भीलवाड़ा में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट फंड का दुरुपयोग, MLA निजी कॉलोनाइजर के लिए बन रहे सड़के
Jageshwar prasad | Oct 20, 2026, 11:56 IST
भीलवाड़ा में DMFT के 10 करोड़ से निजी कॉलोनियों में सड़कें बनाने का मामला सामने आया।
भीलवाड़ा में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के 10 करोड़ रुपए की राशि से विधायक (MLA) की निजी कॉलोनाइजर के लिए सड़कें बनाने का मामला सामने आया है। गैर-वन क्षेत्र के लिए जारी इस फंड का इस्तेमाल निजी कॉलोनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। जब इसकी भनक कलेक्टर को लगी, तो उन्होंने तुरंत काम रोक दिया।
भीलवाड़ा में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के फंड का दुरुपयोग सामने आया है। पड़ताल में खुलासा हुआ है कि DMFT के 10 करोड़ रुपए की राशि से विधायक (MLA) की निजी कॉलोनाइजर के लिए सड़कें बनाई जा रही थीं। यह काम गैर-वन क्षेत्र के लिए जारी फंड से किया जा रहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड का मकसद सरकारी सड़कों का निर्माण होता है, लेकिन यहां इसे निजी कॉलोनियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। जब इसकी जानकारी कलेक्टर को मिली, तो उन्होंने तुरंत काम रोकने के आदेश दे दिए।
जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में कई कागजी खेल किए गए। निजी कॉलोनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सड़कों के नाम बदले गए और कागजों में उन्हें सरकारी सड़क बताया गया। इस पूरे खेल में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है।
पहले चरण में तीन प्रमुख इलाकों में सड़कें बनीं। पटेल नगर से भगवती नगर की ओर जाने वाली सड़क पर 35 लाख रुपये खर्च हुए। यहां 500 मीटर लंबी और 3.75 मीटर चौड़ी सीसी सड़क डाली गई।
देवविहार से आर्यव्रत कॉलोनी की ओर जाने वाली सड़क पर 70 लाख रुपए खर्च हुए। यह सड़क 800 मीटर लंबी और 3.75 मीटर चौड़ी है। तीसरी अंशुल सुशांत सिटी में करीब 1.48 करोड़ रुपए की सड़कें बनीं।
विधायक अशोक कोठारी की अनुशंसा पर यह सड़कें मंजूर हुईं। अफसरों ने यह जांच किए बिना स्वीकृति दी कि सड़कें कहां बन रही हैं और जमीन किसकी है। साथ ही यह भी नहीं देखा गया कि सरकारी रुपये खर्च करने की पात्रता है या नहीं।
नियमानुसार नगर विकास न्यास और नगर निगम विकास शुल्क लेते हैं, इसलिए सड़कें वही बनवा सकते हैं। इसमें DMFT फंड का इस्तेमाल नहीं हो सकता।
इन सड़कों को संपर्क सड़क बताकर मंजूरी दी गई। लेकिन मौका देखने पर पता चला कि सभी निजी कॉलोनियों की सड़कें हैं। अंशुल सुशांत सिटी में 1.48 करोड़ रुपए से बनी सड़कों को यह कहकर जायज ठहराया गया कि यहां से एक गांव का रास्ता जाता है। जबकि हकीकत में यह सड़कें सिर्फ कॉलोनी के अंदर जाती हैं।
12वीं गवर्निंग काउंसिल में 9.98 करोड़ रुपए के 16 कार्यों की स्वीकृति दी गई थी। आदेश में साफ शर्त थी कि विवादास्पद, निजी या किसी समाज विशेष के स्थल पर काम होने पर कार्यकारी एजेंसी जिम्मेदार होगी।
लेकिन PWD (Public Works Department) ने इस शर्त को नजरअंदाज कर दिया। कनक विहार, कमला विहार, रिद्धि-सिद्धि एन्क्लेव और मुखर्जी नगर की सड़कें भी इसी तरह मंजूर हुईं।
पड़ताल शुरू होते ही अफसरों ने काम रोक दिया। कलेक्टर और DMFT चेयरमैन जसमीतसिंह संधू ने कहा कि 12वीं और 13वीं गवर्निंग काउंसिल की शिकायत आई है। इसकी जांच करवाई जा रही है। काम स्थगित किए जा रहे हैं। PWD और UIT से जांच में गलत मिलने पर काम निरस्त कर दिया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड का मकसद सरकारी सड़कों का निर्माण होता है, लेकिन यहां इसे निजी कॉलोनियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। जब इसकी जानकारी कलेक्टर को मिली, तो उन्होंने तुरंत काम रोकने के आदेश दे दिए।
जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में कई कागजी खेल किए गए। निजी कॉलोनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सड़कों के नाम बदले गए और कागजों में उन्हें सरकारी सड़क बताया गया। इस पूरे खेल में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है।
किन कॉलोनियों में बनीं सड़कें
देवविहार से आर्यव्रत कॉलोनी की ओर जाने वाली सड़क पर 70 लाख रुपए खर्च हुए। यह सड़क 800 मीटर लंबी और 3.75 मीटर चौड़ी है। तीसरी अंशुल सुशांत सिटी में करीब 1.48 करोड़ रुपए की सड़कें बनीं।
बिना जांच दी गई मंजूरी
नियमानुसार नगर विकास न्यास और नगर निगम विकास शुल्क लेते हैं, इसलिए सड़कें वही बनवा सकते हैं। इसमें DMFT फंड का इस्तेमाल नहीं हो सकता।
सड़कों के नाम बदले गए
कलेक्टर ने शर्त डाली थी
लेकिन PWD (Public Works Department) ने इस शर्त को नजरअंदाज कर दिया। कनक विहार, कमला विहार, रिद्धि-सिद्धि एन्क्लेव और मुखर्जी नगर की सड़कें भी इसी तरह मंजूर हुईं।
अफसरों ने रोका काम
- भीलवाड़ा में DMFT फंड का दुरुपयोग किस प्रकार किया गया है?
भीलवाड़ा में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के लगभग 10 करोड़ रुपए की राशि का दुरुपयोग किया गया, जिसमें निजी कॉलोनियों के लिए सड़कें बनाई गईं। इस फंड का उद्देश्य सरकारी सड़कों का निर्माण था, लेकिन इसका उपयोग निजी कॉलोनियों के लिए किया गया। - इस घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?
जब कलेक्टर को इस घोटाले की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत कार्य रोकने के आदेश दिए। जांच जारी है और PWD और UIT द्वारा जांच में यदि कोई गलत पाए जाते हैं तो काम निरस्त कर दिया जाएगा। - कौन-कौन सी कॉलोनियों में DMFT फंड से सड़कें बनाई गई हैं?
DMFT फंड से सड़कें प्रमुखतः पटेल नगर, भगवती नगर, देवविहार, आर्यव्रत कॉलोनी, और अंशुल सुशांत सिटी सहित अन्य कॉलोनियों में बनाई गई हैं।
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