3200 करोड़ का शराब घोटाला: शिकायत के बाद भी कैसे बचते रहे आशीष श्रीवास्तव? जांच की मंजूरी क्यों नहीं मिली?

VINAY VERMA | Nov 05, 2026, 17:00 IST
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<br>छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में आबकारी अफसर आशीष श्रीवास्तव निलंबित, जांच जारी।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में आबकारी अफसर आशीष श्रीवास्तव निलंबित, जांच जारी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले में आबकारी विभाग के पूर्व अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव पर कार्रवाई के बाद अब विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अधिकारी के खिलाफ गड़बड़ियों की शिकायत पहले ही आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) तक पहुंच चुकी थी।

उसके खिलाफ विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? रिपोर्ट के अनुसार, शासन से जांच और कार्रवाई के लिए जरूरी एनओसी नहीं मिलने से मामला आगे नहीं बढ़ पाया।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में आशीष श्रीवास्तव की भूमिका सामने आने के बाद विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी। ऐसे में सवाल सिर्फ एक अधिकारी की भूमिका का नहीं है, बल्कि उन लोगों का भी है जिन पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई रोकने का आरोप लग रहा है।

अनवर ढेबर के घर ED की दबिश, कोल लेवी और CSMCL घोटाले में EOW-ACB का प्रदेशभर में बड़ा एक्शन | ED raids Anwar Dhebar's house, EOW-ACB takes major action across the state in Coal Levy and CSMCL scam
अनवर ढेबर के घर ED की दबिश, कोल लेवी और CSMCL घोटाले में EOW-ACB का प्रदेशभर में बड़ा एक्शन
30 Oct 2026 ,
By VINAY VERMA
<b>रायपुर। </b>छत्तीसगढ़ में शुक्रवार सुबह अचानक हलचल बढ़ गई। प्रदेश में एक साथ कई जगह जांच एजेंसियों की टीमें पहुंचीं। कोल लेवी और CSMCL घोटाले से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई शुरू हुई है। इस कार्रवाई से कारोबारी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा अनवर ढेबर के घर हुई छापेमारी की है। वह पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई हैं।
<b>रायपुर। </b>छत्तीसगढ़ में शुक्रवार सुबह अचानक हलचल बढ़ गई। प्रदेश में एक साथ कई जगह जांच एजेंसियों की टीमें पहुंचीं। कोल लेवी और CSMCL घोटाले से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई शुरू हुई है। इस कार्रवाई से कारोबारी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा अनवर ढेबर के घर हुई छापेमारी की है। वह पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई हैं।

3200 करोड़ के घोटाले का कथित तरीका

जांच एजेंसियों के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब दुकानों के जरिए बड़े पैमाने पर बिना हिसाब वाली शराब बेची गई। आरोप है कि इसके लिए डिस्टिलरी से अतिरिक्त शराब बनवाई गई और उस पर डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर फर्जी परिवहन परमिट के जरिए सरकारी दुकानों तक पहुंचाई गई।

इस शराब की बिक्री से मिलने वाली रकम सरकारी खजाने में जमा होने के बजाय कथित सिंडिकेट तक पहुंचती रही। आरोप है कि इस पूरे खेल में सरकारी व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया, जिससे बाहर से कारोबार सामान्य दिखता रहा।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ीं, ED का दावा- 52 करोड़ रुपए पहुंचे | Chhattisgarh Liquor Scam: Congress Leader Ramgopal Agarwal's Troubles Increase, ED Claims Rs 52 Crore Reached
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में कांग्रेस नेता की मुश्किलें बढ़ीं, ED का दावा-रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचे 52 करोड़
10 Oct 2026 ,
By Umeshwari Baghel
छत्तीसगढ़ के चर्चित 3,400 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में नया मोड़ आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ एक और आरोप पत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाले से जुड़े करीब 52 करोड़ रुपए उन तक पहुंचाए गए थे।
छत्तीसगढ़ के चर्चित 3,400 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में नया मोड़ आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ एक और आरोप पत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाले से जुड़े करीब 52 करोड़ रुपए उन तक पहुंचाए गए थे।

