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BHOPAL. मध्य प्रदेश में अब सभी दस्तावेज डिजिटल होंगे। मप्र का पंजीयन और स्टाम्प विभाग प्रदेश की 40 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रियों को डिजिटल फॉर्मेट में बदलेगा। इसके लिए काम शुरू हो गया है। इन रजिस्ट्रियों को आम जनता ई-संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन देख सकेगी। पहले फेज में भोपाल के 4 लाख दस्तावेज डिजिटाइज होंगे। शुरुआती दौर में 24 हजार मैनुअल रजिस्ट्रियों को डिजिटल फॉर्मेट में बदलकर ऑनलाइन किया जाएगा। इसी तरह राज्य में लगभग 40 लाख से ज्यादा दस्तावेजों को मैनुअल से डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाएगा।
दस्तावेजों को डिजिटल करने से लोगों को रजिस्ट्री की कॉपी खोने पर परेशानी नहीं होगी। पंजीयन और मुद्रांक के आईजी एम सेलवेंद्रन के मुताबिक पुरानी रजिस्ट्री डिजिटल फॉर्मेट में होने से लोगों को आसानी से दोबारा मिल सकेगी।
रजिस्ट्री पाने के लिए 300 रूपए देने होंगे
बता दें, मध्यप्रदेश में पुरानी रजिस्ट्री को डिजिटल फॉर्मेट में बदलने का काम शुरू हो गया है। 2001 से 2015 तक की मैनुअल रजिस्ट्री को डिजिटल किया जा रहा है। 2015 के बाद का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है। 2015 से पहले की रजिस्ट्री को डिजिटल फॉर्मेट में बदलने के लिए शासन लगभग 4 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करेगा। मैनुअल से डिजिटल में बदली गई रजिस्ट्री की सत्यापित प्रति लेने के लिए 300 रुपए देने होंगे।
धोखाधड़ी रोकने में मिलेगी मदद
अभी विभाग के संपदा सॉफ्टवेयर पर 2015 के बाद का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है। 2015 से मैनुअल रजिस्ट्री की जगह ई-रजिस्ट्री शुरू हो गई है। मैनुअल रजिस्ट्री बंद करने के बाद संपदा सॉफ्टवेयर की मदद से ई-रजिस्ट्री के लिए सर्विस प्रोवाइडर स्लॉट बुक कर रजिस्ट्री करते हैं। नई व्यवस्था से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी रोकने में भी मदद मिलेगी।
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