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आज 4 फरवरी है यानी विश्व कैंसर दिवस। आज दुनियाभर में विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाया जाता है। ऐसा इसलिए ताकि इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ा जा सके।
हाल ही में AIIMS भोपाल की एक रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। इसमें सामने आया कि जागरूकता की कमी के कारण 60% महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होता है।
इसकी पहचान तीसरी या चौथी स्टेज में होती है। जब बीमारी एडवांस स्टेज पर पहुंचती है, तो इलाज कठिन और महंगा हो जाता है। इस रिसर्च में सामने आया है कि हमारे समाज में जागरूकता की कितनी कमी है।
आइए जानें कैसे आप कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचान सकते हैं। साथ ही अपनी जीवनशैली में छोटे बदलाव करके इसे मात दे सकते हैं।
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क्या कहती है AIIMS भोपाल की रिपोर्ट
AIIMS Bhopal (कैंसर अस्पताल) के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने पिछले 6 महीनों में 167 मरीजों का डेटा चेक किया। रिपोर्ट बताती है कि 10 में से 6 महिलाओं (60%) को तब पता चलता है कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है, जब वे तीसरी या चौथी स्टेज पर पहुंच चुकी होती हैं।
केवल 8% महिलाएं ऐसी थीं, जो पहली स्टेज में डॉक्टर के पास पहुंचीं। देरी होने का मतलब है इलाज का मुश्किल और महंगा होना।
अगर कैंसर पहली स्टेज में पकड़ा जाए, तो बचने की उम्मीद 90% से ज्यादा होती है। लेकिन चौथी स्टेज तक आते-आते खतरा बहुत बढ़ जाता है।
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मध्यप्रदेश का कैंसर मैप
डॉ. माधवानंद कर (डायरेक्टर, एम्स भोपाल) के मुताबिक, एमपी में कैंसर अब अलग-अलग पैटर्न में दिख रहा है। एमपी में कैंसर की स्थिति...
भोपाल (ओरल कैंसर): यहां (कैंसर इलाज) पुरुष 18-20% मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं। रातभर मुंह में गुल या तंबाकू रखना इसकी मुख्य वजह है।
ग्वालियर-चंबल (गॉल ब्लैडर): यहां पित्त की थैली का कैंसर ज्यादा है। पानी में मौजूद हैवी मेटल्स और पथरी को अनदेखा करना भारी पड़ रहा है।
इंदौर (लाइफस्टाइल): यहां 30% केस ब्रेस्ट कैंसर के हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी और एक्सरसाइज की कमी 35-45 साल की महिलाओं को बीमार कर रही है।
मालवा (केमिकल इंड्यूस्ड): पंजाब की तरह मालवा में भी कीटनाशकों की वजह से पेट और किडनी के कैंसर बढ़ रहे हैं।
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इन लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर
डॉक्टर्स का कहना है कि हमारा शरीर कैंसर जैसी बीमारी शुरू होने पर छोटे-छोटे अलर्ट देता है। अगर हम इन्हें समय पर पहचान लें, तो जान बचाना बहुत आसान हो जाता है।
ब्रेस्ट में गांठ या भारीपन
सिर्फ दर्द वाली गांठ ही खतरनाक नहीं होती। अगर आपको ब्रेस्ट या बगल (Armpit) में किसी भी तरह की सख्त गांठ महसूस हो तो तुरंत जांच कराएं। कई बार यह बिना दर्द के भी हो सकती है।
आकार और त्वचा में बदलाव
अगर अचानक एक ब्रेस्ट का साइज दूसरे से अलग दिखने लगे या त्वचा पर संतरे के छिलके जैसी सिलवटें पड़ने लगें, तो यह एक गंभीर संकेत हो सकता है। त्वचा का लाल होना या खिंचाव महसूस होना भी अलार्म है।
असामान्य डिस्चार्ज
अगर निप्पल से कोई असामान्य डिस्चार्ज या खून जैसा रिसाव हो रहा है, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह अंदरूनी समस्या का बड़ा संकेत हो सकता है।
मुंह के छाले और सफेद धब्बे
भोपाल जैसे शहरों में ओरल कैंसर बढ़ रहा है। अगर मुंह में कोई ऐसा छाला है जो 2 हफ्ते में भी ठीक नहीं हो रहा, या जीभ और गालों के अंदर सफेद/लाल धब्बे दिख रहे हैं, तो यह कैंसर की शुरुआत हो सकती है।
बिना वजह वजन गिरना और थकान
अगर आप डाइटिंग नहीं कर रहे, फिर भी अचानक 4-5 किलो वजन कम हो जाए और आप हर वक्त कमजोरी महसूस करें, तो यह इशारा है कि शरीर के अंदर कुछ ठीक नहीं है।
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कैंसर को हराने के कुछ जरूरी कदम
स्टेप 1: सेल्फ-एग्जामिनेशन (खुद की जांच)
हर महिला को महीने में एक बार (पीरियड्स खत्म होने के 2-3 दिन बाद) शीशे के सामने खड़े होकर अपने ब्रेस्ट की जांच खुद करनी चाहिए। हाथों से महसूस करें कि कहीं कोई नई गांठ या बदलाव तो नहीं है।
स्टेप 2: मेडिकल स्क्रीनिंग (40 के बाद जरूरी)
जब उम्र 40 पार कर जाए, तो साल में एक बार मैमोग्राफी (Mammography) जरूर करवाएं। यह एक तरह का एक्स-रे है जो बहुत छोटी गांठ को भी पकड़ लेता है, जिसे हाथ से महसूस नहीं किया जा सकता।
स्टेप 3: खान-पान में सुधार
प्रोसेस्ड फूड छोड़ें: पैकेट बंद खाना, ज्यादा नमक और चीनी से दूरी बनाएं।
फाइबर बढ़ाएं: अपनी थाली में रंग-बिरंगे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें। यह शरीर से गंदगी (Toxins) बाहर निकालने में मदद करते हैं।
स्टेप 4: नशों से पूर्ण ब्रेकअप
कैंसर का सबसे बड़ा दोस्त तंबाकू और सिगरेट है। गुटखा, खैनी या शराब का सेवन शरीर की कोशिकाओं को डैमेज करता है। आज ही इन आदतों को छोड़ने का संकल्प लें।
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