सरकार पर बरसे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, बोले-मंदिर हमारी दुकानें या शोरूम नहीं, सरकारी नियंत्रण से बाहर हों

thesootr Desk | Apr 14, 2026, 17:31 IST
Photograph: (the sootr)
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजस्थान के पुष्कर में मंदिरों पर सरकार के नियंत्रण की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मंदिरों का संचालन पारंपरिक रीति-रिवाजों के जानकारों के हाथों में होना जरूरी है। साथ ही गौ रक्षा की वकालत की।

News In Short

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकारों पर मंदिरों के व्यावसायिक उपयोग का आरोप लगाया।
  • मंदिरों का संचालन पारंपरिक रीति-रिवाजों के जानकारों के हाथों में होना जरूरी।
  • शंकराचार्य ने गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की अपील की।
  • शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर की ज्योति को नकली बताया।
  • पुष्कर में शंकराचार्य ने शत गायत्री महायज्ञ में उपस्थिति दर्ज कराने आए हैं।

News In Detail

Ajmer: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पुष्कर में शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मंदिरों के सरकारी नियंत्रण और उनके व्यावसायिक उपयोग को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकारों ने मंदिरों को कमाई का जरिया बना दिया है। उन्होंने कहा कि मंदिर हमारी दुकानें या शोरूम नहीं हैं।



सरकारों का नजरिया राजस्व तक सीमित

मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कड़े लहजे में कहा कि आज सरकारों का मंदिरों के प्रति रवैया केवल राजस्व जुटाने भर का रह गया है। उन्होंने कहा, मंदिरों का निर्माण आमदनी के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना के लिए किया गया था। मंदिरों की मूल प्रकृति से छेड़छाड़ की जा रही है।



उन्होंने अन्य धर्मों का उदाहरण देते हुए कहा, जैसे अन्य मजहब और धर्म के लोगों के उपासना स्थानों को उनके जिम्मे रखा गया है, उसी तरह हिंदुओं के उपासना स्थल भी हिंदुओं के पास होने चाहिए। उन्होंने मांग की कि मंदिरों का संचालन सरकार के बजाय पारंपरिक और धार्मिक रीति-रिवाजों को जानने वाले लोगों के हाथों में होना चाहिए, ताकि वे परंपरागत तरीके से मंदिर का प्रबंधन कर सकें।



शत गायत्री महायज्ञ पुण्य का महासागर

पुष्कर में 8 मार्च से चल रहे 'शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ' की सराहना करते हुए शंकराचार्य ने इसे 'पुण्य का महासागर' बताया। उन्होंने कहा, यज्ञ स्थल के दर्शन कर प्रदक्षिणा की है। महायज्ञ से सभी के मन प्रफुल्लित हैं। यह पुण्य का महासागर है, जितने गोते लगाओ उतना फल मिलेगा।



उन्होंने कहा कि यह महायज्ञ बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। विधि-विधान और पूरे अनुशासन के साथ यह महायज्ञ किया जा रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि इस तरह के आयोजन हिंदू राष्ट्र की नींव को मजबूत करते हैं। इससे देवता प्रसन्न होते हैं। उनकी प्रसन्नता से दैविक संपत्ति की स्थापना होती है। हिंदू राष्ट्र के लिए इस तरह के आयोजन होने चाहिए, ये हिंदू राष्ट्र को बनाने में महती भूमिका निभाएंगे।



गाय में वास करते हैं 33 करोड़ देवी-देवता

शंकराचार्य ने गौ रक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं। उन्होंने कहा, गौ माता के बिना यज्ञ नहीं हो सकता। इसलिए गौ माता की रक्षा हमारा प्रथम कर्तव्य है।



उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाने के लिए जन-जन को आवाज उठानी चाहिए। ताकि हम गर्व से कह सकें कि हम उस देश के वासी हैं जहां गौ हत्या नहीं होती। लेकिन आज हम यह बात नहीं कह सकते, हमारा मन ग्लानि से भरा हुआ है।



राम मंदिर की ज्योति पर बड़ा बयान

अयोध्या में राम मंदिर के सवाल पर शंकराचार्य ने विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा कि वे पहले काफी कुछ कह चुके हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, अयोध्या में राम मंदिर में ज्योति नकली है, उसकी हम क्या बात करें।



गौरतलब है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पिछले कई मौकों पर सरकार और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रियाओं के लिए चर्चा में रहते हैं। पुष्कर में जारी यह महायज्ञ 8 मार्च से शुरू हुआ है और इसमें देशभर से हजारों भक्त और संत जुट रहे हैं।



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