करवा चौथ पर 40 साल से पति का इंतजार, भगु सिंह बकरियां चराते हुए पार कर गए थे बॉर्डर
Ashish Bhardwaj | Oct 29, 2026, 15:54 IST
लक्ष्मी कंवर पति की फोटो के साथ
करवा चौथ पर सुहागिनें चांद देखकर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। लेकिन राजस्थान के बाड़मेर जिले के धनाऊ गांव की लक्ष्मी कंवर के लिए यह दिन एक अधूरे इंतजार की याद लेकर आता है। उनके पति भगु सिंह करीब चार दशक पहले बिछड़ कर पाकिस्तान पहुंच गए थे।
लक्ष्मी कंवर के मुताबिक, वे बकरियां चराते समय अनजाने में भारत-पाक सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गए थे। तब से लक्ष्मी कंवर उनकी वापसी की आस लगाए बैठी हैं। हर करवा चौथ पर वह अपने पति के लिए व्रत भी करती है। लेकिन उनके मन में एक ही सवाल उठता है, आखिर उनका चांद घर कब लौटेगा?
लक्ष्मी कंवर के लिए करवा चौथ अब सिर्फ एक त्योहार नहीं रह गया है। यह पति से दोबारा मिलने की उम्मीद का दिन बन चुका है। जब दूसरी महिलाएं अपने पति के साथ चांद देखने की तैयारी करती हैं, तब लक्ष्मी के मन में पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं।
शादी के बाद जिंदगी सामान्य चल रही थी। परिवार था, बच्चे थे और भविष्य को लेकर सपने थे। फिर एक दिन भगु सिंह अचानक लापता हो गए। शुरुआत में परिवार को उम्मीद थी कि वे जल्द लौट आएंगे। लेकिन दिन बीतते गए और इंतजार लंबा होता चला गया। चार दशक गुजरने के बाद भी परिवार को उनकी घर वापसी की खबर नहीं मिली।
यह घटना वर्ष 1983 के आसपास की है। भगु सिंह भारत-पाकिस्तान सीमा (India-Pakistan border) के पास बकरियां चरा रहे थे। इसी दौरान वे अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा (International border) पार कर गए। इसके बाद उनके पाकिस्तान पहुंचने और वहां हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई।
उस समय परिवार ने सोचा था कि कुछ समय बाद भगु सिंह वापस आ जाएंगे। लेकिन उनकी वापसी नहीं हुई। धीरे-धीरे बच्चों का बचपन बीत गया। वे बड़े हो गए और जिंदगी आगे बढ़ती रही। मगर परिवार के लिए भगु सिंह की कमी हमेशा बनी रही।
पति के बिछड़ने के बाद लक्ष्मी कंवर के सामने परिवार संभालने की बड़ी चुनौती थी। बच्चों की परवरिश करनी थी और रोजमर्रा की जिम्मेदारियां भी निभानी थीं। ऐसे मुश्किल समय में उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।
उनके परिवार और बच्चों की परवरिश करती रही। पति की गैरमौजूदगी में उन्होंने परिवार को संभालने की कोशिश की। समय के साथ बच्चे बड़े हो गए, लेकिन भगु सिंह के लौटने की उम्मीद खत्म नहीं हुई।
लक्ष्मी कंवर के लिए यह इंतजार केवल किसी खबर का इंतजार नहीं है। यह उस जीवनसाथी से दोबारा मिलने की चाह है, जिसके साथ उन्होंने जिंदगी बिताने के सपने देखे थे।
करवा चौथ पर लक्ष्मी कंवर की दुआ आज भी वही है। उनके पति सुरक्षित घर लौट आएं और परिवार को उनसे मिलने का मौका मिले। इतने लंबे समय के बाद भी यह उम्मीद उनके मन में बनी हुई है।
समय के साथ बहुत कुछ बदल गया, लेकिन इंतजार वहीं ठहरा रहा। हर साल करवा चौथ आता है और उनके मन में पुरानी यादों के साथ एक नई उम्मीद आज भी जिंदा है। शायद इस बार पति की कोई खबर आ जाए।
परिवार चाहता है कि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां भगु सिंह की मौजूदा स्थिति का पता लगाने के लिए प्रयास करें। अगर वे पाकिस्तान में हैं, तो उनकी पहचान, हिरासत और कानूनी स्थिति से जुड़ी जानकारी सामने लाई जाए। परिवार उनकी सुरक्षित वतन वापसी की उम्मीद भी लगाए बैठा है।
पति की राह देखते बीत गए चार दशक
शादी के बाद जिंदगी सामान्य चल रही थी। परिवार था, बच्चे थे और भविष्य को लेकर सपने थे। फिर एक दिन भगु सिंह अचानक लापता हो गए। शुरुआत में परिवार को उम्मीद थी कि वे जल्द लौट आएंगे। लेकिन दिन बीतते गए और इंतजार लंबा होता चला गया। चार दशक गुजरने के बाद भी परिवार को उनकी घर वापसी की खबर नहीं मिली।
बकरियां चराते समय पार हुई थी सीमा
उस समय परिवार ने सोचा था कि कुछ समय बाद भगु सिंह वापस आ जाएंगे। लेकिन उनकी वापसी नहीं हुई। धीरे-धीरे बच्चों का बचपन बीत गया। वे बड़े हो गए और जिंदगी आगे बढ़ती रही। मगर परिवार के लिए भगु सिंह की कमी हमेशा बनी रही।
बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी भी संभाली
उनके परिवार और बच्चों की परवरिश करती रही। पति की गैरमौजूदगी में उन्होंने परिवार को संभालने की कोशिश की। समय के साथ बच्चे बड़े हो गए, लेकिन भगु सिंह के लौटने की उम्मीद खत्म नहीं हुई।
लक्ष्मी कंवर के लिए यह इंतजार केवल किसी खबर का इंतजार नहीं है। यह उस जीवनसाथी से दोबारा मिलने की चाह है, जिसके साथ उन्होंने जिंदगी बिताने के सपने देखे थे।
हर करवा चौथ पर लौटने की आस
समय के साथ बहुत कुछ बदल गया, लेकिन इंतजार वहीं ठहरा रहा। हर साल करवा चौथ आता है और उनके मन में पुरानी यादों के साथ एक नई उम्मीद आज भी जिंदा है। शायद इस बार पति की कोई खबर आ जाए।
सरकार से पति की स्थिति पता लगाने की मांग
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