विजयपुर मामले में क्या कांग्रेस से हुई चूक, विधायकी गंवाने वाले मुकेश मल्होत्रा बोले- कुछ लोगों ने ध्यान नहीं दिया
INDORE. विजयपुर विधानसभा मामले मे ग्वालियर हाईकोर्ट में पक्ष रखने में क्या कांग्रेस पार्टी ने बड़ी चूक कर दी है? यह बड़ा सवाल उठ रहा है। इंदौर से कांग्रेस नेता ने इस मामले को लेकर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा है। वहीं इस मामले में जब विधायकी जाने वाले मुकेश मल्होत्रा से 'द सूत्र' ने बात की तो उनका जवाब भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
क्यों उठ रहा सवाल
हाईकोर्ट में पैरवी के लिए इस मामले में याचिकाकर्ता बीजेपी से चुनाव लड़ने वाले रामनिवास रावत थे। इसमें कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को उन्होंने पार्टी बनाया था।
रावत की ओर से 15 अधिवक्ताओं की पैनल थी। वहीं मल्होत्रा की ओर से भी इसमें लंबी-चौड़ी पैनल थी, लेकिन कांग्रेस के दिग्गज वकीलों की इसमें कमी थी। हालांकि, आर्डर शीट में वरिष्ठ वक्ता विवेक तन्खा का नाम मेंशन जरूर है।
'द सूत्र' से यह बोले मुकेश मल्होत्रा
इसी मामले में जब 'द सूत्र' ने मल्होत्रा से बात की तो उन्होंने यह जवाब दिए-
- सवाल- क्या वरिष्ठ अधिवक्ता उतरे थे आपकी ओर से
मल्होत्रा- अब वह पार्टी लगाएंगे बैठक चल रही है - सवाल- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
मल्होत्रा- हां जाएंगे - सवाल- क्या लगता है कि पार्टी से और वरिष्ठ अधिवक्ता आते तो बेहतर होता
मल्होत्रा- अब पता नहीं क्या हुआ है उसमें कुछ समझ नहीं आ रहा है - सवाल- आपकी ओर से भी पार्टी से कोई मांग हुई थी कि दिल्ली से वकील आ जाएं
मल्होत्रा- अब उस समय ज्यादा ध्यान नहीं दिया कुछ लोगों ने - सवाल- लगता है कि और अधिवक्ता आते तो बेहतर होगा, रावतजी ओर से कई अधिवक्ता थे. आपने मांग की हो पार्टी से
मल्होत्रा- नहीं ऐसा नहीं है, मांग नहीं की थी।
उधर कांग्रेस नेता ने बताई रणनीतिक चूक
वहीं इंदौर से कांग्रेस के पूर्व महासचिव राकेश यादव इसे लेकर राहुल गांधी को पत्र लिखा है और इसे रणनीतिक कमी बताया है। कहा है कि यह मामला केवल एक विधायक की सदस्यता समाप्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश कांग्रेस संगठन की रणनीतिक एवं कानूनी कमजोरियों को उजागर करने वाली महत्वपूर्ण राजनीतिक चेतावनी है।
विजयपुर प्रकरण में न्यायालयीन पैरवी के दौरान अपेक्षित गंभीरता, अनुभवी विधि विशेषज्ञों की प्रभावी भागीदारी तथा समय रहते संगठनात्मक समन्वय का अभाव दिखाई दिया। इससे कांग्रेस को एक निर्वाचित विधायक की हानि उठानी पड़ी।
राज्यसभा में एक सीट पर आया संकट
यादव ने आरोप लगाए कि इससे राज्यसभा की एक सीट को लेकर मप्र में कांग्रेस के सामने विकट स्थिति आ सकती है। कांग्रेस के पास अभी मप्र विधानसभा में 63 विधायक है, जबकि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 मत आवश्यक हैं। अर्थात पार्टी के पास केवल 5 मतों का सीमित अंतर ही है।
ऐसी परिस्थिति में क्रॉस वोटिंग, विधायकों की अनुपस्थिति या तकनीकी कारणों से मत अमान्य होने जैसी बात हुई तो एकमात्र राज्यसभा सीट को गंभीर खतरे में डाल सकती हैं। इसलिए प्रदेश कांग्रेस संगठन को अत्यंत सक्रिय, सतर्क एवं संगठित रहने की आवश्यकता है।
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