सरकारी डॉक्टर कर रहा था MD ड्रग्स की सप्लाई, 4 किलो कच्ची एमडी बरामद, लाखों का कैश और कार जब्त
Jageshwar prasad | Oct 16, 2026, 22:33 IST
बालोतरा जिले के मिठौड़ा गांव में पुलिस ने एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री पकड़ी
बालोतरा जिले के मिठौड़ा गांव में पुलिस ने एक बड़े एमडी ड्रग्स के कारखाने का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में सुरेश कुमार विश्नोई और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया । पुलिस ने तीन किलो से ज्यादा कच्चा एमडी और अन्य रसायन बरामद किए हैं। इन तीनों से पूछताछ जारी है।
बालोतरा जिले के मिठौड़ा गांव में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और पुलिस ने एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री पकड़ी है। पुलिस ने एक सरकारी डॉक्टर सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से 3.764 किलो कच्ची एमडी, ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल, 3.41 लाख रुपए कैश, मशीनरी और एक कार जब्त की गई है।
यह पूरा नेटवर्क डॉक्टरी पेशे की आड़ में चलाया जा रहा था। मुख्य आरोपी सुरेश कुमार विश्नोई (Suresh Kumar Vishnoi) ने कई कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी की, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं लगी। इसके बाद वह बेंगलुरु गया, जहां दवा सप्लाई का काम करने लगा। नौकरी में ज्यादा रुपए नहीं मिले तो उसने गांव लौटकर एमडी ड्रग्स बनाने का फैसला किया।
सुरेश ने यूट्यूब वीडियो देखकर एमडी ड्रग्स बनाने की पूरी प्रोसेस सीखी। इसके बाद उसने घर में ही फैक्ट्री लगा दी। फिर जालोर जिला अस्पताल में पोस्टेड सरकारी डॉक्टर मुकेश विश्नोई और उत्कर्ष के साथ मिलकर तैयार ड्रग्स की सप्लाई शुरू कर दी। यह सप्लाई बालोतरा, जालोर और आसपास के इलाकों में होती थी।
आईजी विकास कुमार ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एएनटीएफ को सूचना मिली थी कि मिठौड़ा निवासी सुरेश कुमार विश्नोई अपने घर के पास एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री चला रहा है। इस पर एएनटीएफ ने पुलिस के साथ मिलकर सुरेश के घर पर दबिश दी। इस दौरान घर के बाहर बने छप्पर में बैठे 3 युवकों को पुलिस ने पकड़ लिया।
तीनों युवकों की पहचान मिठौड़ा निवासी सुरेश कुमार विश्नोई, जालोर के मोदरान निवासी डॉ. मुकेश विश्नोई और उत्कर्ष के रूप में हुई। मकान और परिसर की तलाशी लेने पर 3.764 किलो कच्ची एमडी मिली। इसके अलावा 888 ग्राम 2-ब्रोमो 4-मैथापेलारिफिन पाउडर और 800 ग्राम अन्य केमिकल भी मिला।
पुलिस ने मौके से इलेक्ट्रिक बिलौना मशीन, इंडक्शन चूल्हा, बड़ा कांच का जार और थर्मामीटर भी बरामद किया। आरोपियों के पास से 3 लाख 41 हजार 700 रुपए नकद भी मिले। आरोपियों से एक कार भी जब्त की गई है। यह कार ड्रग्स की सप्लाई में इस्तेमाल होती थी।
आईजी ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि सुरेश कुमार ग्रेजुएट है। उसने पटवारी, ग्राम सेवक, पुलिस कॉन्स्टेबल, वनरक्षक और एसआई समेत कई कॉम्पिटिशन एग्जाम दिए। लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। साल 2022 में वह बेंगलुरु गया और दोस्त के साथ दवा सप्लाई का काम करने लगा।
