घर के बाहर डेयरी बूथ लगाना स्वतंत्रता और जीवन जीने के अधिकार के विपरीत : राजस्थान हाई कोर्ट

Amit Baijnath Garg | Aug 29, 2025, 21:06 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक निजी आवास के बाहर डेयरी बूथ लगाने पर रोक लगाई, इसे जीवन जीने के अधिकार के खिलाफ बताया। जांच के लिए कोर्ट ने कमिश्नर नियुक्त किया।

राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में जयपुर के बापू नगर इलाके में एक निजी आवास के बाहर डेयरी बूथ लगाने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इसे जीवन जीने के अधिकार और स्वतंत्रता के विपरीत बताते हुए याचिका स्वीकार की और डेयरी बूथ की अनुमति रद्द कर दी। यह निर्णय उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, जो अपने घरों के बाहर व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने के इच्छुक होते हैं।



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क्या था मामला?

जयपुर के बापू नगर में एक नागरिक अजय शिवपुरी ने राजस्थान सरकार के उस आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत उनके निजी घर के बाहर डेयरी बूथ लगाने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकारी आवंटित डेयरी बूथों पर न केवल दूध और दूध से बने पदार्थ, बल्कि अन्य किराने का सामान भी बेचा जाता है। कई डेयरी बूथ किराना स्टोर और छोटे रेस्टोरेंट के रूप में कार्य करते हैं, जो आवासीय क्षेत्रों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।



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हाई कोर्ट ने क्यों लिया यह निर्णय?

हाई कोर्ट ने इस मामले को व्यापक प्रभाव वाला मानते हुए इसे जीवन जीने के अधिकार (Right to Life) और स्वतंत्रता (Freedom) से जुड़ा हुआ बताया। जस्टिस समीर जैन ने यह अंतरिम आदेश दिया कि ऐसे डेयरी बूथों से न केवल सार्वजनिक परेशानी होती है, बल्कि यह आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अधिकारों का उल्लंघन भी है। अदालत ने इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि बिना एनओसी (No Objection Certificate) के सरकारी अधिकारियों से मंजूरी लेकर इस तरह के कार्यों को अनुमति दी गई।



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क्या होगा अगला कदम?

इस मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी। अदालत ने सरकारी विभागों, जैसे बिजली कंपनी, पुलिस और पीडब्ल्यूडी से एनओसी (NOC) लेने के बिना डेयरी बूथों के स्थापित करने को लेकर सवाल उठाया। कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक स्थलों पर व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।



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सार्वजनिक जगहों पर व्यावसायिक गतिविधियां

यह मामला केवल एक डेयरी बूथ की अनुमति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि सार्वजनिक स्थानों पर या आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां कितनी उचित और कानूनी हैं। उच्च न्यायालय का यह आदेश खासतौर पर उन नागरिकों के लिए अहम हो सकता है, जो अपने घरों के पास व्यापार करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सरकारी अनुमतियां और नियमों का पालन करना जरूरी होता है।



FAQ

  1. Q1: क्या हाईकोर्ट का फैसला स्थायी होगा?
    यह मामला अब जांच के दायरे में है, और अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय की है। कोर्ट कमिश्नर द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
  2. Q2: कोर्ट ने क्यों डेयरी बूथ पर रोक लगाई?
    कोर्ट ने इसे जीवन जीने के अधिकार और स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हुए और बिना आवश्यक एनओसी के अनुमति देने को गलत ठहराया, साथ ही यह आवासीय क्षेत्रों में परेशानी का कारण बन सकता है।
  3. Q3: कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति का उद्देश्य क्या था?
    कोर्ट कमिश्नर को बापू नगर और गांधीनगर क्षेत्र में डेयरी बूथों का सर्वे करने और इनसे संबंधित नियमों और गाइडलाइंस की जांच करने का आदेश दिया गया है।

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