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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- सीएम डॉ. मोहन यादव ने डीजीपी मकवाना से नाराजगी जताई, आदेश निरस्त किए गए।
- पीएचक्यू ने बिना स्वीकृति के नौ आईपीएस अफसरों को जिलों में भेजा था।
- गृह विभाग ने आदेश को मध्यप्रदेश सरकार के नियमों के खिलाफ बताते हुए रद्द किया।
- नौ आईपीएस अफसरों की ट्रेनिंग अब अधर में, नए आदेश का इंतजार।
- सीएम के दिल्ली दौरे के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
NEWS IN DETAIL
BHOPAL. मध्यप्रदेश में सिस्टम की परतें खोल देने वाला बड़ा मामला सामने आया है। मामला नया नहीं है, लेकिन जिस तरह से अब यह सामने आया है, उससे गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय (PHQ) आमने-सामने आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव डीजीपी कैलाश मकवाना और पीएचक्यू के सीनियर अफसरों से नाराज हो गए हैं। उनकी नाराजगी के बाद गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय का आदेश निरस्त कर दिया है। इसी के साथ मध्यप्रदेश के नौ नए आईपीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग अधर में लटक गई है।
पूरा विवाद सीधी भर्ती से आए आईपीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग और जिलों में पोस्टिंग से जुड़ा है। पुलिस मुख्यालय ने 2023 और 2024 बैच के आईपीएस अधिकारियों को 24 नवंबर 2025 से ट्रेनिंग और जिला प्रशिक्षण प्रक्रिया में भेजने का आदेश जारी किया था। यह आदेश गृह विभाग और बिना मुख्यमंत्री स्तर की स्वीकृति के जारी किया गया था। इसी को लेकर मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव पीएचक्यू के सीनियर अफसरों से नाराज हैं।
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यह है पूरा मामला
दरअसल, नए आईपीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग को लेकर प्रक्रिया साफ है। इसके तहत पहले पुलिस मुख्यालय प्रस्ताव बनाता है। यह प्रस्ताव गृह विभाग के पास जाता है। इसके बाद फाइल मुख्यमंत्री तक जाती है। अंतिम मंजूरी के बाद ही पोस्टिंग या ट्रेनिंग लागू होती है। इस पूरे मामले में पीएचक्यू ने यह प्रक्रिया नहीं अपनाई है। पुलिस मुख्यालय ने सीधे आदेश जारी कर नए आईपीएस अधिकारियों को जिलों में ट्रेनिंग के लिए भेज दिया था।
नवंबर 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक ये अधिकारी अलग-अलग जिलों में ट्रेनिंग कर रहे हैं। अब गृह विभाग ने आदेश ही निरस्त कर दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि इन आईपीएस की अब तक की ट्रेनिंग का क्या होगा, यह बड़ा सवाल है। क्या ट्रेनिंग अमान्य मानी जाएगी? क्या नए सिरे से ट्रेनिंग होगी या मंजूरी देकर इसे नियमित किया जाएगा? अभी इन सवालों के जवाब तय नहीं हैं।
यह था पूरा ट्रेनिंग प्लान
24 नवंबर 2025 जॉइनिंग।
24 नवंबर 2025 से 12 जून 2026 तक पीएचक्यू और पुलिस अकादमी ट्रेनिंग।
बीच में 1 सप्ताह एसआईबी ट्रेनिंग।
13 जून 2026 तक जिलों में फील्ड ट्रेनिंग।
भंवर में फंसी ​ट्रेनिंग
सूत्रों के मुताबिक, गृह विभाग का कहना है कि उन्हें पीएचक्यू के आदेश की कॉपी तक नहीं भेजी गई थी। यानी तीन महीने तक पूरा सिस्टम बिना औपचारिक मंजूरी के चलता रहा। जब मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा, तब जाकर कार्रवाई हुई। इसके बाद तुरंत आदेश निरस्त कर दिया गया। माना जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय के सीनियर अफसरों को कड़ी चेतावनी दी जा सकती है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
इन आईपीएस को जिलों में किया था पदस्थ
आलोक कुमार वर्मा (2023 बैच) – देवास
अमित कुमार (2024 बैच) – खंडवा
दीपांशु (2024 बैच) – सागर
काजल सिंह (2024 बैच) – उज्जैन
लेखराज मीना (2024 बैच) – छतरपुर
मनोज कुमार (2024 बैच) – ग्वालियर
राजीव अग्रवाल (2024 बैच) – रीवा
शुभम सिंह ठाकुर (2023 बैच) – जबलपुर
वैभव प्रिय (2023 बैच) – रतलाम
गृह विभाग ने क्या कहा...
गृह विभाग ने आदेश निरस्त करते हुए लिखा है कि यह कार्रवाई मध्यप्रदेश सरकार के कार्य नियमों के खिलाफ है। पुलिस मुख्यालय का वह आदेश, जिसमें नौ आईपीएस अधिकारियों को जिलों में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था, उसे निरस्त किया जाता है।
अब आगे क्या?
अब आगे दो विकल्प हैं। पहला, इन नौ आईपीएस अधिकारियों को वापस मुख्यालय बुलाकर नए जिले आवंटित किए जाएं और पूरी प्रक्रिया नए आदेश से शुरू हो।
दूसरा, फाइल को फिर से मंजूरी के लिए भेजकर अब तक की ट्रेनिंग को नियमित कर दिया जाए। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर ही होगा।
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सीएम लेंगे अंतिम फैसला
मुख्यमंत्री फिलहाल दिल्ली दौरे पर हैं। उनके लौटने के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। माना जा रहा है कि यह फैसला सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने तक जा सकता है।
इस मामले में पक्ष जानने के लिए द सूत्र ने डीजीपी कैलाश मकवाना से उनके मोबाइल नंबर पर फोन किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उन्हें मैसेज भेजकर भी पक्ष जानने की कोशिश की गई।
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