साल 2024 में गांव लौटने के बाद वह तस्करों के संपर्क में आया। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में वह एमडी तस्करी से जुड़ गया। उसने यूट्यूब वीडियो (YouTube Video) देखकर एमडी ड्रग्स बनाने की पूरी प्रोसेस सीखी। दवा सप्लाई के अनुभव और नेटवर्क का फायदा उठाकर उसने केमिकल्स का इंतजाम किया।
आरोपी सुरेश कुमार एमडी की तैयार खेप बेचने के लिए अपने परिचित डॉ. मुकेश और उत्कर्ष को अपने घर बुलाता था। डॉक्टर होने के कारण किसी को शक नहीं होता था। इसी वजह से वह कार में आसानी से ड्रग्स ले जाकर जालोर, सिवाना और आसपास के इलाकों में सप्लाई करता था।
आईजी ने बताया कि कार्रवाई के समय भी दोनों आरोपी एमडी ड्रग्स की खेप खरीदने सुरेश के घर आए हुए थे। फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इससे नेटवर्क में शामिल अन्य तस्करों और केमिकल्स सप्लाई करने वालों को भी पकड़ा जा सकेगा।
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि इसमें एक सरकारी डॉक्टर भी शामिल है। डॉक्टर होने के कारण उसे किसी पर शक नहीं होता था। इससे यह नेटवर्क लंबे समय तक चलता रहा।
यह भी सामने आया है कि ड्रग्स बनाना यूट्यूब से सीखा गया। इससे साफ होता है कि आजकल आपराधिक गतिविधियों के लिए भी इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अब देखना जरूरी है कि जांच में और क्या खुलासे होते हैं।
यह पूरा नेटवर्क डॉक्टरी पेशे की आड़ में चलाया जा रहा था। मुख्य आरोपी सुरेश कुमार विश्नोई (Suresh Kumar Vishnoi) ने कई कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी की, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं लगी। इसके बाद वह बेंगलुरु गया, जहां दवा सप्लाई का काम करने लगा। नौकरी में ज्यादा रुपए नहीं मिले तो उसने गांव लौटकर एमडी ड्रग्स बनाने का फैसला किया।
यूट्यूब देखकर सीखी ड्रग्स बनाने की प्रोसेस
कैसे हुई कार्रवाई?
तीनों युवकों की पहचान मिठौड़ा निवासी सुरेश कुमार विश्नोई, जालोर के मोदरान निवासी डॉ. मुकेश विश्नोई और उत्कर्ष के रूप में हुई। मकान और परिसर की तलाशी लेने पर 3.764 किलो कच्ची एमडी मिली। इसके अलावा 888 ग्राम 2-ब्रोमो 4-मैथापेलारिफिन पाउडर और 800 ग्राम अन्य केमिकल भी मिला।
क्या-क्या बरामद हुआ?
नौकरी नहीं लगी तो अपनाया अपराध
साल 2024 में गांव लौटने के बाद वह तस्करों के संपर्क में आया। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में वह एमडी तस्करी से जुड़ गया। उसने यूट्यूब वीडियो (YouTube Video) देखकर एमडी ड्रग्स बनाने की पूरी प्रोसेस सीखी। दवा सप्लाई के अनुभव और नेटवर्क का फायदा उठाकर उसने केमिकल्स का इंतजाम किया।
डॉक्टर की आड़ में होती थी सप्लाई
आईजी ने बताया कि कार्रवाई के समय भी दोनों आरोपी एमडी ड्रग्स की खेप खरीदने सुरेश के घर आए हुए थे। फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इससे नेटवर्क में शामिल अन्य तस्करों और केमिकल्स सप्लाई करने वालों को भी पकड़ा जा सकेगा।
आपराधिक गतिविधियों के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल
यह भी सामने आया है कि ड्रग्स बनाना यूट्यूब से सीखा गया। इससे साफ होता है कि आजकल आपराधिक गतिविधियों के लिए भी इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अब देखना जरूरी है कि जांच में और क्या खुलासे होते हैं।
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