जयपुर का मेयर कौन? मदन राठौड़ बोले- शुक्रवार को तय होगा नाम, शनिवार को नामांकन

Saurabh Mishra | Sept 18, 2026, 15:23 IST
पार्षदों की राय से बनेगा मेयर
जयपुर मेयर के लिए भाजपा आज प्रत्याशी तय करेगी। मदन राठौड़ ने कहा कि पार्षदों की राय से नाम फाइनल होगा। भाजपा के पास 78, कांग्रेस के 57 पार्षद हैं।

5 पॉइंट में समझें पूरा मामला

  • जयपुर नगर निगम के महापौर चुनाव का मामला।
  • शुक्रवार शाम तक फाइनल होगा भाजपा प्रत्याशी का नाम।
  • पार्षदों की राय से चुना जाएगा महापौर का उम्मीदवार।
  • शनिवार को भाजपा प्रत्याशी भरेगा अपना नामांकन।
  • प्रदेश भाजपा अध्य़क्ष बोले- पार्टी में तानशाही नहीं चलती।

राजस्थान की राजधानी के नगर निगम में मेयर की कुर्सी किसे मिलेगी, इसे लेकर भाजपा में मंथन आखिरी दौर में पहुंच गया। पार्टी शुक्रवार को अपने प्रत्याशी का नाम फाइनल कर सकती। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने साफ किया है कि पार्षदों से राय ली जा रही और उसी आधार पर ही उम्मीदवार का नाम फाइनल होगा।



जयपुर में भाजपा प्रत्याशी मेयर पद के लिए शनिवार को नामांकन दाखिल करेगा। इस बीच आधा दर्जन से ज्यादा दावेदारों के नाम चर्चा में हैं। दूसरी तरफ भाजपा के पास बहुमत से सिर्फ दो पार्षद ज्यादा होने के कारण पार्टी की नजर निर्दलीयों पर भी है।



पार्षदों की राय से चुना जाएगा मेयर प्रत्याशी: मदन राठौड़

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मेयर प्रत्याशी के चयन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी तरह की डिक्टेटरशिप नहीं चलती। पार्षदों की राय ली जा रही। उनकी राय के आधार पर ही मेयर उम्मीदवार चुना जाएगा। राठौड़ के मुताबिक आज नाम फाइनल कर लिया जाएगा। इसके बाद शनिवार को भाजपा की ओर से प्रत्याशी का नामांकन दाखिल कराया जाएगा।



जयपुर महापौर की रेस में भाजपा में कई नाम

जयपुर नगर निगम के मेयर के लिए भाजपा में कई दावेदार सामने आ रहे। इनमें सुनील कोठारी, पुनीत कर्णावट, शैलेन्द्र भार्गव, विमल अग्रवाल, भवानी, अनुराधा माहेश्वरी और विजय अग्रवाल के नाम चर्चा में हैं।



अब पार्टी के सामने इनमें से एक नाम पर सहमति बनाने की चुनौती है। इसके साथ ही दूसरे दावेदारों को भी साधना होगा। हालांकि अभी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया है।



भाजपा के 78 और कांग्रेस के 57 उम्मीदवार जीते

जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं। सभी वार्डों के नतीजे अब साफ हो चुके हैं। भाजपा के 78 पार्षद जीते हैं। कांग्रेस के पास 57 और निर्दलीयों के पास 15 सीटें हैं। बहुमत के लिए 76 पार्षद चाहिए। यानी भाजपा बहुमत से केवल दो सीट आगे है। चार वार्डों में री-पोलिंग के बाद कांग्रेस ने सभी चार सीटें जीती थीं। इसके बाद कांग्रेस का आंकड़ा 53 से बढ़कर 57 हो गया। भाजपा 78 पर ही रही।



कांग्रेस और निर्दलीयों का संख्या बल जोड़ें तो यह 72 होता है। इसी वजह से मेयर चुनाव से पहले दोनों तरफ पार्षदों को साधने की कोशिशें तेज हैं।



भाजपा की नजर निर्दलीयों पर

भाजपा का दावा है कि करीब 50 प्रतिशत निर्दलीय पार्षद उसके संपर्क में हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके सामने क्रॉस वोटिंग का खतरा नहीं है।हालांकि यह भाजपा का दावा है। मेयर चुनाव में पार्षद किसके पक्ष में मतदान करते हैं, इसकी तस्वीर मतदान के बाद ही साफ होगी।



नगर निगम में भाजपा के पास अपने दम पर बहुमत जरूर है, लेकिन यह अंतर सिर्फ दो सीटों का है। ऐसे में पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ निर्दलीयों का समर्थन हासिल करने पर भी जोर दे रही है।



अलग-अलग समाजों ने बीजेपी पर बढ़ाया दबाव

जयपुर में मेयर प्रत्याशी के नाम की घोषणा से पहले राजस्थान भाजपा के सामने सामाजिक समीकरण को साधना भी एक बड़ा मुद्दा है। वैश्य, ब्राह्मण और अग्रवाल समाज की ओर से मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के सामने प्रतिनिधित्व की मांग रखी गई है।



अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेशाध्यक्ष एलटी शर्मा का कहना है कि राजस्थान में ब्राह्मण समाज की आबादी करीब 22 से 23 फीसदी है। यह उनका दावा है। उन्होंने कहा कि जयपुर में इस बार समाज ने भाजपा को बढ़-चढ़कर वोट दिया है। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से किसी अनुभवी ब्राह्मण पार्षद को मेयर बनाने की मांग की है।



30 साल से ब्राह्मण मेयर नहीं होने का दावा

एलटी शर्मा का दावा है कि पिछले 30 साल से जयपुर में ब्राह्मण समाज से कोई मेयर नहीं बना है। इसी आधार पर संगठन इस बार मेयर पद पर समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग कर रहा। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व को करना है। पार्टी फिलहाल पार्षदों की राय और दूसरे समीकरणों पर मंथन कर रही है।



अब सबसे ज्यादा नजर भाजपा के प्रत्याशी पर है। पार्टी के पास बोर्ड बनाने के लिए जरूरी संख्या है, लेकिन दावेदारों की लंबी सूची और केवल दो सीट का बहुमत मेयर चुनाव को अहम बना रहा। प्रत्याशी का नाम सामने आते ही जयपुर नगर निगम की आगे की सियासी तस्वीर और साफ हो जाएगी।



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