ईयू समझौता से राजस्थान के निर्यातकों को होगा कितना फायदा, जानें पूरी रिपोर्ट

Ashish Bhardwaj | Jan 28, 2026, 13:41 IST
Photograph: (the sootr)
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का राजस्थान के निर्यातकों को भी फायदा मिलेगा। लेकिन इसकी पूरी प्रभावशीलता आने में एक वर्ष का समय लगेगा।

News In Short

  • भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से राजस्थान के निर्यातकों को ड्यूटी फ्री एंट्री मिलने की संभावना है।
  • इस समझौते से जेम्स एंड ज्वैलरी, मार्बल, ग्रेनाइट, और रेडिमेड गारमेंट्स जैसे उत्पादों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
  • एफटीए से केवल इंपोर्ट ड्यूटी में राहत मिलेगी, लेकिन निर्यातकों को अतिरिक्त नीतिगत सुधारों की आवश्यकता हो सकती है।
  • भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार बढ़ने की उम्मीद से राजस्थान के निर्यातक और औद्योगिक इकाइयाँ उत्साहित हैं।
  • हालांकि डायरेक्ट इनसेंटिव और नीतिगत सुधार के लिए सरकार को और कदम उठाने की आवश्यकता होगी।

News In Detail

भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट राजस्थान के निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि, इस समझौते का वास्तविक असर सामने आने में लगभग एक वर्ष का समय लगेगा। यूरोपीय संसद से अनुमोदन के बाद ही यह समझौता लागू होगा। उसके बाद राजस्थान के निर्यातकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल पाएगा।



निर्यात किए प्रमुख उत्पाद

राजस्थान से यूरोपीय यूनियन को विभिन्न उत्पादों का निर्यात होता है। इनमें जेम्स एंड ज्वैलरी, हेडीक्राफ्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, रेडिमेड गारमेंट्स, मार्बल और ग्रेनाइट जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों का वार्षिक निर्यात मूल्य लगभग 20,000 करोड़ रुपये आंका जाता है।



एफटीए से होने वाली राहत

राजस्थान हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स जॉइंट फोरम के को-ऑर्डिनेटर नवनीत न झालानी के अनुसार, एफटीए लागू होने के बाद इन सभी उत्पादों को ड्यूटी फ्री एंट्री मिल सकेगी। वर्तमान में इन पर 0 से 65 प्रतिशत तक इंपोर्ट ड्यूटी और करीब 20 प्रतिशत वैट लगता है। हालांकि, एफटीए से केवल इंपोर्ट ड्यूटी में राहत मिलेगी, जिससे निर्यातकों को अपेक्षित बड़ा लाभ मिलने को लेकर कुछ संशय बना हुआ है।



अतिरिक्त उपायों की जरूरत

कई उद्योग संगठनों का मानना है कि एफटीए से केवल इंपोर्ट ड्यूटी में राहत मिलना पर्याप्त नहीं है। केंद्र सरकार को डायरेक्ट इनसेंटिव और अन्य नीतिगत विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। उद्योगों का कहना है कि यह समझौता 'मदर ऑफ ऑल डील्स' साबित हो सकता है।



एफटीए से होगा फायदा

राजस्थान में 18 औद्योगिक क्षेत्रों में 600 से अधिक निर्यात आधारित औद्योगिक इकाइयाँ हैं। इनमें से कई ग़ारमेंट मैन्युफैक्चर्स और एक्सपोर्टर्स पहले ही प्रभावित हो चुके थे, जब अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ने से उत्पादन में गिरावट आई थी। अब, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच इस नई ट्रेड डील से यूरोप से बड़ी मांग निकलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे इन इकाइयों का भविष्य सुरक्षित माना जा सकता है।



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