के समय डॉ. हेमलता की बहन शांति तिवारी और उनके पति मौके पर थे। इसके बावजूद उन्होंने गवाह के तौर पर हस्ताक्षर नहीं किए। जब सवाल पूछा गया, तो डॉक्टर सुमित जैन ने कहा कि बहन बार-बार जबलपुर नहीं आ सकतीं। यह जवाब उनके दावे को कमजोर करता है। यह डॉ. हेमलता के आरोप की पुष्टि करता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनसे धोखे से साइन कराए गए।
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सेवा के दावे पर लड़खड़ाए, केयरटेकर तक नहीं जानते
डॉ. सुमित जैन ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि वे डॉ. हेमलता के दिवंगत बेटे रचित श्रीवास्तव के कॉलेज मित्र थे। उन्होंने सालों तक डॉ. हेमलता की सेवा की। इसी सेवा से खुश होकर उन्हें और उनकी पत्नी प्राची जैन को जमीन दान की गई। जब केयरटेकर के बारे में पूछा गया, तो वे कुछ नहीं बता सके। वे यह भी नहीं बता सके कि केयरटेकर कब से वहां रह रहा है। डॉ. हेमलता की सेवा के बारे में भी वे स्पष्ट नहीं हो पाए।
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जो सेवा में थे, वे दावेदार नहीं जो नहीं थे, वही कब्जेदार
इस दौरान दो हेमलता श्रीवास्तव के बेटे दिवंगत डॉक्टर रचित श्रीवास्तव के दोस्त तरुण बहरानी का नाम भी सामने आया। डॉ सुमित जैन के साथ डॉक्टर हेमलता के केयरटेकर भी यह मान चुके हैं कि डॉक्टर तरुण बहरानी उनकी सेवा करते थे। लेकिन उल्लेखनीय बात यह है कि न तो तरुण बहरानी और न ही वर्षों से सेवा करने वाले केयरटेकर इस संपत्ति पर कोई दावा कर रहे हैं। इसके उलट, आरोप यह है कि जो लोग न उनके साथ रहते थे। न ही उनकी सेवा करते थे, वही लोग आज जमीन हथियाने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं।
आम सूचना क्यों नहीं, इतनी जल्दबाजी क्यों?
यह सवाल भी उठा कि यदि दान पत्र वैध था, तो कानून के अनुसार उसकी आम सूचना प्रकाशित क्यों नहीं करवाई गई? साथ ही यह भी पूछा गया कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि एक गंभीर रूप से बीमार महिला डॉक्टर को एंबुलेंस और स्ट्रेचर पर लाकर दान पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए। इन सवालों पर डॉक्टर सुमित जैन कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
डॉ. हेमलता का वीडियो और बहनों पर उठते सवाल
डॉ. सुमित जैन, डॉ. हेमलता के सामने आए वीडियो को पुराना बता रहे हैं। लेकिन इसी दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि 14 और 16 जनवरी को उन्हें डॉ. हेमलता से मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद ही उनके खिलाफ बयान सामने आया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर वे सालों से सेवा कर रहे थे, तो सिर्फ दो दिनों में डॉ. हेमलता को कैसे बहका लिया गया?
बहनों की भूमिका और बड़ी साजिश का शक
यह आशंका गहराती जा रही है कि डॉ. हेमलता की एक बहन ने संपत्ति का आधा हिस्सा डॉक्टर सुमित जैन और प्राची जैन के नाम ट्रांसफर किया। दूसरी बहन ने शेष आधी संपत्ति गायत्री परिवार के नाम कर दी। इसके बाद दोनों बहनों का जबलपुर छोड़ना इस संदेह को मजबूत करता है। उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि डॉ. हेमलता फिर से स्वस्थ होकर बयान दे पाएंगी।
अगर वह न बोल पातीं, तो सब खत्म हो चुका होता
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव का वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई जमीन दान नहीं की। यह पूरी कहानी एक साजिश की ओर इशारा करती है। जीवित रहते हुए कोई भी व्यक्ति दान पत्र रद्द कर सकता है। अब जमीन पर कब्जा जताने वालों की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही है। यदि डॉ. हेमलता बयान नहीं देतीं, तो उनकी जमीन हमेशा के लिए खो दी जाती। अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत का है। डॉ. हेमलता की हालत फिर से नाजुक हो गई है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।
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