8 साल, 2 अफसर, ACB से अरेस्ट के बाद भी देवस्थान में वही म्यूजिकल चेयर
समझें क्या है पूरा मामला
- 2018 से देवस्थान विभाग में केवल दो आरएएस अफसरों के बीच ही ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल जारी है।
- 2017 के रिश्वत मामले में फरार चल रहे आकाश रंजन को जुलाई 2024 में एसीबी ने गिरफ्तार किया था।
- हालिया 183 आरएएस अफसरों की सूची में आकाश रंजन की दोबारा एंट्री।
- दागी अफसर को संवेदनशील पद पर पुनः तैनात करने से प्रशासनिक व राजनीतिक हलकों में सवाल उठे।
राजस्थान के देवस्थान विभाग में सहायक आयुक्त जयपुर के पद पर साल 2018 से लगातार दो अफसरों का कब्जा बना हुआ है। स्थिति यह है कि एक जाता है तो दूसरा वापिस आ जाता है।
2018 में आकाश रंजन सहायक आयुक्त-प्रथम के पद पर पदस्थापित हुए थे। 2019 में उनके स्थान पर रतनलाल योगी आ गए। इसके बाद 2021 में फिर से आकाश रंजन आ गए।
2023 में आकाश रंजन भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित हुए तो रतनलाल योगी फिर से आ गए। 2026 की पिछली तबादला सूची में योगी का तबादला हुआ तो बहाल होने के बाद आकाश रंजन फिर से सहायक आयुक्त-प्रथम,देवस्थान के पद पर आ गए हैं।
प्रशासनिक व राजनीतिक हलके में चर्चा
मंगलवार को जैसे ही 183 आरएएस अफसरों की तबादला सूची आई तो इसमें आकाश रंजन को देवस्थान में लगाने पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
एसीबी गिरफ्तार कर चुकी है
एसीबी ने आकाश रंजन को जुलाई 2024 में सात साल पुराने 8000 रुपए की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार कर लिया था। आकाश रंजन उस समय भी देवस्थान विभाग, जयपुर में सहायक आयुक्त के पद पर ही कार्यरत थे। रंजन को 7 साल पुराने यानी 2017 में अलवर के तिजारा में तहसीलदार रहते हुए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। रिश्वतखोरी का यह मामला तत्कालीन वसुधंरा राजे की सरकार में सामने आया था। इस मामले में दलाल और एक लिपिक तो गिरफ्तार हो गए थे,लेकिन आकाश रंजन फरार हो गया था।
एसीबी ने मामले की जांच पूरी करने के बाद फरवरी 2022 में एसीबी कोर्ट अलवर में आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट में बार-बार बुलाए जाने पर भी आरोपी आकाश रंजन हाजिर नहीं हुए थे। इसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था । एसीबी ने गिरफ्तारी वारंट की तामील करते हुए आकाश रंजन को 15 जुलाई 2024 को जयपुर के बड़ पीपली,सीकर रोड स्थित मेरी गोल्ड पब्लिक विद्यालय से गिरफ्तार करके अगले दिन कोर्ट में पेश किया था। गिरफ्तारी के बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
वरिष्ठ पत्रकार व एनयूजेआई के राष्ट्रीय महासचिव राकेश कुमार शर्मा का कहना है कि सरकार को देवस्थान जैसे संवेदनशील विभाग में बेहद सावधानी से ईमानदार अफसर की नियुक्ति करनी चाहिए। 2018 से लगातार दो ही अफसरों को बारी-बारी से तैनात करने से संदेह होना लाजिमी है। विशेषकर दागी अफसर की निलंबन के बाद बहाली होने पर फिर देवस्थान में लगाना संदेह को जन्म देता है। क्यों कि देवस्थान में कई धनपतियों के मामले चल रहे हैं। सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
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