MP में खेल पर करोड़ों खर्च, महिला हॉकी अकादमी में 2 साल से कोच नहीं
समझें क्या है पूरा मामला
- MP में खेलों पर बड़े खर्च के दावे किए जा रहे हैं।
- ग्वालियर महिला हॉकी अकादमी में मुख्य कोच नहीं है।
- करीब दो साल से प्रशिक्षक का पद खाली बताया जा रहा है।
- करीब 90 बालिका खिलाड़ी प्रशिक्षण से जुड़ी हैं।
- कोच की कमी से खिलाड़ियों के भविष्य पर सवाल उठे हैं।
खेल का बजट या सिर्फ दिखावा?
सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की बात करती है। बड़े स्तर पर खेलो एमपी जैसे आयोजन होते हैं और खिलाड़ियों के लिए संसाधनों पर पैसा खर्च किया जाता है। लेकिन दूसरी तरफ जिस अकादमी का काम ही महिला हॉकी की प्रतिभाओं को तैयार करना है, वहां मुख्य प्रशिक्षक का पद लंबे समय से खाली है। यही विरोधाभास अब विभाग की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। सवाल यह नहीं है कि आयोजन कितने भव्य हुए, सवाल यह है कि उन आयोजनों के बाद खिलाड़ी मैदान में कितना बेहतर तैयार हुए?
दो साल में भी कोच नहीं
ग्वालियर की राज्य महिला हॉकी अकादमी में मुख्य प्रशिक्षक का पद अप्रैल 2024 से रिक्त बताया गया है। इस दौरान अकादमी में खिलाड़ी प्रशिक्षण लेती रहीं, लेकिन मुख्य प्रशिक्षक की नियुक्ति का मामला आगे नहीं बढ़ पाया। अप्रैल 2026 में पद के लिए विज्ञापन निकाला गया और आवेदन भी लिए गए। इसके बावजूद चयन प्रक्रिया का परिणाम अब तक सामने नहीं आना व्यवस्था की रफ्तार पर सवाल खड़ा करता है।
90 खिलाड़ियों पर खर्च, प्रशिक्षण का क्या?
अकादमी में करीब 90 बालिका हॉकी खिलाड़ी प्रशिक्षणरत बताई गई हैं। इन खिलाड़ियों के आवास, भोजन, खेल सामग्री और शिक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर सरकारी धन खर्च होता है। ऐसे में असली सवाल वित्तीय खर्च से ज्यादा उस खर्च के नतीजे का है। यदि खिलाड़ियों को नियमित और विशेषज्ञ प्रशिक्षण ही नहीं मिल रहा, तो सरकार का खेल प्रतिभाओं को तैयार करने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?
विज्ञापन निकला, फिर भी फैसला क्यों नहीं?
विभाग की ओर से मुख्य प्रशिक्षक पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चयन को अंतिम रूप नहीं दिया गया। यहीं से सवाल और गंभीर होता है क्या विभाग के पास योग्य प्रशिक्षक चुनने की व्यवस्था नहीं है, या फिर प्रक्रिया किसी दूसरे कारण से अटकी हुई है? सिर्फ प्रक्रिया चलना काफी नहीं है। खिलाड़ियों को समय पर प्रशिक्षक मिलना ज्यादा जरूरी है।
राजनीति के आरोप भी सवालों के घेरे में
इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है और बिना ठोस प्रमाण किसी व्यक्ति की भूमिका तय नहीं की जा सकती। लेकिन यदि किसी खेल अकादमी में नियुक्ति प्रक्रिया राजनीतिक खींचतान की वजह से प्रभावित होती है, तो इसका सबसे सीधा नुकसान खिलाड़ियों को ही होता है।
खेलो एमपी की चमक बनाम अकादमी की हकीकत
एक तरफ सरकार खेलों को लेकर बड़े स्तर पर माहौल बनाने में जुटी है। दूसरी तरफ एक प्रमुख हॉकी अकादमी में कोच की कमी जैसी बुनियादी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। यही अंतर अब पूछने पर मजबूर करता है कि सरकारी खेल नीति का फोकस खिलाड़ियों की ट्रेनिंग है या सिर्फ बड़े आयोजनों की ब्रांडिंग? बड़े मंच, बड़े आयोजन और बड़े बजट तभी मायने रखते हैं, जब मैदान पर खिलाड़ी को बेहतर कोच और नियमित प्रशिक्षण मिले।
नियुक्ति भोपाल से होगी!
जिले में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी के मुताबिक रिक्त पदों पर नियुक्ति भोपाल स्तर से होती है और अप्रैल में विज्ञप्ति जारी की गई थी। आवेदन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति नहीं हो सकी। यानी प्रक्रिया का हवाला मौजूद है, लेकिन खिलाड़ियों के लिए नतीजा अभी भी वही है कोच का इंतजार।
सबसे बड़ा सवाल
अगर दो साल से ज्यादा समय तक मुख्य प्रशिक्षक का पद खाली रह सकता है, तो विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खेल प्रतिभा इंतजार नहीं करती। खिलाड़ी की उम्र, फॉर्म और प्रतियोगिता का समय लगातार आगे बढ़ता रहता है। ऐसे में नियुक्ति में देरी सिर्फ प्रशासनिक देरी नहीं, खिलाड़ी के करियर की कीमत भी बन सकती है।
मंत्री विश्वास सारंग का पक्ष
खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की एकेडमी से बड़ी संख्या में बालिका खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की अकादमियों तक पहुंच रही हैं। देशभर की प्रतियोगिताओं में मध्य प्रदेश की बालिका खिलाड़ी लगातार भाग ले रही हैं और आगे भी बेहतर प्रदर्शन के साथ प्रदेश का प्रतिनिधित्व करती रहेंगी।
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