मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में लापरवाही, बीमा क्लेम हो रहे है रिजेक्ट

राजस्थान में आयुष्मान आरोग्य योजना में सरकारी हॉस्पिटलों की लापरवाही से 48 फीसदी क्लेम रिजेक्ट हो रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 28 हॉस्पिटल्स के प्रमुखों को कारण बताओ नोटिस जारी किये हैं।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

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News In Short 

  • राजस्थान में आयुष्मान आरोग्य योजना में क्लेम रिजेक्शन का बड़ा मामला सामने आया है।
  • सरकारी हॉस्पिटलों के कर्मचारियों की लापरवाही से 48% क्लेम रिजेक्ट हो रहे हैं।
  • सिरोही और बीकानेर जिले के हॉस्पिटल्स में रिजेक्शन की दर सबसे ज्यादा है।
  • चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 28 हॉस्पिटल्स के प्रमुखों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

News In Detail 

राजस्थान की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। सरकारी हॉस्पिटलों के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण बीमा कंपनी द्वारा क्लेम रिजेक्ट किए जा रहे हैं। इससे योजना के लाभार्थियों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी किया है।

डिपार्टमेंट की कार्रवाई

मेडिकल एज्युकेशन डिपार्टमेंट के कमिश्नर नरेश कुमार गोयल ने प्रदेश के 28 सरकारी हॉस्पिटलों के प्रमुखों (अधीक्षक, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी) को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब मांगा है। यह कदम क्लेम रिजेक्शन की बढ़ती संख्या को देखते हुए उठाया गया है।

क्लेम रिजेक्शन के कारण

राजकीय अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों का इलाज "मां योजना"  के तहत बीमा किया जाता है। इस बीमा के तहत, इलाज की राशि बीमा कंपनी द्वारा प्रदान की जाती है। इसके लिए मरीजों की पूरी जानकारी और दस्तावेज़ अस्पताल द्वारा बीमा कंपनी को भेजे जाते हैं। इसमें बीमारी से संबंधित विवरण भी शामिल होता है।

सभी आवश्यक दस्तावेज़ और जानकारी पोर्टल पर अपलोड किए जाने के बाद, बीमा कंपनी इलाज के खर्च को सरकारी अस्पताल के राजकीय खाते में ट्रांसफर करती है। लेकिन, अस्पतालों में प्रशासनिक लापरवाही के कारण कई बार ये क्लेम रिजेक्ट हो जाते हैं। यह तब होता है जब दस्तावेज़ और जानकारी सही या पूर्ण नहीं भेजी जाती, इसके कारण बीमा कंपनी क्लेम को स्वीकार नहीं कर पाती है।

48 फीसदी तक क्लेम रिजेक्ट

राज्य के कई सरकारी हॉस्पिटल्स में 48 फीसदी तक क्लेम रिजेक्ट हो रहे हैं। सिरोही के सरकारी मेडिकल कॉलेज से अटैच हॉस्पिटल में 48.38 फीसदी क्लेम रिजेक्ट हुए हैं। यह करीब 1.72 करोड़ रुपये का नुकसान दर्शाता है। यह आंकड़ा 2025 से 2026 के बीच का है।

बीकानेर और जयपुर में स्थिति खराब

बीकानेर जिले के सरकारी हॉस्पिटलों में स्थिति सबसे खराब है, जहां क्लेम रिजेक्शन की दर 25 से 42 फीसदी तक है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर इस जिले के प्रभारी मंत्री हैं। जयपुर के कुछ हॉस्पिटलों में भी क्लेम रिजेक्शन के मामले अधिक हैं, जैसे सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय, जनाना हॉस्पिटल चांदपोल, और सेटेलाइट बनीपार्क।

समाधान की आवश्यकता

इस गड़बड़ी को सुधारने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि योजना का सही लाभ आम जनता तक पहुंच सके।

क्या है मां योजना 

मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मां योजना) राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है। इसका उद्देश्य राज्य के गरीब और असहाय लोगों को मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। यह योजना राज्य के ऐसे नागरिकों को लाभ पहुंचाती है। इनके पास उचित स्वास्थ्य बीमा या इलाज की कोई व्यवस्था नहीं होती।

इस योजना के तहत, राज्य सरकार गरीब परिवारों को निःशुल्क इलाज देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह योजना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के समान है, लेकिन इसमें राज्य सरकार द्वारा कुछ अतिरिक्त लाभ और सेवाएं दी जाती हैं।

मां योजना के मुख्य बिंदु

बीमा कवर: योजना के तहत राज्य सरकार 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज कवर करती है। इस कवर के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी, दवाइयों और चिकित्सा जांच का खर्च शामिल होता है।

लाभार्थी: इस योजना का लाभ मुख्य रूप से राज्य के गरीब परिवारों को मिलता है। जिनकी वार्षिक आय एक निश्चित सीमा से कम होती है। इसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

स्वास्थ्य सुविधाएं: योजना में 1,400 से अधिक प्रकार की चिकित्सा सेवाएं शामिल हैं। इनमें गंभीर बीमारियों के इलाज से लेकर सामान्य रोगों तक की देखभाल की जाती है।

आवेदन प्रक्रिया: इस योजना के तहत लाभ लेने के लिए पात्र व्यक्तियों को अस्पतालों में रजिस्टर कराना होता है। लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड जारी किया जाता है, जिसके माध्यम से वे स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

सहयोगी अस्पताल: योजना के तहत राज्य भर में कई सरकारी और निजी अस्पतालों को जोड़ा गया है। इस योजना के तहत इलाज प्रदान करते हैं।

मां योजना के लाभ:

आर्थिक सहायता: गरीब और जरूरतमंद व्यक्तियों को अस्पताल में भर्ती होने और इलाज के लिए वित्तीय मदद मिलती है, जिससे उनका स्वास्थ्य खर्च कम हो जाता है।

सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं: योजना के माध्यम से लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं।

स्वास्थ्य सुरक्षा: यह योजना लोगों को आकस्मिक बीमारियों और दुर्घटनाओं से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

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