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News in Short
एम्स भोपाल के शोध में नींद की गड़बड़ी और कैंसर के बीच संबंध पाया गया।
नाइट शिफ्ट, देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को प्रभावित करते हैं।
सर्कैडियन रिद्म का सही कामकाज रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।
कैंसर की रोकथाम में जीवनशैली सुधार जैसे नींद, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या मददगार हो सकते हैं।
एम्स निदेशक डॉ. माधवानंद ने स्वस्थ जीवनशैली और नींद के महत्व पर जोर दिया।
News in Detail
Bhopal news. क्या आप जानते हैं कि आपकी एक रात की अधूरी नींद कैंसर जैसी बीमारी को न्यौता दे सकती है? एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों ने अपनी ताजा रिसर्च में एक बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा किया है।
इस रिसर्च के मुताबिक, नींद की कमी आपके शरीर के इम्यून सिस्टम को पूरी तरह तबाह कर सकती है। जब आप देर रात तक जागते हैं, तो शरीर की नेचुरल बायोलॉजिकल क्लॉक पूरी तरह बिगड़ जाती है।
यह बिगड़ी हुई घड़ी शरीर में कैंसर कोशिकाओं को पनपने के लिए खुला रास्ता दे देती है। एम्स के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि खराब लाइफस्टाइल और नाइट शिफ्ट सेहत के दुश्मन हैं। चलिए जानते हैं एम्स भोपाल की इस जादुई रिसर्च के पीछे का पूरा सच क्या है।
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देर रात तक जागने से होती है ये दिक्कत
इस शोध का नेतृत्व एम्स भोपाल के जैव रसायन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने किया। शोध में बताया गया है कि देर रात तक जागना, नाइट शिफ्ट में काम करना और अनियमित दिनचर्या (irregular schedule) शरीर की जैविक घड़ी (biological clock) को प्रभावित करते हैं। इस गड़बड़ी से शरीर के हार्मोन संतुलन, पाचन प्रक्रिया और इम्युन सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने और फैलने का अवसर मिलता है।
डेली रूटीन से शरीर का इम्यून सिस्टम सही होगा
मानव शरीर में एक स्वाभाविक दिन-रात चक्र होता है, जिसे सर्कैडियन रिद्म कहा जाता है। यह शरीर की नींद, ऊर्जा स्तर और रोग प्रतिरोधक क्षमता को नियंत्रित करता है। जब यह चक्र बिगड़ता है, तो शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जैविक घड़ी (biological clock) के सही कामकाज से शरीर को हर प्रकार की बीमारी से बचाव मिलता है।
ऐसे कम किया जा सकता है कैंसर के खतरे को
इस अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कैंसर की रोकथाम सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं है। जीवनशैली में बदलाव जैसे नियमित नींद समय पर भोजन संतुलित दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आने वाले समय में, कैंसर का इलाज अधिक व्यक्तिगत तरीके से होगा, जिसमें मरीज की नींद और जैविक घड़ी को भी ध्यान में रखा जाएगा।
एम्स डायरेक्टर ने क्या कहा
एम्स भोपाल के डायरेक्टर डॉ. माधवानंद ने भी इस शोध को लेकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह रिसर्च न केवल साइंटिफिक अप्रोच से जरूरी है, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी और गाइडेंस है। समय पर सोना और जागना, देर रात स्क्रीन से दूरी बनाना और स्वस्थ डेली रूटीन अपनाकर गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि हर व्यक्ति पूरी नींद लें और स्वस्थ रहें।
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