किशोर वाधवानी की केस से बचने की शातिर चाल, जज के मृत पिता को बताया अपना दोस्त

गुटखा किंग किशोर वाधवानी ने केस सुनवाई से बचने के लिए चाल चली। उसने न्यायाधीश शुभ्रा सिंह के स्वर्गीय पिता से संबंध का हवाला दिया। न्यायाधीश शुभ्रा सिंह ने इस दावे को खारिज किया।

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Sanjay Gupta
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INDORE.  गुटखा किंग किशोर वाधवानी ने केस सुनवाई से बचने के लिए शातिर चाल चली। वाधवानी ने चार सौ बीसी के केस की सुनवाई कर रही न्यायाधीश शुभ्रा सिंह की कोर्ट से केस ट्रांसफर के लिए आवेदन लगा दिया। इस आवेदन में लिखा कि न्यायाधीश सिंह के स्वर्गीय पिता न्यायमूर्ति शंभू सिंह से उनके करीबी संबंध रहे हैं।

ऐसे में पीठासीन अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगे। इसके लिए वह चाहते हैं कि यह केस अन्य कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। लेकिन खुद न्यायाधीश शुभ्रा सिंह ने वाधवानी की पोल खोल दी। 

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वाधवानी ने आवेदन में यह लिखा

वाधवानी ने सत्र न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव के पास अपने विरूद्ध चल रहे केस 536/25 की सुनवाई अन्य कोर्ट में शिफ्ट करने का आवेदन लगाया। यह केस 26वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शुभ्रा सिंह के यहां लगा है। यह केस तुकोगंज थाने में धारा 420, 467, 468 का है। 

वाधवानी ने कहा कि न्यायाधीश शुभ्रा सिंह के पिता शंभू सिंह का निधन  हो गया है। लेकिन उनका आवेदक से घनिष्ठ संबंध था। पीठासीन अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगे, इसलिए यह केस निष्पक्ष सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया जाए।

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न्यायधीश शुभ्रा सिंह ने इस तरह खोली पोल

शुभ्रा सिंह ने इस मामले में कोर्ट में अपनी टिप्पणी रखी जिससे वाधवानी की पोल खुल गई। उन्होंने कोर्ट में बताया कि उनके पिता न्यायमूर्ति सिंह का इसआवेदक से कोई संबंध नहीं रहा है। उनकी मृत्यु तक उन्होंने कभी भी पिता के मुंह से इनके बारे में नहीं सुना। न ही कभी इन्हें पिता के निवास पर आते-जाते देखा। यह भी बताया कि इसके पहले भी वह एक अन्य केस में इनके केस की सुनवाई कर चुकी है। तब वह सीबीआई में विशेष न्यायाधीश के तौर पर 2009 से 2012 तक थी। इस दौरान इस तरह की आपत्ति कभी नहीं लगी। 

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वाधवानी सुनवाई बढ़वाने के लिए ये कर रहे

न्यायाधीश सिंह ने यह भी कोर्ट को बताया कि वह लगातार कोर्ट में इस केस की सुनवाई कर रही है। इसमें बार-बार आरोपों पर बहस के लिए जोर दे रहे थी, लंबी तारीख नहीं दी जा रही थी। इसलिए यह केस ट्रांसफर का आवेदन लगाया गया है। सभी तर्कों के सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश ने वाधवानी की याचिका सिरे से खारिज कर दी।

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