भाजपा छोड़ने के 2 महीने बाद पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत को झटका, DLB ने माना दोषी, 6 साल नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर धर्मेंद्र गहलोत को स्वायत्त शासन विभाग से बड़ा झटका लगा है। विभाग ने उन्हें छह साल तक नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई 13 फाइलों से जुड़े मामले में की गई है। विभाग के अनुसार, जांच में पद का दुरुपयोग किया जाना प्रमाणित पाया गया। मामला नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक निर्माण की स्वीकृति जारी करने से जुड़ा है।
निदेशक एवं विशिष्ट सचिव जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर की ओर से जारी आदेश में कार्रवाई का पूरा आधार बताया गया है। इसके अनुसार, धर्मेंद्र गहलोत के खिलाफ नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक निर्माण की मंजूरी जारी करने की शिकायत मिली थी। शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विभाग ने आगे की कार्रवाई शुरू की।
पहले कमेटी ने की जांच
मामले की जांच के लिए अतिरिक्त जिला कलेक्टर, अजमेर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर धर्मेंद्र गहलोत को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। इसके बाद राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 39(3) के तहत मामले की न्यायिक जांच करवाई गई।
यह जांच इसलिए अहम थी, क्योंकि इसके आधार पर आरोपों की पुष्टि और आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होना था। विभागीय आदेश के मुताबिक, विधि विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर के न्यायिक जांच अधिकारी ने जांच के दौरान आरोपों को प्रमाणित पाया।
गहलोत को दिया गया जवाब देने का मौका
विभाग ने कार्रवाई से पहले धर्मेंद्र गहलोत को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 39(1) के तहत उन्हें स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया था। गहलोत ने इस नोटिस का जवाब भी प्रस्तुत किया।
विभाग ने उनके जवाब को जांच कमेटी की रिपोर्ट और न्यायिक जांच अधिकारी की रिपोर्ट के साथ देखा। इन सभी दस्तावेजों पर विचार करने के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मामले में पद का दुरुपयोग किया जाना पूरी तरह प्रमाणित है।
यानी, विभाग की कार्रवाई केवल शिकायत के आधार पर नहीं हुई। आदेश में जांच रिपोर्ट, न्यायिक जांच और गहलोत की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण का भी उल्लेख किया गया है। इन्हीं आधारों पर उनके खिलाफ छह साल तक नगर निकाय चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।
छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे
इस आदेश का सीधा असर धर्मेंद्र गहलोत की चुनावी राजनीति पर पड़ेगा। छह साल की रोक के चलते वह इस अवधि में नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। अजमेर में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियों के बीच यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, उपलब्ध आदेश की जानकारी में 13 फाइलों से जुड़े मामले का उल्लेख है, लेकिन हर फाइल में किस तरह की मंजूरी दी गई और किस निर्माण को फायदा पहुंचा, इसका अलग-अलग विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए मामले की पूरी प्रकृति समझने के लिए संबंधित फाइलों और आदेश के विस्तृत तथ्यों को देखना जरूरी होगा।
धर्मेंद्र गहलोत ने 2 महीने पहले ही छोड़ दी थी पार्टी
पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने 2 महीने पहले ही पार्टी छोड़ दी थी। वे स्वायत्त शासन विभाग (DLB) की ओर से नोटिस दिए जाने से वह नाराज थे। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।
गहलोत ने एक वीडियो जारी किया था जिसमे कहा था कि वासुदेव देवनानी से मेरे राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हैं। इस कारण वे हमेशा से कोशिश करते हैं कि दूसरे को झुका दें, समाप्त कर दें। अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए चुनाव के समय दबाव में लेने के लिए इस प्रकार के पत्र स्वायत्त शासन विभाग से जारी करवाए हैं।
राजनीतिक असर पर भी नजर
धर्मेंद्र गहलोत अजमेर नगर निगम के पूर्व महापौर हैं। ऐसे में छह साल की चुनावी रोक उनके राजनीतिक भविष्य के लिहाज से बड़ा घटनाक्रम है। विभागीय आदेश ने व्यावसायिक निर्माण की मंजूरी से जुड़े मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल, स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी आदेश में जांच और न्यायिक रिपोर्ट के आधार पर पद के दुरुपयोग को प्रमाणित माना गया है। गहलोत की ओर से इस आदेश पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। आगे यह देखना होगा कि वह इस फैसले को लेकर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इसे किसी अन्य मंच पर चुनौती देते हैं।