विश्वेन्द्र सिंह की बढ़ती भगवा निकटता, क्या बदलने वाले हैं राजस्थान के सियासी समीकरण?

Jinesh Jain | Feb 04, 2026, 18:35 IST
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bharatpur
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में दिग्गज नेता विश्वेन्द्र सिंह की बढ़ती भगवा निकटता चर्चा में है। भाजपा नेताओं से उनका ‘ऑपरेशन मेल-मिलाप’ क्या निकट भविष्य में कोई नया सियासी गुल खिलाने वाला है।

News In Short

  • कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह की भगवा पार्टी से निकटता बढ़ी
  • अब सीएम भजनलाल शर्मा ने विश्वेंद्र की कुशलक्षेम पूछी
  • पहले मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म और अरूण अरुण चतुर्वेदी से मुलाकात
  • विश्वेंद्र के ‘ऑपरेशन मेल-मिलाप’ से कांग्रेस में बेचैनी बढ़ी
  • भरतपुर राजपरिवार के पूर्व सदस्य विश्वेंद्र दल-बदल में रहे हैं माहिर

News In Detail

राजस्थान की राजनीति में कब ऊंट किस करवट बैठ जाए, यह कहना मुश्किल है। लेकिन, भरतपुर की सियासत से आ रही ताजा खबरें किसी बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रही हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह की भाजपा नेताओं के साथ लगातार बढ़ती 'जुगलबंदी' ने न सिर्फ कांग्रेस खेमे में बेचैनी पैदा कर दी है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार भी गर्म कर दिया है।

गहरी होती 'निकटता'

सियासी हलकों में हलचल तब शुरू हुई, जब 14 जनवरी को विश्वेन्द्र सिंह की मुलाकात प्रदेश के गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम के साथ हुई। बेढम उनके घर पहुंचे। इस मुलाकात की गर्मजोशी ने तभी संकेत दे दिए थे कि कुछ तो पक रहा है। मंगलवार को सर्किट हाउस में हुई एक और मुलाकात ने इन चर्चाओं को पंख लगा दिए। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के साथ विश्वेन्द्र सिंह की लंबी गुफ्तगू के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह महज शिष्टाचार है या किसी बड़े 'पॉलिटिकल माइग्रेशन' की तैयारी।

​मुख्यमंत्री की 'कुशलक्षेम' के गहरे मायने

इन मुलाकातों के बीच आश्चर्य की बात तब हुई, जब खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह से फोन पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही स्वास्थ्य को लेकर उनकी कुशलक्षेम पूछी। राजनीति में जब सत्ता पक्ष का मुखिया विपक्ष के किसी ऐसे दिग्गज नेता की सुध लेता है, जो अपनी ही पार्टी में हाशिए पर महसूस कर रहा हो, तो उसके मायने सिर्फ व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित नहीं रहते। जानकारों का मानना है कि भरतपुर संभाग में जाट राजनीति के केंद्र रहे विश्वेन्द्र सिंह की घेराबंदी कर भाजपा इस क्षेत्र में अपनी जड़ें और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री का यह 'सॉफ्ट कॉर्नर' उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

इसलिए अहम हैं विश्वेन्द्र सिंह

भरतपुर राजपरिवार के पूर्व सदस्य ​विश्वेन्द्र सिंह सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि पूर्वी राजस्थान में जाट समुदाय का एक बड़ा चेहरा हैं। भरतपुर और डीग जिलों की कई सीटों पर उनका सीधा असर है, जहां उनके प्रभाव वाले सिनसिनवार जाटों की अच्छी खासी संख्या है। ​तीन बार सांसद और तीन बार विधायक रह चुके विश्वेंद्र को भरतपुर की राजनीति का 'मजा हुआ खिलाड़ी' माना जाता है।

दल-बदल में माहिर रहे विश्वेंद्र

विश्वेंद्र सिंह इसलिए भी चर्चा में हैं कि वे अपनी राजनीतिक यात्रा में दल-बदल में माहिर रहे हैं। करीब 63 वर्षीय विश्वेंद्र ने 1988 में कांग्रेस से भरतपुर के जिला प्रमुख के रूप में अपना सियासी सफर शुरू किया। वह 1989 में कांग्रेस छोड़कर जनता दल में शामिल हो गए और भरतपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। इतना ही नहीं, उन्होंने फिर कांग्रेस का दामन थाम लिया। वे 1993 में कांग्रेस के टिकट पर नदबई से विधायक बने।

बाद में उनका मोह कांग्रेस से भंग हो गया। उन्होंने भाजपा की राह पकड़ ली। वे भाजपा के टिकट पर 1999 से 2009 तक भरतपुर से सांसद रहे। इस बीच, उन्होंन 2008 में भाजपा के दिग्गज दिगंबर सिंह से मतभेद होने पर भाजपा त्याग दी। वे कांग्रेस में शामिल हो गए। वे 2013 और 2020 में डीग कुम्हेर से कांग्रेस विधायक चुने गए। विश्वेंद्र प्रदेश में गहलोत सरकार में मंत्री भी बने। उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. शैलेश सिंह से पराजित होना पड़ा। प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक अब इस इंतजार में हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा।

​क्या हैं सियासी संकेत?

फिलहाल समय का इंतजार है, लेकिन राजनीतिक पंडित इन मुलाकातों को तीन नजरियों से देख रहे हैं:

  1. क्या विश्वेन्द्र सिंह 'घर वापसी' (पूर्व में वे भाजपा में रह चुके हैं) की योजना बना रहे हैं?
  2. ​क्या वे इन मुलाकातों के जरिए अपनी ही पार्टी कांग्रेस को अपनी अहमियत का अहसास करा रहे हैं?​
  3. क्या अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए वे सत्ता पक्ष के साथ समन्वय बिठा रहे हैं?

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