/sootr/media/media_files/2026/01/25/padam-shree-2026-01-25-20-46-36.jpg)
Photograph: (the sootr)
News In Short
राजस्थान के तीन प्रमुख हस्तियों को गणतंत्र दिवस 2026 को पद्मश्री सम्मान मिलेगा।
गफरुद्दीन मेवाती जोगी को भपंग वादन और पांडुन का कड़ा में योगदान के लिए पद्मश्री।
तगा राम भील ने अलगोजा वादन में विश्वभर में पहचान बनाई।
स्वामी ब्रह्मदेव महाराज ने समाज सेवा में अंध विद्यालय और नेत्र जांच शिविर शुरू किए।
इन कलाकारों और समाजसेवियों ने भारतीय संस्कृति को सशक्त बनाने में योगदान दिया है।
News In Detail
केंद्र सरकार ने तीन प्रमुख राजस्थानियों को पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की है। गफरुद्दीन मेवाती जोगी को पांडुन का कड़ा और भपंग वादन के लिए, तगा राम भील को अलगोजा वादन में उनके योगदान के लिए और स्वामी ब्रह्मदेव महाराज को समाज सेवा में उनके योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया जाएगा। इनकी कला और समाज सेवा ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया।
राजस्थान की 3 हस्तियों को पद्मश्री सम्मान
केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। इस साल राजस्थान से तीन प्रमुख हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। । इन हस्तियों में प्रसिद्ध भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगा राम भील और समाजसेवी ब्रह्मदेव महाराज शामिल हैं। इन व्यक्तित्वों ने अपनी कला, सेवा और संस्कृति के प्रति समर्पण से न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत को गर्वित किया है।
गफरुद्दीन मेवाती जोगी: भपंग वादन और पांडुन का कड़ा
गफरुद्दीन मेवाती जोगी राजस्थान के डीग जिले के निवासी हैं और वर्तमान में अलवर में रहते हैं। वे पांडुन का कड़ा के एकमात्र गायक हैं और भपंग वादक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। गफरुद्दीन को संगीत की शिक्षा अपने पिता से मिली, जो सारंगी के उस्ताद थे। वे 4 साल की उम्र से भपंग बजा रहे हैं और 7 साल की उम्र में पांडुन का कड़ा सीखना शुरू किया।
/filters:format(webp)/sootr/media/media_files/2026/01/25/ghafaruddin-mewati-jogi-2026-01-25-20-33-29.jpg)
उनके पास पांडुन का कड़ा के 2500 से अधिक दोहे याद हैं। उन्होंने कई देशों में अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय लोक संगीत को प्रचारित किया है। गफरुद्दीन को 2024 में राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है।
तगा राम भील: अलगोजा वादन में महारत
तगा राम भील राजस्थान के जैसलमेर जिले के मूलसागर गांव से हैं और प्रसिद्ध अलगोजा वादक हैं। तगा राम की कला ने न केवल भारत, बल्कि यूरोप, रूस, अमेरिका और जापान में भी अपनी पहचान बनाई। वे बचपन में अपने पिता से छुपकर अलगोजा बजाना सीखते थे और महज 10 साल की उम्र में इसमें महारत हासिल कर ली थी। 1981 में जैसलमेर के मरु महोत्सव में मंच प्रदर्शन से उनका सफर शुरू हुआ, और तब से लेकर आज तक उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
तगा राम की कला में सांसों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिसे 'सस्टेन्ड ब्रीदिंग' कहा जाता है। इस तकनीक से वे बिना रुके अपनी धुनों को लगातार बजाते हैं।
/filters:format(webp)/sootr/media/media_files/2026/01/25/tagaram-bhil-2026-01-25-20-29-31.jpg)
स्वामी ब्रह्मदेव महाराज: समाज सेवा में योगदान
/filters:format(webp)/sootr/media/media_files/2026/01/25/social-worker-swami-brahmadev-maharaj-2026-01-25-20-30-52.jpg)
स्वामी ब्रह्मदेव महाराज श्रीगंगानगर के निवासी हैं और श्री जगदंबा अंध विद्यालय के संस्थापक हैं। इस विद्यालय में नेत्रहीन और मूक-बधिर बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। वे 1980 से इस कार्य में समर्पित हैं और 25 सालों से मुफ्त नेत्र जांच शिविर भी आयोजित कर रहे हैं। स्वामी ब्रह्मदेव महाराज ने अपने गुरु संत बाबा करनैल दास जी महाराज से प्रेरणा प्राप्त की और समाज सेवा के क्षेत्र में अपार योगदान दिया।
खबरें यह भी पढ़िए...
केंद्र के प्रगति मॉडल पर शुरू हुआ परफॉर्मेंस रिव्यू पोर्टल, ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य
मध्यप्रदेश और राजस्थान में बर्फीली ठंड के साथ छाया घना कोहरा, छत्तीसगढ़ को मिलेगी राहत
ट्रक ने इनोवा को मारी टक्कर, राजस्थान के 7 लोगों की दर्दनाक मौत
विदेशी मेहमानों को कम रास आया राजस्थान, पर्यटकों की संख्या में 6 फीसदी आई कमी
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us