रंगीन रत्नो से चमकेगा पिंक ख्वाब, भारत-अमरीका व्यापार समझौते से जयपुर को मिलेगी रफ़्तार

भारत-अमरीका व्यापार समझौते से निर्यात में सुधार की उम्मीद जगी है। राजस्थान के पारंपरिक हीरे, रंगीन रत्नों और जवाहरात उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • भारत-अमरीका व्यापार समझौते के तहत रत्नों पर शून्य शुल्क लागू होने से निर्यात में सुधार की उम्मीद जगी है।
  • ज्वैलरी पर अब भी 24% शुल्क का बोझ बना हुआ है, इससे उद्योग को पूरी राहत नहीं मिल पाई है।
  • राजस्थान से अमरीका को हर साल 5000 करोड़ रुपये के रंगीन रत्न निर्यात होते थे।
  • पॉलिश्ड डायमंड के निर्यात में भी पिछले एक साल में 60% से ज्यादा की गिरावट आई है।
  • उद्योग संगठनों का मानना है कि शून्य शुल्क से पॉलिश्ड डायमंड निर्यात को भी मजबूती मिलेगी।

News In Detail

भारत और अमरीका के बीच हुए व्यापार समझौते के तहत अब हीरे और रंगीन रत्नों पर शून्य शुल्क लागू किया गया है। इससे राजस्थान के पारंपरिक जवाहरात उद्योग को नई उम्मीद मिली है। हालांकि, ज्वैलरी पर शून्य शुल्क की मांग अभी भी पूरी नहीं हुई है। इस फैसले से उद्योग के पुनरुत्थान की संभावना नजर आ रही है, खासकर राजस्थान के रंगीन रत्नों के निर्यात के लिए।

शून्य शुल्क का असर 

जयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव अजय काला ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि राजस्थान के रंगीन रत्नों का सबसे बड़ा बाजार अमरीका है। इस नए नियम से निर्यात को फिर से रफ्तार मिलेगी, जो पिछले कुछ वर्षों में धीमा पड़ा था। उन्होंने बताया कि राजस्थान से हर साल लगभग 5000 करोड़ रुपये के रंगीन रत्न अमरीका भेजे जाते थे, लेकिन हाल ही में बढ़े हुए टैरिफ के कारण निर्यात में 40% की गिरावट आ गई थी। अब शून्य शुल्क लागू होने से इस गिरावट को रोकने और निर्यात को फिर से बढ़ाने की उम्मीद है।

ज्वैलरी पर अभी भी शुल्क है

हालांकि, इस निर्णय के बाद रंगीन रत्नों के निर्यात में सुधार की उम्मीद है। लेकिन ज्वैलरी पर अभी भी 6% बेसिक ड्यूटी और 18% टैरिफ यानी कुल 24% शुल्क का बोझ है। जेम्स एंड ज्वैलरी प्रमोशन काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष राजीव जैन ने कहा कि यह निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन ज्वैलरी पर शून्य शुल्क की मांग पूरी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल 27 अगस्त से पहले ज्वैलरी पर केवल 6% ड्यूटी लगती थी। उद्योग को उम्मीद है कि भविष्य में ज्वैलरी पर भी शुल्क कम होगा।

निर्यात में गिरावट और भविष्य की संभावनाएं 

पिछले एक साल में भारत से अमरीका को कट-पॉलिश्ड हीरों का निर्यात 60% से अधिक गिर गया है। अप्रैल से दिसंबर 2024 तक यह निर्यात 3.64 अरब डॉलर था, जो अप्रैल से दिसंबर 2025 में घटकर 1.45 अरब डॉलर रह गया। उद्योग संगठनों का मानना है कि जीरो टैरिफ व्यवस्था से पॉलिश्ड डायमंड निर्यात को भी मजबूती मिलेगी। इससे उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और निर्यात की स्थिति में सुधार होगा।

5,000 करोड़ रुपये का सालाना निर्यात 

राजस्थान के रंगीन रत्नों का अमरीका को सालाना निर्यात करीब 5,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें पिछले कुछ समय में टैरिफ वृद्धि के कारण गिरावट आई थी। अब, शून्य शुल्क लागू होने से इस निर्यात में सुधार की उम्मीद है। पॉलिश्ड डायमंड के निर्यात में भी इस नीति के कारण वृद्धि हो सकती है।

भारत-अमरीका समझौते का राजस्थान पर असर 

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत हीरे और रंगीन रत्नों पर शून्य शुल्क लागू होने से राजस्थान के जवाहरात उद्योग को निर्यात में सुधार और मजबूती मिल सकती है। ज्वैलरी पर अभी भी 6% बेसिक ड्यूटी और 18% टैरिफ यानी कुल 24% शुल्क लागू है, जबकि रंगीन रत्नों पर शून्य शुल्क लागू किया गया है।
पॉलिश्ड डायमंड का निर्यात टैरिफ वृद्धि के कारण 60% से अधिक घटा था। अब जीरो टैरिफ लागू होने से इसे बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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