जयपुर का UNESCO विश्व धरोहर तमगा संकट में, HC ने कहा परकोटे से हटें अवैध निर्माण
समझें क्या है पूरा मामला
- विरासत का संरक्षण,300 साल पुराने परकोटे के पारंपरिक और ऐतिहासिक स्वरूप को बचाने पर ज़ोर।
- प्रथम चरण की कार्रवाई,किशनपोल, चौड़ा रास्ता, जौहरी बाजार और चांदपोल मार्ग पर रोके जाएंगे अवैध निर्माण।
- निगम आयुक्त को निर्देश, नगर निगम कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने का आदेश।
- नियमों का उल्लंघन,आवासीय पट्टे पर बिना अनुमति बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर निर्माण पर जनहित याचिका।
गुलाबी नगरी (पिंक सिटी) के विरासत और ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए राजस्थान हाई कोर्ट (जयपुर पीठ) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने नगर निगम, जयपुर को परकोटा क्षेत्र (Walled City) में बिना अनुमति चल रहे सभी अवैध निर्माणों को तुरंत रोकने का निर्देश दिया है।
यह आदेश जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की बैंच ने याचिकाकर्ता जितेंद्र शर्मा की जनहित याचिका पर दिए।
विरासत का संरक्षण
अदालत ने टिप्पणी की कि जयपुर का परकोटा क्षेत्र लगभग 300 वर्ष पूर्व बसाया गया था। यह दुनिया के बेहतरीन हेरिटेज शहरों में गिना जाता है। इसलिए अवैध निर्माणों पर रोक लगाना और इसके पारंपरिक स्वरूप को बहाल करना बेहद जरूरी है।
पहले चरण में यहां करो कार्रवाई
हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पहले चरण में शहर के मुख्य व्यावसायिक एवं व्यस्त मार्गों पर जारी अवैध निर्माणों पर तुरंत रोक लगाई जाए। इनमें किशनपोल बाजार,चौड़ा रास्ता,जौहरी बाजार और चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक।
नगर निगम आयुक्त को सख्त निर्देश
कोर्ट ने जयपुर नगर निगम आयुक्त को मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने को कहा है। कोर्ट ने नगर निगम की अनुमति के बिना चल रहे सभी निर्माण कार्यों को तुरंत बंद कराने का आदेश दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई सात सितंबर को होगी।
यह कहा है याचिका में
याचिकाकर्ता के एडवोकेट उमेश शर्मा ने कोर्ट को बताया कि चौकड़ी विश्वेश्वर जी,चौड़ा रास्ता स्थित पगड़ी बंध हाउस, मकान नंबर 1812 पर अवैध रूप से व्यावसायिक परिसर का निर्माण हो रहा है।
यह विकास कार्य नगर निगम हेरिटेज द्वारा दी गई स्वीकृतियों के विपरीत और जयपुर नगर निगम हेरिटेज (चारदीवारी) विरासत संरक्षण एवं सुरक्षा उप-नियम, 2020 के स्पष्ट उल्लंघन में हो रहा है।
आवासीय संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग
याचिकाकर्ता का कहना है कि हालांकि इस संपत्ति के पास आवासीय फ्रीहोल्ड पट्टा है। फिर भी भूमि रूपांतरण या आवश्यक मंजूरियों के बिना व्यावसायिक गतिविधियां और बहुमंजिला ढांचे का विस्तार किया जा रहा है।
स्थापत्य विरासत के लिए खतरा
याचिका में इस बात पर जोर दिया है कि पुरानी दुकानों के ऊपर बिना अनुमति के कंक्रीट, आरसीसी पिलर और ईंटों की दीवारों का निर्माण किया जा रहा है। यह निर्माण कार्य यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर क्षेत्र में शामिल चारदीवारी के एक समान दृश्य और संरचनात्मक स्वरूप को नुकसान पहुंचा रहा है।
पड़ोसियों की सुरक्षा पर संकट
याचिका में बताया है कि इस संबंध में स्थानीय निवासी व वार्ड पार्षद तक शिकायत कर चुके हैं। भारी निर्माण से आसपास की पुरानी ऐतिहासिक इमारतों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल निरीक्षण और चेतावनियों के बावजूद कोई प्रवर्तन कार्रवाई नहीं की गई है।
किशनपोल जोन के उपायुक्त ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के तहत नोटिस जारी कर संपत्ति स्वामियों को बिना स्वीकृति के हो रहे निर्माण को बंद करने को कहा था।
आरटीआई में प्राप्त सूचना से पता चला है कि भूखंड के ग्राउंड फ्लोर,प्रथम और द्वितीय तल पर स्वीकृत आवासीय मानचित्रों से अधिक निर्माण किया है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि मुख्य सचिव, स्वायत्त शासन विभाग, जिला कलेक्टर और जयपुर पुलिस आयुक्त सहित शीर्ष अधिकारियों को औपचारिक प्रतिनिधित्व भेजने के बाद भी अवैध ढांचों को हटाने या ध्वस्त करने के लिए कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए हैं।
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