500 जानवरों की जान बचाने वाली उस जांबाज की कहानी, जिसने ठुकरा दी लाखों की रिश्वत
Ashish Bhardwaj | Apr 14, 2026, 14:00 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में लेडी फॉरेस्ट गार्ड अनीता चौधरी शेरगढ़ अभयारण्य की शान बन गई हैं। वे न सिर्फ तस्करों की काल मानी जाती हैं, बल्कि बेजुबान जानवरों की ढाल भी हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) ने उन्हें मछली नेशनल अवार्ड से नवाजा है।
News In Short
- लेडी फॉरेस्ट गार्ड अनीता चौधरी बनीं शेरगढ़ अभयारण्य की शान।
- अनीता ने अब तक तस्करों के खिलाफ 50 से ज्यादा एफआईआर दर्ज कराई।
- जंगल के 500 बेजुबान जानवरों को मौत के मुंह से निकाला है।
- अनीता बाइक से रात 2 बजे भी जंगल में करती हैं गश्त।
- डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) ने उन्हें मछली नेशनल अवार्ड से नवाजा।
News In Detail
गांव से 9,880 हेक्टेयर का साम्राज्य
उनकी पहली पोस्टिंग कोटा के मुकाम बदोरा रेंज ऑफिस में हुई। लेकिन उनकी असली परीक्षा तब शुरू हुई जब उन्हें 2021 में बारां के शेरगढ़ अभयारण्य में तैनात किया गया। शेरगढ़ अभयारण्य 9,880 हेक्टेयर (लगभग 99 वर्ग किलोमीटर) में फैला हुआ है। इस विशाल जंगल का एक-तिहाई हिस्सा यानी लगभग 2,949 हेक्टेयर सीधे तौर पर अनीता की निगरानी में है।
मछली की तरह अडिग संकल्प
जब अनीता ने कार्यभार संभाला, तब शेरगढ़ की स्थिति दयनीय थी। जंगल में चरवाहों का कब्जा था। लोग अवैध रूप से लकड़ी काटने और जंगली सूअरों का शिकार करने के लिए स्वतंत्र थे। अनीता कहती हैं, शुरुआत में लोग मुझे गंभीरता से नहीं लेते थे। वे सोचते थे कि एक महिला उनका क्या बिगाड़ लेगी।
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पहली एफआईआर के बाद बदला जंगल
बाइक से रात 2 बजे भी गश्त
जंगल में गश्त का कोई निश्चित समय नहीं होता। अनीता अक्सर रात के 2 बजे अपनी बाइक उठाकर निकल पड़ती हैं। पथरीले रास्ते, ऊबड़-खाबड़ जमीन और बारिश के मौसम में कीचड़ से भरी पगडंडियां-अनीता के इरादों को नहीं रोक पातीं। वे चेक डैम बनवाती हैं, बोरिंग करवाती हैं और वन्यजीवों के लिए छोटे तालाबों का निर्माण करवाती हैं ताकि गर्मी में जानवर जंगल से बाहर न जाएं।
धमकियां, रिश्वत और अटूट ईमानदारी
डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) अनुराग भटनागर कहते हैं, अनीता ने बिना किसी डर के काम किया है। उनकी वजह से उन इलाकों में भी अब वन्यजीव दिखाई देने लगे हैं, जहाँ से वे गायब हो चुके थे। अब शेरगढ़ में भालू के पदचिह्न और मधुमक्खियों के छत्ते फिर से दिखाई देने लगे हैं, जो एक स्वस्थ जंगल की निशानी है।
पिता ने किया मोटिवेट
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जंगल ही मेरा श्रृंगार
आज शेरगढ़ अभयारण्य केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि अनीता चौधरी के साहस की कहानी है। वह उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। जब तक अनीता अपनी बाइक पर गश्त कर रही हैं, शेरगढ़ के परिंदे और जानवर सुरक्षित महसूस करते हैं।
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