चंबल रिवरफ्रंट में ताजमहल-लाल किले की झलक, लेकिन घाटे का बन रहा सौदा, जानिए कौन है इसका जिम्मेदार
Jinesh Jain | Apr 14, 2026, 13:03 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के कोटा में 1442 करोड़ रुपये में बना चंबल रिवरफ्रंट अब सरकारी खजाने पर बोझ बन रहा है। यह प्रोजेक्ट 50 प्रतिशत घाटे में चल रहा है। इस प्रोजेक्ट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
News In Short
- 1442 करोड़ में बना कोटा का चंबल रिवर फ्रंट चल रहा है 50% घाटे में।
- रिवरफ्रंट पर हर साल 2.10 करोड़ रुपये खर्च, जबकि कमाई केवल 1 करोड़।
- महंगा प्रवेश शुल्क और छायादार स्थानों की कमी भी बन रही है वजह।
- विधायक संदीप शर्मा ने इसे भविष्य में घोस्ट टाउन बनने की चेतावनी दी।
- शांति धारीवाल ने भाजपा सरकार को प्रोजेक्ट के 'मैनेजमेंट' में विफल बताया।
News In Detail
कमाई 1 करोड़, खर्च 2 करोड़ से ज्यादा
इनसे केडीए को लगभग 1 करोड़ रुपये की आय होती है। इसके उलट प्रोजेक्ट के रखरखाव और संचालन पर सालाना 2.10 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। केडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इन खर्चों के अलावा रिवरफ्रंट पर होने वाली भव्य चंबल आरती के आयोजन पर भी प्रशासन को हर महीने 12 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
Kota-riverfront-project
क्या साबरमती से बेहतर होना गुनाह?
गहलोत के अनुसार चंबल रिवरफ्रंट हाडौती में पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है, लेकिन भाजपा सरकार का इस तरफ ध्यान ही नहीं है। उन्होंनेे सवाल किया कि क्या भाजपा राजनीतिक प्रतिशोध में राजस्थान की छवि की भी परवाह नहीं करती है।
इंतज़ारशास्त्र: चैप्टर 18
क्या साबरमती से बेहतर होना ही चंबल रिवर फ्रंट का गुनाह है?
₹1442 करोड़ की लागत, 26 भव्य घाट और दुनिया की सबसे बड़ी घंटी... फिर भी राजनीतिक द्वेष के कारण यह विश्वस्तरीय प्रोजेक्ट उपेक्षा का शिकार है।
चंबल रिवर फ्रंट हाडौती में पर्यटन का एक बड़ा… pic.twitter.com/vBe8UpiEpB
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) April 9, 2026
200 रुपये की टिकट और छाया का अभाव
उनका कहना है कि घाटों पर हरियाली और छायादार स्थानों की कमी है। क्या पूर्ववर्ती गहलोत सरकार को लगा था कि लोग सिर्फ रात में ही आएंगे? दिन की चिलचिलाती धूप में यहाँ ठहरना लगभग नामुमकिन है। कोटा मुख्य रूप से छात्रों का शहर है, पर्यटकों का नहीं। ऐसे में इतने बड़े प्रोजेक्ट को सफल बनाना बड़ी चुनौती है।
धारीवाल का भाजपा पर निशाना
धारीवाल के अनुसार सरकार ने निजी ऑपरेटर के लिए 6 करोड़ का बहुत महंगा टेंडर निकाला, जिसे किसी कंपनी ने नहीं लिया। इसे कम कीमत पर शुरू किया जाना चाहिए था ताकि कोई इसके प्रबंधन में बोली लगाए।
शादियां और गोल्फ कार्ट
Chambal-River-Front
तो क्या यह प्रोजेक्ट बनेगा भूतिया शहर?
ये भी पढ़ें:-
जाम से किरकिरी के बाद जयपुर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव, ट्रैफिक पुलिस में कई फेरबदल
पंचायत-निकाय चुनाव: राजस्थान सरकार पहुंची हाईकोर्ट, दिसंबर तक चुनाव टालने की दलील
एफएसएल निदेशक डॉ. अजय शर्मा को हटाया, भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद सरकार का बड़ा एक्शन
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava