कोचिंग हब में नहीं जा रहे कोचिंग, JDA सिर्फ पार्किंग-सेटबैक पर नोटिस दे रहा

Mukesh Sharma | Aug 14, 2026, 18:44 IST
300 करोड़ का कोचिंग हब अब तक खाली, महंगी दरों के कारण संस्थान नहीं हुए शिफ्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गोपालपुरा बायपास पर मास्टर प्लान के विपरीत कोचिंग इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत गतिविधियों पर सुधारात्मक व उपचारात्मक उपाय करने को कहा है। लेकिन, जेडीए यहां कोचिंग वाली बिल्डिगों को सैट-बैक व पार्किंग जैसे मुद्धों पर नोटिस दे रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कोचिंग इंस्टीट्यूट पर कोर्ट ने पूछे उपाय,जेडीए नाप रहा है सैट-बैक।
  • मास्टर प्लान के विपरीत कमर्शियल एरिया में संस्थागत गतिविधियां चलाने का है मामला।
  • गोपालपुरा बायपास रोड है कमर्शियल,कोचिंग इंस्टीट्यूट है संस्थागत गतिविधि।
  • सुप्रीम कोर्ट की मंशा के बावजूद कोचिंग हब गृह विभाग को दे रही है सरकार।

राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने जयपुर में कोचिंग इंस्टीट्यूट के लिए करीब 300 करोड़ की लागत से कोचिंग हब बनाया। लेकिन,अब तक शहर के आवासीय इलाकों में चल रहे कोचिंग इंस्टीट्यूट इस डेडीकेटेड कोचिंग हब में नहीं भेजे जा सके हैं।



जयपुर शहर के जिस गोपालपुरा बायपास रोड पर यह कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहे हैं वह मास्टर प्लान के अनुसार कमर्शियल रोड है। जबकि कोचिंग इंस्टीट्यूट संस्थागत गतिविधि है। यानि इस रोड पर शो-रुम व दुकानें आदि तो खुल सकते हैं लेकिन,संस्थागत गतिविधियां नहीं हो सकतीं।



कोचिंग इंस्टीट्यूट के कारण आस-पास की रिहायशी कॉलोनियों में घर-घर में हॉस्टल,पीजी और लाईब्रेरियां चल रही हैं। इनमें हजारों छात्र-छात्राएं रह रहे हैं। इस कारण इन कॉलोनियों के में रहने वालों का जीना दूभर हो रहा है।



सुप्रीम कोर्ट पहुंची विकास समिति

इसके विरुद्ध ही 10-बी कॉलोनी विकास समिति ने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में अर्जी दायर की है। इसमें कहा है कि मास्टर प्लान के अनुसार गोपालपुरा बायपास कमर्शियल है। लेकिन यहां सैकडों कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहे हैं।



राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने प्रताप नगर में करीब 300 करोड़ की लागत से सर्वसुविधा संपन्न कोचिंग हब बनाया है। लेकिन,सरकार अब तक कोचिंग इंस्टीट्यूट को यहां स्थानांतरित नहीं करवा सकी है और कोचिंग हब में अन्य सरकारी विभागों को दिया जा रहा है।



यह हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को मामले में सुनवाई की थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद जेडीए के वकील को तीन सप्ताह के भीतर की गई सुधारात्मक और उपचारात्मक कार्रवाई का पूरा ब्योरा अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।



कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोचिंग या शैक्षणिक संस्थानों के लिए विशेष रूप से बनाई गई इमारत में यदि किसी अन्य व्यक्ति को कोई आवंटन किया जाता है तो वह,अदालती कार्यवाही के अंतिम आदेशों के अधीन रहेगा।



और जेडीए कर रहा नपाई

10-बी कॉलोनी विकास समिति की सुप्रीम कोर्ट में शिकायत मास्टर प्लान के विपरीत गोपालपुरा बायपास रोड के कमर्शियल होने के बावजूद यहां कोचिंग इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत गतिविधि संचालित करने व इससे यहां के निवासियों की परेशानियों को लेकर है।



कोर्ट ने जेडीए को (specific remedial and corrective measures ) सुधारात्मक और उपचारात्मक कार्रवाई करके बताने को कहा है।



लेकिन,जेडीए उन बिल्डिगों में सैट-बैक,सुरक्षा उपाय,आपातकालीन दरवाजा और पार्किंग जैसे नियमों के होने या नहीं होने पर नोटिस दे रहा है। जबकि सुधारात्मक और उपचारात्मक कार्रवाई के तहत इन कोचिंग इंस्टीट्यूट को गोपालपुरा बायपास रोड से कोचिंग हब में स्थानांतरित करने की कार्रवाई ही है।



कोर्ट की मंशा के विपरीत है गृह विभाग को आवंटन

कोर्ट ने कोचिंग इंस्टीट्यूट में किसी अन्य को आवंटन को भी मामले के अंतिम फैसले के अधीन रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में यदि सुप्रीम कोर्ट भविष्य में कोचिंग इंस्टीट्यूट के अतिरिक्त किसी अन्य के आवंटन अवैध बताकर रद्ध कर देता है तो वहां जाने वालों को परेशानी होगी।



इसके बावजूद राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने गुरुवार को गृह विभाग में तीन टॉवर आवंटित कर दिए। बोर्ड ने टॉवर नंगर 7 और 8 के साथ एडमिन बिल्डिंग भी गृह विभाग को दे दी है।



महंगी दर के कारण नहीं जा रहे कोचिंग इंस्टीट्यूट...

हाउसिंग बोर्ड ने कोचिंग हब में आवंटन के लिए 5500 से 7 हजार रुपए वर्गमीटर रिजर्व प्राइस तय की थी। एक टॉवर एडमिन ब्लॉक के रिजर्व था। लेकिन दरें महंगी होने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी का हवाला देकर कोचिंग संस्थानों ने हब में आवंटन में भाग लेने से मना कर दिया।



तीन साल में 14 कोचिंग वाले ही कोचिंग हब में पहुंचे हैं। हाउसिंग बोर्ड अब 8 में से 3 टॉवर और एडमिन ब्लॉक सहित कुल 4 टॉवर पुलिस और गृह विभाग को आवंटित कर चुका है। अब केवल 5 टॉवर खाली हैं और इनमें भी मात्र 14 कोचिंग चल रहे हैं।



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