भारत में तेजी से फैल रही पानी से होने वाली बीमारियां, एमपी टॉप पर

Sanjay Dhiman | Feb 04, 2026, 17:10 IST
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Huge surge in water-borne diseases in India MP on top Rajya Sabha report raises concerns
Photograph: (the sootr)

राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार भारत में टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसे जल-जनित रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, इंदौर का भागीरथपुरा ताजा उदाहरण। जानिए राज्यों का हाल और बचाव के तरीके।

NEWS IN SHORT

  • भारी उछाल: पिछले 5 वर्षों में जल-जनित बीमारियों में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज की गई।
  • हेपेटाइटिस ए: हेपेटाइटिस ए के मामलों में 890% की सबसे खतरनाक बढ़त देखी गई।
  • टाइफाइड का कहर: टाइफाइड के मामले बढ़कर 5.67 लाख हुए, मध्य प्रदेश सबसे आगे रहा।
  • राज्यों का हाल: दिल्ली में हैजा और केरल में लेप्टोस्पायरोसिस के सर्वाधिक मामले मिले।
  • एक राहत: दस्त (ADD) के मामलों में 60 लाख से 23 लाख की गिरावट आई।
  • भागीरथपुरा कांड: इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से 32 लोगों की मौत हुई।

NEWS IN DETAIL

New Delhi. हाल ही में राज्यसभा में एक ऐसी रिपोर्ट पेश की गई है जिसने सबकी नींद उड़ा दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि पिछले 5 सालों में भारत में गंदे पानी से होने वाली बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं।यह जानकारी द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई।

आंकड़े इतने डरावने हैं कि आप पानी पीने से पहले दो बार सोचेंगे। सरकारी डाटा (IDSP/IHIP) कहता है कि हेपेटाइटिस A और हैजा जैसी बीमारियां कई गुना बढ़ गई हैं। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हमारे सिस्टम की सेहत पर एक बड़ा सवालिया निशान है। इसका हालिया उदाहरण इंदौर के भागीरथपुरा में सामने भी आ चुका है।

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हेपेटाइटिस A और टाइफाइड का खौफनाक ट्रेंड

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात हेपेटाइटिस A को लेकर है। 2021 में इसके करीब 4,000 मामले थे, जो 2025 में बढ़कर 40,000 के पार पहुंच गए। यह सीधे-सीधे 890% की बढ़त है, जो किसी भी देश के लिए खतरे की घंटी है। वहीं, टाइफाइड के मामले भी कम नहीं हैं। यह बीमारी 1.95 लाख से बढ़कर सीधे 5.67 लाख तक पहुंच गई है।

अगर हम राज्यों की बात करें, तो इसमें भी मध्यप्रदेश के आंकड़े चौंकाने वाले है। पानी से होने वाली बिमारियों के मामले में मध्य प्रदेश लिस्ट में पहले स्थान पर है। इसके बाद कर्नाटक और छत्तीसगढ़ का नंबर आता है, जहां टाइफाइड का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा गया।

हैजा और लेप्टोस्पायरोसिस: कहां है सबसे बुरा हाल?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का हाल भी कुछ खास अच्छा नहीं है। हैजा (Cholera) के मामले में दिल्ली नंबर वन पर रही है। यहां 385 केस दर्ज किए गए, जबकि गुजरात और कर्नाटक भी इसके पीछे-पीछे ही हैं।

दूसरी तरफ, चूहों और जानवरों के पेशाब से फैलने वाली बीमारी लेप्टोस्पायरोसिस ने केरल में तबाही मचा रखी है। देश भर में इसके मामले 243% बढ़े हैं, जिनमें केरल से सबसे ज्यादा 4,279 केस सामने आए हैं।

बीमारियों की बढ़त का चार्ट (2021-2025)

बीमारीवृद्धि (%)स्थिति
हेपेटाइटिस A890%बहुत गंभीर
हैजा (Cholera)421%चिंताजनक
लेप्टोस्पायरोसिस243%बढ़ता खतरा
टाइफाइड191%व्यापक प्रसार
हेपेटाइटिस E87%नियंत्रण की जरूरत

इंदौर का भागीरथपुरा कांड ताजा उदाहरण

इंदौर का भागीरथपुरा कांड ताजा उदाहरण है। मध्य प्रदेश में पानी से होने वाली बीमारियां किस प्रकार जानलेवा हो रही हैं, इसका ताजा उदाहरण भागीरथपुरा है। यहां गंदा पानी पीने से अब तक 32 लोगों की जान जा चुकी है। अभी भी यहां दर्जनों लोग अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश सरकार अपने स्तर पर अब व्यवस्थाएं सुधारने के प्रयास भी कर रही है, लेकिन इस घटना ने प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

क्या कोई अच्छी खबर भी है?

जी हां, इस अंधेरे में एक छोटी सी उम्मीद की किरण भी है। 'एक्यूट डायरियल डिजीज' (ADD) यानी दस्त की बीमारी के मामलों में भारी कमी आई है। जहां 2021 में करीब 60 लाख लोग इसकी चपेट में थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर 23.5 लाख रह गया है। इससे पता चलता है कि साफ-सफाई और ओआरएस (ORS) के प्रति जागरूकता काम कर रही है, लेकिन अन्य बीमारियों पर लगाम कसना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

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निष्कर्ष: अब आगे क्या?

यह रिपोर्ट साफ करती है कि सरकार के 'नल से जल' और स्वच्छता मिशन के बावजूद, जमीनी स्तर पर अभी बहुत काम बाकी है। पानी का शुद्धिकरण और समय पर बीमारियों की पहचान ही हमें इस संकट से बचा सकती है। अगर हम अब भी नहीं जागे, तो आने वाले साल और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं।

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