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Photograph: (the sootr)
News in short
- भिवाड़ी में भीषण अग्निकांड के बाद कारखानों के सुरक्षा मानकों की हो रही जांच।
- भिवाड़ी की हर दूसरी इकाई में सुरक्षा मानकों का हो रहा खुला उल्लंघन।
- अब तक क्षेत्र की 1,058 औद्योगिक इकाइयों को थमाए नोटिस।
- नोटिस का सही जवाब नहीं देने पर हो सकती है कठोर कार्रवाई।
- भिवाड़ी में हुए अग्निकांड में मारे गए थे आठ श्रमिक।
सुनील जैन @ अलवर ​
News in detail
राजस्थान के सबसे बड़े औद्योगिक हब भिवाड़ी में भीषण अग्निकांड के बाद सरकार अलर्ट मोड पर है। प्रशासन ने एक सप्ताह से कारखानों की औद्योगिक सुरक्षा की जांच के लिए मुहिम छेड़ी है। जांच में सामने आया है कि क्षेत्र की लगभग हर दूसरी इकाई नियमों का उल्लंघन कर रही है। अब तक 1,058 औद्योगिक इकाइयों को गंभीर खामियां पाए जाने पर नोटिस जारी किए गए हैं।
​खुशखेड़ा से सुलगी जांच की आंच​
इस पूरी कार्रवाई की जड़ में 16 फरवरी को खुशखेड़ा में हुआ वह दर्दनाक हादसा है, जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। एक गारमेंट फैक्ट्री की आड़ में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण बारूद विस्फोट में 8 निर्दोष श्रमिकों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री के कड़े रुख को देखते हुए कार्यवाहक जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुमित्रा मिश्र कर रही हैं।
​जांच के आंकड़े: चौंकाने वाली हकीकत​
17 फरवरी से 23 फरवरी 2026 तक चले इस सघन अभियान में प्रशासन ने जो आंकड़े जुटाए हैं, वे डराने वाले हैं। विभिन्न विभागों ने मिलकर कुल 2,515 औद्योगिक इकाइयों (रीको) का निरीक्षण किया, जिनमें से 1,058 इकाइयां दोषी पाई गईं।
​फायर सेफ्टी में सबसे बड़ी लापरवाही​
सबसे चौंकाने वाला खुलासा अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट में हुआ है। 466 फैक्ट्रियों की जांच में से 392 को नोटिस दिया गया है। यानी करीब 85% फैक्ट्रियों में आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। यह आंकड़ा बताता है कि भिवाड़ी के उद्योग 'बारूद के ढेर' पर बैठे हैं, जहां एक छोटी सी चिंगारी फिर किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। वहीं, फैक्ट्री एवं बॉयलर्स विभाग ने भी 303 में से 194 इकाइयों को मानकों के विपरीत पाया है।
​अभी और गिरेंगी गाज
अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुमित्रा मिश्र ने स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआत है। अभी केवल आधी इकाइयों की जांच हुई है, शेष औद्योगिक इकाइयों की जांच प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी है। प्रशासन का उद्देश्य केवल नोटिस देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी इकाई रिहायशी इलाकों या अन्य वैध कार्यों की आड़ में अवैध और खतरनाक गतिविधियां संचालित न करे। उन्होंने कहा कि जो इकाइयां सुधार नहीं करेंगी, उन्हें सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
​उद्योग जगत में खलबली​
इस व्यापक कार्रवाई से उद्यमियों में हड़कंप है। सालों से कागजों पर चल रही सुरक्षा व्यवस्था की अब धरातल पर परख हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर यह जांच पहले होती, तो खुशखेड़ा में 8 मजदूरों की बलि नहीं चढ़ती। फिलहाल, नोटिस मिलने वाली कंपनियों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर जवाब देने और कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
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