मरुधरा की बेटी अरुंधति का कॉमनवेल्थ में बजा डंका, देश के लिए जीता सोना
समझें क्या है पूरा मामला
- अरुंधति चौधरी ने राष्ट्रमंडल खेलों में लहराया तिरंगा।
- राजस्थान की बेटी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गोल्ड।
- फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को हराया।
- सेना में हैं हवलदार, अब गोल्ड जीतकर नाम किया रोशन।
- हाथों में प्लेट, एड़ी में फ्रैक्चर, फिर भी नहीं रुकी अरुंधति।
कोटा की मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित महिला 70 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा के फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की चैंटेल रीड को एकतरफा अंदाज में हराया।
बास्केटबॉल से बॉक्सिंग तक का उनका सफर संघर्ष, चोटों और अटूट जुनून की मिसाल है। भारतीय सेना में हवलदार अरुंधति ने अपने पिता को ओलंपिक गोल्ड जीतने का वादा किया था, जिसे वे पूरा करने की ओर बढ़ रही हैं।
बास्केटबॉल से बॉक्सिंग तक का सफर
अरुंधति बचपन से पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल थी। एक निजी स्कूल में वह बास्केटबॉल टीम की कप्तान थी। लेकिन उन्हें एक व्यक्तिगत खेल खेलने की इच्छा थी।
पिता ने उन्हें कुश्ती, वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग के बारे में बताया। बॉक्सिंग शब्द सुनते ही उनकी आंखों में चमक आ गई और उसी दिन उन्होंने बॉक्सर बनने का फैसला कर लिया।
जब पूरे शहर में नहीं मिला कोच
उस समय कोटा में बॉक्सिंग का माहौल नहीं था। पिता सुरेश चौधरी कोटा, जयपुर और भोपाल तक कोच तलाशते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली।
आखिरकार उन्होंने ताइक्वांडो कोच अशोक गौतम से संपर्क किया। जिन्होंने YouTube पर बॉक्सिंग की तकनीकें देखकर अरुंधति को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया।
चोटों के बावजूद नहीं रुकी
अरुंधति की कहानी केवल जीत की नहीं, संघर्ष की भी है। बॉक्सिंग के दौरान दोनों कलाइयों में गंभीर चोट लगी और ऑपरेशन कर दोनों हाथों में प्लेट डालनी पड़ी। एड़ी में फ्रैक्चर हुआ।
सबसे कठिन दौर तब आया जब पेरिस ओलंपिक क्वालीफाई के दौरान उनकी मां ICU में भर्ती थीं। मानसिक तनाव के बावजूद अरुंधति रिंग में उतरी और जीती।
4 लीटर दूध और दाल-बाटी-चूरमा का शौक
शुरुआत में अरुंधति की डाइट बेहद हैवी थी। वह रोजाना करीब चार लीटर भैंस का दूध, 150 ग्राम बादाम और आधा किलो पनीर लेती थीं।
बाद में फैटी लीवर की समस्या सामने आने पर डाइट बदल दी गई। अब वह संतुलित पौष्टिक आहार लेती हैं। खाने में उन्हें दाल-बाटी-चूरमा बेहद पसंद है।
युवाओं के लिए संदेश
अरुंधति ने युवाओं के लिए भावुक संदेश दिया, जैसे मैंने अपने सपने को नहीं मारा, आप भी मत मारो। परिवार को मनाना थोड़ा मुश्किल होगा, लेकिन जिंदगी आपकी है। अगर सपना बड़ा है तो उसके लिए पूरी ताकत से मेहनत करो।
वह भारतीय सेना में हवलदार हैं और दो कारणों से देश को गौरवान्वित करना चाहती हैं- सेना की वर्दी पहनकर सेवा करना और बॉक्सिंग रिंग में तिरंगा लहराना।
FAQ
- अरुंधति चौधरी किस खेल से जुड़ी हैं और उन्होंने कौन-सा पदक जीता है?
अरुंधति चौधरी मुक्केबाज (Boxer) हैं और उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल (स्वर्ण पदक) जीता है। - अरुंधति चौधरी राजस्थान के किस शहर की रहने वाली हैं?
वह राजस्थान के कोटा शहर की रहने वाली हैं। - अरुंधति चौधरी की इससे पहले क्या प्रमुख उपलब्धियां रही हैं?
वह यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन रह चुकी हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए कई पदक जीत चुकी हैं।
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