शादी में लिया दहेज, नौकरी के वक्त बोला झूठ, अब पत्नी की शिकायत पर झालावाड़ के लेक्चरर सस्पेंड
News In Short
- झालावाड़ के व्याख्याता दीपक कुमार शर्मा को दहेज का झूठा हलफनामा देने पर निलंबित किया गया।
- दीपक शर्मा ने शादी में दहेज लिया था, लेकिन विभाग को झूठा शपथ पत्र दिया था।
- पत्नी की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने प्राथमिक जांच में व्याख्याता को पाया दोषी।
- जांच अवधि के दौरान वे संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा, चूरू के मुख्यालय में देंगे सेवाएं।
- दहेज के खिलाफ झूठा शपथ पत्र देने वाले अन्य सरकारी कर्मचारियों पर हो सकती है सख्त कार्रवाई।
News In Detail
राजस्थान में सरकारी नौकरी में शपथ पत्र को हल्के में लेने वालों के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त उदाहरण पेश किया है। झालावाड़ जिले में भवानी मंडी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बनी में राजनीतिक विज्ञान के व्याख्याता दीपक कुमार शर्मा को उनकी पत्नी की शिकायत के बाद निलंबित कर दिया गया है। नौकरी लेते समय दीपक कुमार शर्मा ने झूठा हलफनामा दिया कि उन्होंने शादी में दहेज नहीं लिया, जबकि उनकी पत्नी ने दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा रखा है।
क्या है पूरा मामला?
दीपक कुमार शर्मा ने 2 मार्च 2024 को अपनी प्रथम नियुक्ति के समय विभाग में एक शपथ पत्र प्रस्तुत किया था। इस पत्र में उन्होंने साफ तौर पर लिखा था कि उनकी शादी 3 मई 2023 को वंदना शर्मा से हुई थी। उन्होंने विवाह में किसी भी प्रकार का कोई दहेज नहीं लिया था। यह शपथ पत्र राजस्थान दहेज प्रतिषेध नियम, 2004 के तहत अनिवार्य होता है। लेकिन, असलियत कुछ और ही निकली। व्याख्याता की पत्नी वंदना शर्मा ने 10 जुलाई 2025 को कुण्डेरा थाने में दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा दिया। यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
विभाग ने की प्राथमिक जांच, खुली पोल
जब इस मामले की जानकारी शिक्षा विभाग को लगी, तो उन्होंने तुरंत प्राथमिक जांच शुरू कर दी। जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि व्याख्याता ने वास्तव में दहेज लिया था और फिर भी नौकरी के समय झूठा शपथ पत्र दाखिल किया। यह सरकारी सेवा में नैतिकता और सत्यनिष्ठा का गंभीर उल्लंघन माना गया।
इसके बाद निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने आदेश जारी करते हुए दीपक कुमार शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आदेश में यह भी कहा गया कि जांच अवधि के दौरान वे संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा, चूरू के मुख्यालय में अपनी सेवाएं देंगे।
सख्त रुख: अब झूठ बर्दाश्त नहीं
इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, खासकर उनमें जिन्होंने इसी तरह के शपथ पत्र दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब ऐसे सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, सरकारी नौकरी में शपथ पत्र सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है। यह कानूनी दस्तावेज है। झूठा हलफनामा देना गंभीर अपराध है।
क्यों जरूरी है दहेज न लेने का शपथ पत्र?
राजस्थान सरकार की किसी भी सरकारी नौकरी (जैसे सफाई कर्मचारी, शिक्षक, आरपीएससी या आरएसएसबी परीक्षाओं के माध्यम से) में नियुक्ति के समय विवाह/दहेज शपथ पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होता है। इसका उद्देश्य दहेज प्रथा पर अंकुश लगाना और सरकारी कर्मचारियों को इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जवाबदेह बनाना है। यदि बाद में पता चलता है कि कर्मचारी ने झूठा शपथ पत्र दिया है, तो उस पर निलंबन से लेकर नौकरी से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।
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