गजब परंपरा: 90 साल के बुजुर्ग के निधन पर हाथी मंगाया, तीन लाख खर्च कर निकाली शवयात्रा
Purshottam Kumar Joshi | Jan 16, 2026, 12:53 IST
Photograph: (the sootr)
यह राजस्थान में गाडिया लोहार समुदाय में अनूठी परंपरा की कहानी हैं। बुजुर्ग जागा के निधन पर समाज ने तीन लाख रुपए का आपस में चंदा किया। फिर हाथी—घोड़े और डीजे के साथ बुजुर्ग की अंतिम यात्रा निकाली।
सुनील जैन@अलवर
राजस्थान में गाडिया लोहार समुदाय में सामाजिक एकता और परंपराओं का अनूठा उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब 90 साल के बुजुर्ग व्यक्ति के निधन पर उनकी शव यात्रा पूरे धूमधाम से निकाली गई। खास बात यह रही कि शव यात्रा में सबसे आगे जयपुर से मंगवाया हाथी चल रहा था। शव यात्रा को शमशान ले जाने तक करीब तीन लाख रुपए खर्च आया। यह राशि गाडिया लोहार समुदाय के लोगों ने आपस चंदा करके एकत्रित की थी।
बताया जाता है कि मृतक का नाम जागा था। अलवर में वह सूर्य नगर के पास रहता था। वह गाडिया गाडिया लोहार में सबसे अधिक प्रतिष्ठित माना जाता थां उसके निधन पर पूरे समुदाय में शोक छा गया। समुदाय ने उनकी शव यात्रा गाजे-बाजे के साथ पूरे धूमधाम से निकालने का फैसला किया। इसके लिए समाज के लोगों ने आपस में चंदा किया। इसमें करीब तीन लाख रुपए एकत्रित हुए। शव यात्रा अलवर में सूर्य नगर डी-ब्लॉक से प्रारंभ होकर एनईबी श्मशान घाट तक पहुंची।
शव यात्रा के लिए जयपुर से हाथी मंगवाया गया। यह हाथी शव यात्रा के आगे चल रहा था। हाथी को पारंपरिक सजावट के साथ तैयार किया गया, जो पूरी शवयात्रा का आकर्षण बना रहा। हाथी के पीछे घोड़े, डीजे वाहन और समाज के लोग चल रहे थे। डीजे की धुन पर समाज के युवक नाचते-गाते दिखे। वहीं पारंपरिक बाजों की गूंज ने पूरे माहौल को अलग ही रंग दे दिया।
जागा के परिजनों और समाज के लोगों ने बताया कि पूरे आयोजन पर करीब 3 लाख रुपये का खर्च आया। यह राशि गाड़ियां लोहार समाज के लोगों ने आपसी सहयोग से एकत्र की। समाज में यह परंपरा है कि किसी भी सदस्य के निधन पर पूरा समाज आर्थिक और सामाजिक रूप से साथ खड़ा होता है, जिससे अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जा सके।
यह परंपरा समाज में आपसी सहयोग और एक-दूसरे को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए है।
बुजुर्ग के पोते रोहित ने बताया कि उनके दादा जागा गाडिया लोहार समाज में बेहद सम्मानित व्यक्ति थे। हमारे समाज ने पूरे शान-शौकत के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकालना तय किया। पूरे समाज ने इसमें सहयोग किया। इसी सहयोग से जयपुर से हाथी मंगवाया गया। शव यात्रा के दौरान मार्ग में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कई स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर बुजुर्ग को अंतिम प्रणाम किया। समाज के स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभाली, जिससे यात्रा शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हो सके।
बताया जाता है कि एनईबी श्मशान घाट पहुंचने के बाद जागा का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान माहौल भावपूर्ण रहा। इसमें गाडिया लोहार समाज की एकजुटता और परंपराओं पर गर्व भी साफ दिख रहा था। यह शव यात्रा न सिर्फ एक व्यक्ति की अंतिम विदाई थी, बल्कि समाज की संस्कृति, परंपरा और सामूहिक सहयोग की मजबूत मिसाल भी बनी। आसपास के लोगों ने इसे एक अनूठी सामाजिक परंपरा के रूप में देखा।
राजस्थान के अलवर में गाडिया लोहार समुदाय में आपस में आर्थिक सहयोग कर बुजुर्ग की शवयात्रा निकालना अपने आप में अनोखी परंपरा मानी जा सकती है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि सामाजिक स्तर पर आपस में आर्थिक सहयोग करना सामाजिक एकजुटता और एकता का संदेश भी देता है। जब समाज में अमीरी-गरीबी की खाई बढ़ रही है, तब यह परंपरा समाज में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मजबूती देती है। आज जब सभी समुदायों में सामजिक मूल्यों में गिरावट आ रही है, तब यह परंपरा सभी समुदायों को आपसी भाईचारा, सहयोग और सामाजिक एकजुटता का बड़ा संदेश देती है।
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News In Short
- अलवर में गाडिया लोहार समाज में 70 साल के बुजुर्ग जागा का निधन
- बुजुर्ग की अंतिम यात्रा के लिए आपस में तीन लाख का चंदा किया
- शवयात्रा के लिए खास तौर पर जयपुर से हाथी मंगवाया
- शवयात्रा में हाथी, घोड़े, डीजे वाहन और नाचते-गाते लोग दिखे
- आपस में आर्थिक सहयोग कर एक-दूजे को सहयोग करने की है यह पंरपरा
News In Detail
समाज ने जुटाया तीन लाख का चंदा
अनूठी शवयात्रा में हाथी-घोड़े और डीजे वाहन
alwar1
निधन पर आर्थिक सहयोग की परंपरा
यह परंपरा समाज में आपसी सहयोग और एक-दूसरे को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए है।
जागा था गाडिया लोहार में सम्मानित व्यक्ति
इसलिए निकाली भव्य शवयात्रा
alwar
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