सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में वन अफसर ने सांभर को पोहा खिलाया, सस्पेंड किए गए
समझें क्या है पूरा मामला
- सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का एक वीडियो वायरल हुआ था।
- वीडियो में अफसर सांभर को पोहा खिला रहे थे।
- वे जंगली सांभर को छू भी रहे थे।
- इस हरकत पर वन विभाग ने सख्त कार्रवाई की।
- अफसर विनोद वर्मा को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया।
जंगल में सांभर को खिलाया पोहा
मध्यप्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से एक वीडियो सामने आया था। यह वीडियो कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें प्रभारी सहायक संचालक विनोद वर्मा एक जंगली सांभर को पोहा खिला रहे थे। वर्मा चूरना रेंज में इटारसी के प्रभारी सहायक संचालक थे। वे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बोरी रेंज के प्रभारी अधीक्षक का काम भी देख रहे थे। बताया जा रहा है कि यह सांभर पहले रेस्क्यू किया गया था। वीडियो में वर्मा सांभर को सिर्फ खाना ही नहीं खिला रहे थे। वे उसे प्यार से छू भी रहे थे। यह वीडियो वर्मा ने खुद कुछ दिन पहले शेयर किया था। वीडियो वायरल होते ही इस पर तीखी प्रतिक्रिया आई।
वन विभाग ने माना गंभीर लापरवाही
यह वीडियो वायरल होने के बाद वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स ने इस पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जंगली जानवर के साथ ऐसा व्यवहार सही नहीं है। यह वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट के मूल नियमों के खिलाफ है। इसके बाद वन विभाग हरकत में आया। फील्ड डायरेक्टर राकेश नंदा ने सस्पेंशन का आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि वर्मा का व्यवहार जंगली जानवर के साथ ठीक नहीं था। यह उनकी सरकारी ड्यूटी में गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता को दिखाता है। विभाग ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 का उल्लंघन बताया। इसी आधार पर 25 जून को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।
सस्पेंशन ऑर्डर में क्या लिखा है
सस्पेंशन का आदेश मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत जारी हुआ है। इसमें साफ कहा गया है कि विनोद वर्मा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाता है। आदेश में यह भी बताया गया कि सस्पेंशन के दौरान उनका मुख्यालय कहां रहेगा। उनका मुख्यालय अब पिपरिया स्थित सहायक संचालक कार्यालय रहेगा। आदेश में यह शर्त भी जोड़ी गई है कि वे फील्ड डायरेक्टर की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। यह कार्रवाई वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव के निर्देश पर हुई। विभाग के सूत्रों के अनुसार यह कदम बाकी अफसरों के लिए भी एक सख्त संदेश है।
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट ने किया सस्पेंशन का समर्थन
इस सस्पेंशन पर वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रमुख सचिव संदीप यादव ने सख्त कार्रवाई की है। उनका कहना था कि वर्मा का व्यवहार सांभर के साथ अप्राकृतिक और लापरवाह था। दुबे के मुताबिक यह कार्रवाई पूरे वन विभाग को साफ संदेश देती है। उनका कहना था कि वाइल्डलाइफ नियमों के उल्लंघन पर अब कोई ढिलाई नहीं चलेगी। यह बयान उन अफसरों के लिए भी एक चेतावनी है जो जंगल और वाइल्डलाइफ की रक्षा करते हैं।
क्यों गंभीर है यह मामला
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व नर्मदापुरम जिले में स्थित है। यह मध्यप्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्व में से एक है। यहां सांभर, बाघ, तेंदुआ जैसे कई जंगली जानवर पाए जाते हैं। जंगली जानवरों को इंसानी खाना खिलाना उनकी सेहत के लिए नुकसानदेह माना जाता है। ऐसा करने से जानवर इंसानों के पास आने लगते हैं। इससे जानवर और इंसान दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे जानवर का प्राकृतिक व्यवहार भी बदल सकता है। इसी वजह से वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत भी इसे गंभीर माना जाता है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अफसर होने के बावजूद वर्मा का यह व्यवहार चर्चा का विषय बन गया।
आगे क्या होगा
विनोद वर्मा अब सस्पेंशन की अवधि में रहेंगे। उन्हें पिपरिया स्थित कार्यालय में ही रहना होगा। बिना अनुमति वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। विभाग इस मामले में आगे जांच भी कर सकता है। वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट लगातार इस तरह के मामलों पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि वन अफसरों को नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। यह मामला आने वाले समय में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
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