अशोक गहलोत का भाजपा पर हमला, बोले- सत्ता परिवर्तन की मांग अपराध नहीं, लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का अधिकार
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विपक्ष के आंदोलन को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की मांग करना कोई अपराध या साजिश नहीं है। लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना, उसकी कमियां सामने लाना और जनता के बीच जाकर बदलाव की मांग करना है। भाजपा विपक्ष के शांतिपूर्ण आंदोलनों को अराजकता से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
गहलोत ने राहुल गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में निकाले गए मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कहीं हिंसा नहीं हुई। इसके बावजूद भाजपा के नेता विपक्ष पर बांग्लादेश जैसी अराजकता फैलाकर सत्ता बदलने के आरोप लगा रहे हैं।
राहुल गांधी के मार्च में कहां हुई हिंसा, भाजपा बताए
अशोक गहलोत ने कहा कि भाजपा के नेता दावा कर रहे हैं कि विपक्ष सड़क पर आंदोलन करके सत्ता बदलना चाहता है। लेकिन उन्हें बताना चाहिए कि राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए आंदोलन में हिंसा कहां नजर आई?
उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद 12 अक्टूबर को दिल्ली में इतना शांतिपूर्ण और अनुशासित मार्च देखने को मिला। इसमें इंडिया गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ता, आम नागरिक और जेन-जी के युवा भी शामिल हुए।
गहलोत ने सवाल किया कि जब विपक्ष शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहा है तो उसे अराजकता फैलाने की कोशिश क्यों बताया जा रहा है?
गहलोत ने भाजपा को याद दिलाए 2014 से पहले के आंदोलन
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा को वर्ष 2014 से पहले हुए आंदोलनों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस समय लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना हजारे ने आंदोलन किया था। बाबा रामदेव ने कालेधन के मुद्दे पर प्रदर्शन किए थे। इसके अलावा 2जी और कोलगेट जैसे मामलों को लेकर भी सड़कों पर आंदोलन हुए थे।
इन आंदोलनों में दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और पार्टी ने जनता के फैसले का सम्मान किया। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने उस समय लोकतांत्रिक धरने और प्रदर्शनों को देश विरोधी साजिश नहीं बताया था। लेकिन अब भाजपा विपक्ष के आंदोलनों को उसी नजरिए से पेश कर रही है।
जितना दबाने की कोशिश करेंगे, उतनी बुलंद होगी आवाज
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का विरोध करना विपक्ष का अधिकार है। जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना और सरकार की नीतियों की आलोचना करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि वे भी लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते थे।
गहलोत ने राहुल गांधी के नारे 'नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान' का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति में अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अराजकता नहीं, बल्कि जनता का अधिकार है। भाजपा जितना विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करेगी, यह आवाज उतनी ही बुलंद होगी।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर विपक्ष से बात क्यों नहीं कर रही सरकार?
अशोक गहलोत ने परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि देश में बड़े फैसले लेने से पहले विपक्ष को विश्वास में लेने की परंपरा रही है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष से बातचीत नहीं की जा रही है।
गहलोत ने सवाल किया कि परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बड़े विषयों पर सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों बच रही है? उनका कहना है कि इन फैसलों का असर देश की राजनीतिक व्यवस्था और प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा। इसलिए सरकार को सभी दलों से चर्चा करके आगे बढ़ना चाहिए।
राहुल गांधी और खरगे की मांग के बाद भी नहीं बुलाई बैठक
गहलोत ने कहा कि संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक लाए जाने के दौरान भी कांग्रेस ने व्यापक चर्चा की मांग की थी। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों के बाद इस मुद्दे पर आगे बढ़ने और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।
लेकिन सरकार ने सभी दलों को एक साथ बैठाने के बजाय अलग-अलग राजनीतिक दलों से बातचीत की। गहलोत ने इसे सरकार की हठधर्मिता बताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी पक्षों की सहमति जरूरी है।
क्या भाजपा का कोई छिपा हुआ एजेंडा है?
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब देश चाहता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर बड़े फैसले करें, तो केंद्र सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों बच रही है? उन्होंने कहा कि भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर उसकी आगे की योजना क्या है।
गहलोत ने पूछा कि क्या इसके पीछे भाजपा का कोई छिपा हुआ एजेंडा है? उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाए और इन मुद्दों पर सहमति बनाकर ही आगे बढ़े।