कूनो से निकला चीता बंध बारैठा से किया गया रेस्क्यू, वापस कूनो भेजा गया

Jageshwar prasad | Jun 15, 2026, 10:39 IST
चीता KP-3 को सुरक्षित कूनो नेशनल पार्क भेज दिया गया
कूनो नेशनल पार्क का चीता KP-3 राजस्थान के भरतपुर की बंध बारैठा वाइल्डलाइफ सेंचुरी में 15 दिन से विचरण कर रहा था। रविवार को वन विभाग की विशेष टीम ने उसे ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया और कूनो नेशनल पार्क भेज दिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भरतपुर के बंध बारैठा में 15 दिनों से विचरण कर रहा चीता किया गया रेस्क्यू।
  • कूनो नेशनल पार्क से आई विशेष टीम ने चीते को ट्रैंकुलाइज किया।
  • चीता इस दौरान पूरी तरह स्वस्थ रहा और उसने प्राकृतिक शिकार भी किया।
  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के डीएफओ चेतन कुमार ने पूरे ऑपरेशन की निगरानी की।
  • चीता KP-3 को रेस्क्यू वाहन से सुरक्षित कूनो नेशनल पार्क भेज दिया गया।

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान के भरतपुर जिले के बंध बारैठा वाइल्डलाइफ सेंचुरी में 15 दिनों से विचरण कर रहे चीते केपी-3 (KP-3) को रविवार 15 जून को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया।



कूनो नेशनल पार्क से आई विशेष टीम और वन्यजीव चिकित्सकों ने मिलकर चीते को ट्रैंकुलाइज किया। उसे रेस्क्यू वाहन से सुरक्षित कूनो भेज दिया गया। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के डीएफओ (DFO) चेतन कुमार ने पूरे ऑपरेशन की निगरानी की।



झालावाड़ से शुरू हुआ था KP-3 का राजस्थान सफर

यह पहला मौका नहीं था जब KP-3 कूनो से बाहर निकला। अप्रैल 2026 में वह मध्यप्रदेश की सीमा पार कर राजस्थान के झालावाड़ जिले के वन क्षेत्र में पहुंच गया था।



उस समय किसानों में दहशत फैल गई थी। बाद में KP-3 वहां से आगे बढ़ते हुए भरतपुर के बंध बारैठा वाइल्डलाइफ सेंचुरी तक पहुंच गया।



15 दिन तक बंध बारैठा में रहा

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार KP-3 पिछले 15 दिनों से बंध बारैठा क्षेत्र में विचरण कर रहा था। इस दौरान उसकी सेहत और गतिविधियों पर लगातार निगाह रखी जा रही थी।



डीएफओ चेतन कुमार ने बताया कि चीता इस दौरान पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय रहा। उसने प्राकृतिक परिवेश में स्वतंत्र रूप से घूमा और स्वाभाविक तरीके से शिकार भी किया।



बंध बारैठा को बताया जैव विविधता से समृद्ध

डीएफओ चेतन कुमार ने कहा कि बंध बारैठा वाइल्डलाइफ सेंचुरी जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां पर्याप्त वन क्षेत्र, जल स्रोत और वन्यजीव संरक्षण की मजबूत व्यवस्थाएं हैं। चीते का यहां सुरक्षित रहना और सफल शिकार करना इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं को दर्शाता है।



विशेष टीम आई, ट्रैंकुलाइज कर किया रेस्क्यू

कूनो नेशनल पार्क की विशेष रेस्क्यू टीम और वन्यजीव चिकित्सकों ने संयुक्त अभियान चलाया। पूरी सावधानी के साथ KP-3 को ट्रैंकुलाइज किया गया।



डीएफओ चेतन कुमार मौके पर उपस्थित रहे और पूरी प्रक्रिया की देखरेख की। इसके बाद रेस्क्यू वाहन से KP-3 को कूनो नेशनल पार्क के लिए रवाना कर दिया गया।



भरतपुर के बंध बारैठा में विचरण कर रहा चीता किया गया रेस्क्यू


क्या है चीता पुनर्स्थापन परियोजना?

डीएफओ चेतन कुमार ने बताया कि कूनो नेशनल पार्क देश की एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी चीता पुनर्स्थापन परियोजना का हिस्सा है। भारत में दशकों बाद चीतों को वापस लाने की चीता परियोजना के तहत अफ्रीका और नामीबिया से चीते लाए गए हैं।



इनमें से कुछ चीते अपनी प्राकृतिक प्रवृत्ति के अनुसार कूनो से बाहर निकल जाते हैं। इसी परियोजना के तहत KP-3 को वापस कूनो लेकर जाया गया है।



FAQ

  1. बंध बारैठा वाइल्डलाइफ सेंचुरी कहां है?
    बंध बारैठा वाइल्डलाइफ सेंचुरी राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित एक संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र है। यह जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध है। यहां पर्याप्त वन क्षेत्र, जल स्रोत और शिकार के लिए वन्यजीव मौजूद हैं जो इसे चीते के लिए अनुकूल बनाते हैं।

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