राजस्थान को नहीं मिलेंगे 4 अनुभवी IAS अफसर, केंद्र ने लौटाने से किया इनकार; कई विभागों में बढ़ा काम का दबाव
Ashish Bhardwaj | Nov 05, 2026, 15:37 IST
राजस्थान को वापस नहीं मिलेंगे IAS अफसर
राजस्थान सरकार को अपने चार अनुभवी IAS अफसरों की वापसी का इंतजार है, लेकिन केंद्र सरकार ने फिलहाल राज्य की मांग को स्वीकार नहीं किया है। राज्य के कार्मिक विभाग ने इस साल दो बार केंद्र को पत्र लिखकर लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों को वापस भेजने का अनुरोध किया था। दोनों बार निराशा हाथ लगी। राज्य सरकार का तर्क था कि बजट घोषणाओं को समय पर पूरा करने और गुड गवर्नेंस के लिए अनुभवी अफसरों की जरूरत है।
जिन चार अधिकारियों की वापसी की मांग की गई थी, उनमें राजीव सिंह ठाकुर, रजत कुमार मिश्र, रोली सिंह और नरेश पाल गंगवार शामिल हैं। ये सभी राजस्थान कैडर के वरिष्ठ अधिकारी हैं। इनका अनुभव जिला प्रशासन से लेकर वित्त, कार्मिक और ऊर्जा जैसे अहम विभागों में रहा है। राजस्थान सरकार चाहती है कि इनका अनुभव प्रदेश के प्रशासनिक कामकाज में इस्तेमाल हो।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार दिसंबर में अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने जा रही है। इस दौरान सरकार की प्राथमिकता बजट घोषणाओं को जमीन पर उतारने और विकास योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने की है। ऐसे में वरिष्ठ IAS अधिकारियों की भूमिका अहम मानी जा रही है।
राज्य सरकार का मानना है कि लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारियों की वापसी से विभागों की निगरानी और योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद मिल सकती है। फिलहाल कई वरिष्ठ अधिकारियों के पास एक से ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी है। इससे काम का दबाव बढ़ने की बात भी सामने आ रही है।
राजीव सिंह ठाकुर राजस्थान में पांच जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं। जिला प्रशासन का उनका अनुभव सरकार के लिए उपयोगी हो सकता है। वे केंद्र में नीति आयोग से जुड़े रहे हैं। लंबे समय से राजस्थान कैडर से बाहर सेवाएं दे रहे हैं।
रजत कुमार मिश्र वित्त विभाग के अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। वे राजस्थान में वित्त सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अशोक गहलोत सरकार के दूसरे कार्यकाल में बजट तैयार करने की प्रक्रिया में भी उनकी अहम भूमिका रही थी। ऐसे में राज्य सरकार वित्तीय नियोजन और बजट घोषणाओं की निगरानी में उनके अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है।
रोली सिंह कार्मिक विभाग की सचिव रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल में कर्मचारियों से जुड़े सेवा नियमों पर काम हुआ। राजस्थान लोक सेवा आयोग में सचिव रहते हुए भर्ती परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी भी संभाली। उनकी वापसी से कार्मिक और भर्ती व्यवस्था को अनुभव का लाभ मिल सकता है।
नरेश पाल गंगवार राजस्थान के चार जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं। ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव रहते हुए प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़े कामों में उनकी भूमिका रही। सरकार ऊर्जा क्षेत्र और प्रशासनिक व्यवस्था में उनके अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है।
राज्य सरकार ने पांच साल से अधिक समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात राजस्थान कैडर के अधिकारियों की सेवाएं वापस लेने का अनुरोध किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस दायरे में ये चार अधिकारी आए। हालांकि, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए किसी अधिकारी को राज्य सरकार अपने स्तर पर सीधे वापस नहीं बुला सकती। इसके लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी होती है।
ऐसा पहली बार नहीं है जब राजस्थान को केंद्र से अपने अधिकारी वापस मांगने पड़े हों। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात राजस्थान कैडर के अधिकारियों की वापसी का अनुरोध किया था। मौजूदा मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी लंबे समय तक केंद्र में सेवाएं दे चुके हैं। उस समय भी उनकी वापसी की मांग की गई थी, लेकिन वे केंद्र से वापस नहीं आए थे।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान कैडर के 19 IAS अधिकारी फिलहाल राज्य से बाहर अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इनमें सुधांश पंत, रजत कुमार मिश्र, नरेश पाल गंगवार, रोली सिंह, मुग्धा सिन्हा, देबाशीष पृष्टि, कृष्णकांत पाठक, आशुतोष एटी पेडणेकर, प्रीतम बी. यशवंत, भानु प्रकाश एटूरू, बिष्णु चरण मल्लिक, मुक्तानंद अग्रवाल, प्रकाश राजपुरोहित, इंद्रजीत सिंह, नेहा गिरी, अभिमन्यु कुमार, भगवती प्रसाद कलाल, आशीष गुप्ता और अंशदीप के नाम शामिल हैं।
वहीं, प्रदेश में मुख्य सचिव सहित 39 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों या संस्थाओं की जिम्मेदारी होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों की कमी और काम के बढ़ते दबाव के बीच सरकार की नजर अब केंद्र के अगले फैसले पर है। फिलहाल चारों अधिकारियों की वापसी नहीं होने से राज्य को मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में ही काम आगे बढ़ाना होगा।
दिसंबर में सरकार के तीन साल पूरे होंगे
राज्य सरकार का मानना है कि लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारियों की वापसी से विभागों की निगरानी और योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद मिल सकती है। फिलहाल कई वरिष्ठ अधिकारियों के पास एक से ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी है। इससे काम का दबाव बढ़ने की बात भी सामने आ रही है।
किस अफसर का अनुभव किस विभाग में काम आ सकता है?
