रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों को सम्मान में मिले चांदी के सिक्के निकले नकली

Aman Vaishnav | Jan 06, 2026, 12:20 IST
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पश्चिम मध्य रेलवे में रिटायर्ड कर्मचारियों के सम्मान के नाम पर धोखा हुआ है। रिटायरमेंट के समय जो चांदी के सिक्के दिए जाते थे, वो असल में नकली निकले। जांच में ये खुलासा हुआ कि...

5 पॉइंट में समझें पूरा मामला...



  • रेलवे बोर्ड अपने रिटायर्ड कर्मचारियों को चांदी का सिक्का देता है।
  • रिटायरमेंट पर मिलने वाले गोल्ड प्लेटेड चांदी के सिक्के नकली निकले।
  • 20 ग्राम के सिक्के में चांदी की मात्रा सिर्फ 0.23% ही मिली।
  • रेलवे को प्रति सिक्का करीब 2 हजार 200 रुपए की ठगी का अनुमान है।
  • विजिलेंस जांच और लैब रिपोर्ट के बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) में एक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। रिटायरमेंट के समय रेल कर्मचारियों को सम्मान के तौर पर दिए जाने वाले गोल्ड प्लेटेड चांदी के सिक्के जांच में नकली पाए गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चांदी के नाम पर तांबे के सिक्के बांटे गए। पूरा मामला जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़ें।



सम्मान के सिक्कों में बड़ा घोटाला

रेलवे अपने रिटायर्ड कर्मचारियों को चांदी का सिक्का देता है। यह सिक्का सम्मान के तौर पर दिया जाता है। भोपाल के सामान्य भंडार डिपो में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। रिटायर कर्मचारियों को मिले सिक्के असल में नकली निकले हैं।



तांबे के निकले चांदी के सिक्के

सिक्कों की क्वालिटी पर शक हुआ तो उनकी लैब में जांच कराई गई। जांच में पता चला कि जिन्हें चांदी के ऊपर सोने की परत वाले सिक्के बताया जा रहा था, वे असल में तांबे के निकले।



चांदी की मात्रा न के बराबर

लैब रिपोर्ट के अनुसार सिक्के में चांदी की मात्रा हैरान कर देने वाली थी। 20 ग्राम के सिक्के में सिर्फ 0.23% चांदी मिली। जबकि रेलवे से प्रति सिक्का 2 हजार 200 रुपए वसूले गए।



विजिलेंस जांच में खुली पोल

विजिलेंस विभाग ने सिक्कों की बनावट की जांच की। वजन और बनावट पर संदेह होने पर सैंपल भेजे गए। इससे पहले आरआईटीईएस ने इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट जारी किया था। इसके बावजूद घटिया क्वालिटी के सिक्के सप्लाई कर दिए गए।



इंदौर की फर्म पर होगी एफआईआर

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव के मुताबिक इंदौर की फर्म मेसर्स वायबल डायमंड्स पर एफआईआर की जा रही है। फर्म को 3 हजार 640 सिक्के सप्लाई करने का ऑर्डर मिला था।



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