मध्य प्रदेश से राजस्थान पहुंचे दो चीते, एनटीसीए ने की इंटर-स्टेट चीता कॉरिडोर की पैरवी

Ashish Bhardwaj | Mar 09, 2026, 13:08 IST
Photograph: (the sootr)
कूनो नेशनल पार्क के दो चीतों का मूवमेंट राजस्थान में पाया गया। चीतों की राजस्थान में आवाजाही के बाद एनीटीसीए ने चीता संरक्षण कॉरिडोर की पैरवी की है। यह कॉरिडोर राजस्थान और मध्य प्रदेश के 15 जिलों को कवर करेगा।

News In Short

  • मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से दो चीते राजस्थान के बारां जिले में पहुंचे।
  • दोनों चीतों का मूवमेंट फिलहाल पार्वती नदी के दोनों किनारों पर मौजूद।
  • इससे 17,000 वर्ग किलोमीटर के कूनो–गांधी सागर चीता कॉरिडोर को मिला समर्थन।
  • वर्तमान में कूनो में कुल 48 चीते मौजूद, जिनमें से 28 शावक यहीं जन्मे।
  • NTCA ने यह रिपोर्ट पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजी।

News In Detail

मध्य प्रदेश में कूनो नेशनल पार्क के दो चीतों का राजस्थान के बारां जिले में मूवमेंट पाया गया। इस बीच, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने कहा है कि यह मूवमेंट कूनो–गांधी सागर चीता इंटर-स्टेेट संरक्षण कॉरिडोर की जरूरत को और मजबूत करता है। यह कॉरिडोर 17,000 वर्ग किलोमीटर का प्रस्तावित है। कॉरिडोर राजस्थान के सात जिलों और मध्य प्रदेश के आठ जिलों को कवर करेगा।



मूवमेंट पर लगातार नजर

NTCA के अनुसार कूनो के चीता KP-2 और KP-3 की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। KP-2 को राजस्थान के बारां जिले के मांगरोल रेंज में ट्रैक किया गया है, जबकि KP-3 ने कूनो नेशनल पार्क से करीब 60–70 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद बांझ अमली कंजर्वेशन रिजर्व में प्रवेश किया है।



पार्वती नदी के किनारे पर मौजूद

NTCA ने इस अंतरराज्यीय आवाजाही को देश के प्रोजेक्ट चीता की एक महत्वपूर्ण सफलता बताया। प्राधिकरण के अनुसार वह लगातार दोनों राज्यों के वन विभागों के साथ समन्वय कर रहा है। चीतों की 24×7 जीपीएस तथा रेडियो कॉलर के जरिए निगरानी की जा रही है। एनटीसीए ने बताया कि दोनों चीते फिलहाल पार्वती नदी के दोनों किनारों पर लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद हैं।



घूमना और नए क्षेत्र की तलाश चीतों का स्वाभाविक व्यवहार

NTCA की रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े भू-भाग में लंबी दूरी तक घूमना और नए क्षेत्र की तलाश करना चीतों का स्वाभाविक व्यवहार है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान सीमाओं को पार करते हुए लंबी दूरी तक फैलाव करना चीतों का स्वाभाविक क्षेत्रीय व्यवहार है। प्रोजेक्ट चीता एक्शन प्लान में भी कूनो–गांधी सागर मेटा-पॉपुलेशन क्षेत्र के भीतर अंतरराज्यीय आवाजाही की संभावना को पहले से ही शामिल किया गया है।



कूनो में हैं 48 चीते

NTCA ने अपनी यह रिपोर्ट पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजी है। इसमें बताया गया है कि वर्तमान में कूनो में कुल 48 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 28 शावक यहीं जन्में हैं।



क्या है कूनो-गांधी सागर कॉरिडोर

कूनो-गांधी सागर अंतरराज्यीय वन्यजीव कॉरिडोर मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क और मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य को जोड़ने वाली एक 17,000 वर्ग किमी की प्रस्तावित परियोजना है। यह कॉरिडोर राजस्थान और मध्य प्रदेश में फैला होगा। इसका उद्देश्य चीतों को स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से विचरने के लिए एक बड़ा व प्राकृतिक आवास प्रदान करना है।



विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों की यह आवाजाही प्रस्तावित कूनो-गांधी सागर वन्यजीव कॉरिडोर के महत्व को और अधिक साबित करती है। इससे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और उनके प्राकृतिक आवास के विस्तार में मदद मिलेगी।



ये भी पढ़े:-

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती: सवा लाख अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ सत्यापन में देरी, अब 11 मार्च से शुरू होगी प्रक्रिया



मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में गर्मी का आलम, लू जैसी तपन! मौसम विभाग ने दी चेतावनी



गोवा की काजू और राजस्थान की केसर कस्तूरी अब एमपी में मिलेगी, हमारी देसी महुआ जाएगी बाहर



यूपीएससी में सात साल बाद 'राजस्थानी' टॉपर, सियासत में भ्रष्टाचार का उबाल और सदन में मर्यादा की जंग





Tags:
  • कूनो नेशनल पार्क
  • नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी
  • गांधी सागर अभयारण्य
  • दोनों चीतों का मूवमेंट
  • जलवायु परिवर्तन मंत्रालय