वंदे मातरम विवाद: शाह के बयान पर गहलोत का पलटवार, बोले-RSS ने कभी नहीं अपनाया यह गीत
समझें क्या है पूरा मामला
- गहलोत ने वंदे मातरम को लेकर अमित शाह के बयान पर पलटवार किया है।
- शाह ने वंदे मातरम के अपमान पर कांग्रेस नेताओं से माफी मांगने को कहा था।
- शाह ने कहा था कि वोट बैंक के लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया।
- अशोक गहलोत ने शाह के बयान को आरएसएस का अपराध बोध बताया।
- भाजपा ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम रोकने की कोशिश की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम के कथित अपमान को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेताओं से माफी मांगने को कहा था। राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने इस पर पलटवार किया है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने लिखा कि चित्तौड़गढ़ में अमित शाह ने राष्ट्रगीत वंदे मातरमपर ज्ञान बांटा। उनके मुताबिक, यह सुनकर इतिहास के जानकारों को हंसी आई। गहलोत ने सवाल उठाया कि भाजपा-आरएसएस का वंदे मातरम से आखिर क्या संबंध है?
गहलोत के मुताबिक यह वही आरएसएस और उसकी विचारधारा है, जिसका वंदे मातरम से कभी कोई नाता नहीं रहा। उन्होंने दावा किया कि आज इतिहास पर प्रवचन देना दरअसल अपराध बोध है। उनका यह भी आरोप है कि इसी वजह से संसद में वंदे मातरम को लेकर कानून बनाया जा रहा।
1896 से जुड़ा वंदे मातरम का इतिहास
गहलोत के मुताबिक, 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम गूंजा था। उनका दावा है कि 1905 से यह हर कांग्रेस अधिवेशन की परंपरा बन गया। गहलोत के मुताबिक कांग्रेस नेता वंदे मातरम का उद्घोष करते हुए अंग्रेजों से टक्कर लेते थे।
गहलोत के अनुसार अंग्रेजों ने इस पर प्रतिबंध लगाया, जुर्माने लगाए और जेल भेजा, लाठियां भी बरसाईं। फिर भी कांग्रेसी जोश से वंदे मातरम गाते रहे। उनके मुताबिक 1937 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर इसका समावेशी स्वरूप अपनाया गया, ताकि यह हर भारतीय का साझा गीत बन सके।
आरएसएस पर अशोक गहलोत के आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का दावा है कि आरएसएस का कभी वंदे मातरम से कोई लेना-देना नहीं रहा। उनके अनुसार 1925 में आरएसएस के गठन से लेकर 1947 की आजादी तक संगठन ने कभी इस गीत को अपना नहीं बनाया।
गहलोत ने आरोप लगाया कि इस गीत के लिए हजारों देशभक्त फांसी चढ़े, जेल गए और लाठियां खाईं, लेकिन अंग्रेजों के डर से आरएसएस इसे गाने की हिम्मत कभी नहीं जुटा पाया।
भारत छोड़ो आंदोलन को लेकर भी निशाना
गहलोत का आरोप है कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जब देश का हर वर्ग अंग्रेजों के खिलाफ सड़कों पर उतरा था, तब आरएसएस इस आंदोलन से दूर रहा। उनके मुताबिक संगठन उस दौर में अंग्रेजों की खुशामद में लगा रहा।
गहलोत ने लिखा कि अब सत्ता में आकर भाजपा-आरएसएस अपने इतिहास के पन्ने बदलना चाहते हैं, ताकि अपने दागों को धो सकें। उन्होंने कहा कि भाषणों से इतिहास नहीं बदलता। गहलोत के अनुसार देश की जनता सब जानती है और यह दाग ऐसे धुलने वाले नहीं हैं।
FAQ
- अशोक गहलोत ने अमित शाह पर क्या आरोप लगाए?
गहलोत ने वंदे मातरम विवाद को लेकर कहा कि भाजपा-आरएसएस का इससे कभी नाता नहीं रहा। उनके मुताबिक, शाह का बयान अपराध बोध दिखाता है। - अमित शाह ने चित्तौड़गढ़ में वंदे मातरम के अपमान को लेकर क्या कहा था?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को निंबाहेड़ा में एक कार्यक्रम में कहा था कि वोट बैंक के लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया था। - गहलोत ने आरएसएस पर आजादी के आंदोलन को लेकर क्या दावा किया?
गहलोत का आरोप है कि आरएसएस 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से दूर रहा था। उनके मुताबिक, संगठन उस समय अंग्रेजों की खुशामद में लगा रहा।
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