सिजेरियन प्रसव को लेकर CS की नाराजगी, अन्य 6 अस्पताल क्यों नहीं दे रहे सुविधा?
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर स्वास्थ्य समीक्षा में भड़के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास।
- अन्य 6 अस्पतालों में सुविधाएं फिर भी उम्मेद-MDM पर ही क्यों लोड?
- 6 अस्पतालों में डॉक्टर मौजूद, फिर भी उम्मेद पर क्यों भेजे जाते मरीज?
- सैटेलाइट अस्पतालों में तत्काल सिजेरियन शुरू करने के सख्त निर्देश।
- लेकिन 24 घंटे एनेस्थेटिस्ट और नर्सिंग स्टाफ बिना कैसे सफल होगी योजना?
जोधपुर के डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने जोधपुर के स्वास्थ्य ढांचे पर एक गंभीर सवाल खड़ा किया।
उन्होंनेपूछा किजोधपुर में जब 6 अन्य अस्पतालों में सुविधाएं मौजूद हैं, तो उम्मेद और एमडीएम पर प्रसव का बोझ क्यों बढ़ रहा है? उन्होंने निचले अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि इसमें 24 घंटे स्टाफ की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
बड़े अस्पतालों पर बढ़ रहा बोझ
मुख्य सचिव ने चिंता व्यक्त की कि उम्मेद अस्पताल और मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल के जनाना विंग पर प्रसूताओं और सिजेरियन ऑपरेशन का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इससे इन टर्शरी केयर अस्पतालों की व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब निचले स्तर के 6 अस्पतालों में बुनियादी ढांचा और विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद हैं, तो मरीजों को छोटे-मोटे कारणों पर हायर सेंटर क्यों भेजा जा रहा है?
मुख्य सचिव के निर्देश
मुख्य सचिव ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए:
- स्थानीय स्तर पर प्रसव: जिला अस्पताल प्रताप नगर, मंडोर, महिला बाग और सैटेलाइट अस्पताल चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में सिजेरियन डिलीवरी शुरू कराई जाए।
- अस्पतालों का अपग्रेडेशन: जिला और सैटेलाइट अस्पतालों को तत्काल अपडेट किया जाए ताकि गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल सके।
- रेफरल व्यवस्था में सुधार: उम्मेद और एमडीएम अस्पताल में केवल उन्हीं गंभीर प्रसूताओं को भेजा जाए जिन्हें टर्शरी केयर की वास्तविक जरूरत है।
24 घंटे स्टाफ की बड़ी चुनौती
प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर सबसे बड़ी बाधा 24 घंटे स्टाफ की कमी है। सिजेरियन प्रसव के लिए केवल गायनोकोलॉजिस्ट ही नहीं, बल्कि 24 घंटे एनेस्थेटिस्ट और ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ का होना भी अनिवार्य है।
यदि सरकार इन जिला व सैटेलाइट अस्पतालों में 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करती है, तभी बड़े अस्पतालों का लोड कम होगा और आम जनता को वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
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