महिला आरक्षण पर बड़ा दांव: 2029 से बदलेगा चुनावी गणित, MP में बढ़ेंगी सीटें
देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आने वाला है। संसद में महिला आरक्षण कानून में संशोधन के साथ अब लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का रास्ता तेज कर दिया गया है। इसका सीधा असर सीटों की संख्या, चुनावी समीकरण और सरकार बनाने के गणित पर पड़ेगा खासतौर पर मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में।
संसद में पेश हुए 3 बड़े बिल, क्यों है अहम?
गुरुवार को संसद में महिला आरक्षण से जुड़े तीन संशोधन बिल पेश किए गए। इनका मकसद महिलाओं को संसद और विधानसभा में मजबूत भागीदारी देना है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब इस कानून को लागू करने के लिए जनगणना का इंतजार जरूरी नहीं रहेगा। यानी प्रक्रिया तेज हो सकती है।
क्या बदलने वाला है?
- 2029 से महिलाओं को 33% आरक्षण देने की तैयारी।
- लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव।
- कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
- परिसीमन (Delimitation) के जरिए सीटों की नई संख्या तय होगी।
मध्यप्रदेश पर क्या होगा असर?
मध्यप्रदेश में इस बदलाव का असर सबसे ज्यादा दिख सकता है। अभी प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं, लेकिन प्रस्ताव के मुताबिक ये बढ़कर 43 तक पहुंच सकती हैं। यानी करीब 14 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। विधानसभा में भी बड़ा बदलाव संभव है। 230 सीटों वाली विधानसभा बढ़कर करीब 345 सीटों तक जा सकती है।
अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से केवल 6 पर महिला सांसद हैं। लेकिन नया कानून लागू होने के बाद महिलाओं की संख्या सीधे एक-तिहाई तक पहुंच जाएगी, जिससे राजनीति में उनकी भूमिका काफी मजबूत होगी।
परिसीमन क्यों है अहम?
सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन जरूरी होगा। 2011 की जनगणना के आधार पर नई सीटों का निर्धारण हो सकता है। नई सीटों पर भी 33% महिला आरक्षण लागू होगा। SC/ST सीटों में भी महिला कोटा रहेगा। यह प्रक्रिया चुनावी नक्शा पूरी तरह बदल सकती है। सीटें बढ़ने और महिला आरक्षण लागू होने से पार्टियों को टिकट वितरण में बड़ा बदलाव करना होगा।
नए चेहरे राजनीति में उभरेंगे
सरकार बनाने का गणित पूरी तरह बदल सकता है। इसका कैबिनेट गठन पर भी असर पड़ेगा। महिला आरक्षण का यह संशोधित मॉडल सिर्फ प्रतिनिधित्व बढ़ाने का कदम नहीं है, बल्कि यह देश की राजनीति का ढांचा बदलने वाला फैसला साबित हो सकता है। खासतौर पर मध्यप्रदेश में, जहां सीटों की संख्या और आरक्षण दोनों बढ़ेंगे, वहां आने वाले चुनाव पूरी तरह नए समीकरण पर लड़े जाएंगे।
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