फाइलों में हेरफेर का आरोप

आशीष श्रीवास्तव पर आरोप है कि विभागीय फाइलों और दस्तावेजों में हेरफेर कर गड़बड़ियों को कागजों पर ठीक दिखाया जाता था। डिस्टिलरी से अतिरिक्त शराब बनवाने से लेकर उसे दुकानों तक पहुंचाने और रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका जांच के दायरे में बताई गई है।

आरोप है कि "ऑफ रिकॉर्ड" निर्देशों से मैनपावर का इस्तेमाल होता था। जांच एजेंसियां यह देख रही हैं कि इस व्यवस्था में वे अकेले काम कर रहे थे या उन्हें विभाग और शासन के दूसरे प्रभावशाली लोगों का संरक्षण था।

शिकायत EOW तक पहुंची, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?

इस मामले का सबसे अहम पहलू यही है। आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ शिकायत पहले ही EOW तक पहुंच चुकी थी, फिर भी विभागीय जांच और कार्रवाई के लिए शासन से एनओसी नहीं मिली। सवाल है कि अनुमति किस स्तर पर रोकी गई और फाइल क्यों आगे नहीं बढ़ी।

EOW ने 17 जनवरी 2024 को शराब घोटाले में FIR दर्ज की थी। इसके बाद ED की ओर से भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया, और इसी दौरान आशीष श्रीवास्तव की भूमिका जांच एजेंसियों के सामने आई।


अगर शिकायत पहले से मौजूद थी, तो विभाग ने अपने स्तर पर तथ्यों की जांच क्यों नहीं कराई? क्या विभाग किसी और एजेंसी के खुलासे का इंतजार कर रहा था? ये सवाल अब आबकारी विभाग के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े हैं।

54 लाख की रिश्वत का आरोप

ED की जांच में आशीष श्रीवास्तव पर कथित तौर पर 54 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप ED की 29,800 पन्नों की फाइनल कंप्लेंट में शामिल बताया गया है। अक्टूबर 2025 में ED ने आशीष श्रीवास्तव समेत करीब 30 आबकारी अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन जारी किए थे।

ED ने 3 मई 2026 को इस मामले में अपराध से अर्जित रकम करीब 2,883 करोड़ रुपए आंकी थी। वहीं EOW की जांच में घोटाले का आंकड़ा करीब 3,200 करोड़ रुपए बताया गया है।


कार्रवाई की समयरेखा

सरकारी निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए। 13 अक्टूबर 2026 को उनके खिलाफ पूरक अभियोग पत्र तैयार हुआ और 14 अक्टूबर को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया।

इसके बाद 17 अक्टूबर को शासन ने उन्हें निलंबित किया। यानी जिस अधिकारी के खिलाफ पहले से शिकायतें थीं, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तब हुई जब जांच एजेंसी मामले को अदालत तक ले गई।

जांच का दायरा बढ़ाने की मांग

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायत के बाद एनओसी किसने रोकी, जांच की अनुमति देने में देरी क्यों हुई, और विभागीय फाइलों में कथित हेरफेर की जानकारी किन अधिकारियों को थी।

सिर्फ आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ कार्रवाई से जवाबदेही पूरी नहीं होती। जांच उन अधिकारियों तक भी पहुंचनी चाहिए, जिन पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई रोकने का आरोप है।

यह खबर क्यों जरूरी है

शराब से सरकारी खजाने को हुए कथित नुकसान का मामला बड़ा है, और इसमें सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग का आरोप है। यह सवाल भी अहम है कि शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई। आम जनता के लिए इसका मतलब है कि सरकारी राजस्व और सिस्टम की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

FAQs

सवाल 1: छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में कितनी रकम का आरोप है?

जवाब: EOW की जांच में घोटाला करीब 3200 करोड़ रुपए का बताया गया है। ED ने अपराध से अर्जित रकम करीब 2,883 करोड़ रुपए आंकी है।

सवाल 2: आशीष श्रीवास्तव पर क्या आरोप हैं?

जवाब: उन पर फाइलों में हेरफेर और कथित रिश्वत के आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप जांच के विषय हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।

सवाल 3: शिकायत के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई?

जवाब: रिपोर्ट के अनुसार शासन से जांच के लिए जरूरी एनओसी नहीं मिली। इस देरी के कारणों की जांच की मांग उठ रही है।
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