10 किलो चांदी के गहने और 1 करोड़ का महल, राधा गाय क्यों है चर्चा में?
ऐसे समझें पूरा मामला
- जालोर की एक गाय अपने शाही अंदाज के कारण सुर्खियों में।
- विशेष मौकों पर 10 किलो चांदी के आभूषणों से होता है शाही श्रृंगार।
- गाय के लिए एक करोड़ की लागत से बनवाया जा रहा राधा महल।
- गाय की देखभाल के लिए 7 कर्मचारियों की टीम हर वक्त तैनात।
मुकेश सोनी@जालोर
राजस्थान में जालोर की एक गाय इन दिनों चर्चा में हैं। जालोर के धानोल गांव में कांकरेज नस्ल की साधारण सी गाय राधा हर किसी की जुबान पर छा गई है।
आप सोच रहे हैं कि यह गाय सिर्फ अपनी नस्ल या दूध की वजह से चर्चा में है तो आप बिल्कुल गलत हैं। राधा गाय के चर्चा में होने की वजह उसका शाही अंदाज है।
10 किलो चांदी के आभूषण और शाही श्रृंगार
राधा आम गायों की तरह साधारण जीवन नहीं जीती। अष्टमी या धार्मिक अवसरों पर उसे किसी दुल्हन की तरह सजाया जाता है।
उसके लिए विशेष रूप से 10 किलो चांदी के आभूषण बनवाए गए हैं। जब राधा गले में भारी कंठी, सिर पर चांदी का हार और रेशमी चुनरी ओढ़कर बाहर निकलती है तो देखने वाले हैरान रह जाते हैं।
1 करोड़ की लागत से बन रहा राधा महल
कंस्ट्रक्शन व्यवसायी नरेंद्र पुरोहित अपनी इस गाय के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। घर के ठीक सामने 200 गज जमीन पर करीब 1 करोड़ रुपए से दो मंजिला राधा महल बनवाया जा रहा है। राधा महल की ग्राउंड फ्लोर सिर्फ राधा के घूमने, विश्राम करने और चारा खाने के लिए होगा। अपर फ्लोर में साधु-संतों के ठहरने, हवन-पूजन और श्रद्धालुओं के रुकने के कमरे तैयार किए जा रहे हैं।
7 लोगों की स्पेशल टीम और परिवार जैसा दर्जा
राधा के भोजन, स्वास्थ्य, स्नान और साफ-सफाई की देखरेख के लिए 7 कर्मचारियों की टीम हर वक्त तैनात रहती है।
पुरोहित परिवार में लगभग 25 गायें हैं, लेकिन राधा की बात ही अलग है। परिवार का नियम है कि सुबह और शाम राधा के दर्शन व पूजा करने के बाद ही कोई सदस्य भोजन ग्रहण करता है।
वर्ष 2021 में सांचौर की पथमेड़ा गोशाला में राधा का धार्मिक रीति-रिवाजों से एक नंदी से प्रतीकात्मक विवाह कराया गया था।
इस अनोखी शादी में पूरा धानोल गांव बाराती बना था। विवाह के बाद गाय व नंदी को कई धार्मिक तीर्थ स्थलों के दर्शन भी कराए गए थे।
भाग्य बदलने की अटूट आस्था
नरेंद्र पुरोहित बताते हैं कि वर्ष 2019 में जब राधा उनके घर आई, उसके बाद से उनके जीवन में अप्रत्याशित सफलता मिली। वे इसे राधा का आशीर्वाद मानते हैं।
हालांकि, उनके घर में गौसेवा की परंपरा पीढ़ियों पुरानी है। उनकी मां विवाह के समय अपने साथ गाय लेकर आई थीं। इसके बाद परिवार में यह सेवा भाव और गहरा होता गया।
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