रजत कुमार मिश्र वित्त विभाग के अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। वे राजस्थान में वित्त सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अशोक गहलोत सरकार के दूसरे कार्यकाल में बजट तैयार करने की प्रक्रिया में भी उनकी अहम भूमिका रही थी। ऐसे में राज्य सरकार वित्तीय नियोजन और बजट घोषणाओं की निगरानी में उनके अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है।
रोली सिंह कार्मिक विभाग की सचिव रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल में कर्मचारियों से जुड़े सेवा नियमों पर काम हुआ। राजस्थान लोक सेवा आयोग में सचिव रहते हुए भर्ती परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी भी संभाली। उनकी वापसी से कार्मिक और भर्ती व्यवस्था को अनुभव का लाभ मिल सकता है।
नरेश पाल गंगवार राजस्थान के चार जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं। ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव रहते हुए प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़े कामों में उनकी भूमिका रही। सरकार ऊर्जा क्षेत्र और प्रशासनिक व्यवस्था में उनके अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है।
सिर्फ चार अफसर ही क्यों आए दायरे में?
ऐसा पहली बार नहीं है जब राजस्थान को केंद्र से अपने अधिकारी वापस मांगने पड़े हों। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात राजस्थान कैडर के अधिकारियों की वापसी का अनुरोध किया था। मौजूदा मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी लंबे समय तक केंद्र में सेवाएं दे चुके हैं। उस समय भी उनकी वापसी की मांग की गई थी, लेकिन वे केंद्र से वापस नहीं आए थे।
राज्य से बाहर 19 IAS, 39 अफसरों पर कई जिम्मेदारियां
वहीं, प्रदेश में मुख्य सचिव सहित 39 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों या संस्थाओं की जिम्मेदारी होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों की कमी और काम के बढ़ते दबाव के बीच सरकार की नजर अब केंद्र के अगले फैसले पर है। फिलहाल चारों अधिकारियों की वापसी नहीं होने से राज्य को मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में ही काम आगे बढ़ाना होगा।
चूरू के रामोतार को UAE राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, फ्लाईदुबई की उड़ान में इनकी सूझबूझ से टला था बड़ा हादसा
By Jageshwar Prasad
मंत्रालय बस सेवा पर नया बवाल: 6 महीने एक्सटेंशन मिला पर नए कर्मियों का फ्री पास बंद, 2021 से अटके हैं पास
By VINAY VERMA
IPS अनुराग सुजानिया अब दोस्त की IT कंपनी में बनेंगे पार्टनर! एक साल पहले बना लिया था प्लान, इस्तीफे की वजह आई सामने
By Aman Vaishnav
जयपुर पदयात्रा में श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट पर बोले अश्विनी वैष्णव, कहा- सभी पहलुओं की हो रही है जांच
By Jageshwar Prasad
CBI के पांच पूर्व अफसरों पर झूठी गवाही का मामला रुका, दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने ही आदेश पर लगाई रोक
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में दागी आबकारी अफसर, रायचुरा, दुबे और खरे ही नहीं... महिला अधिकारी रीनी और मंदाकिनी पर भी लगे दाग
By Sanjay Gupta
कोटा में लड्डुओं के लिए छात्रों का आंदोलन, सोशल मीडिया पर बनाई ‘लड्डू जनता पार्टी’
By Ashish Bhardwaj