टक्कर के बाद भी नहीं खुले एयरबैग, कोर्ट ने कार कंपनी पर ठोका 2 लाख का हर्जाना
समझें क्या है पूरा मामला
- एयरबैग नहीं खुलने को कंज्यूमर कोर्ट ने उत्पाद दोष माना।
- मारुति देगी ग्राहक को 2 लाख रुपए का हर्जाना
- डीलर को 25 हजार परिवाद खर्च देना होगा।
- एयरबैग नहीं खुलने से कार मालिक को लगी थी चोट।
- 45 दिन में डीलर को करना होगा भुगतान।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में सड़क हादसे के दौरान कार के एयरबैग नहीं खुलने पर उपभोक्ता कोर्ट ने मारुति सुजुकी को जिम्मेदार माना। कार सामने से सांड से टकराई और पलट गई, लेकिन दोनों एयरबैग नहीं खुले। हादसे में कार मालिक की रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी।
कोर्ट ने एयरबैग नहीं खुलने को उत्पादकीय दोष मानते हुए मारुति सुजुकी को 2 लाख रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया है। वहीं, डीलर के.पी. ऑटोमोटिव्स को 25 हजार रुपए परिवाद खर्च देना होगा।
कार कंपनी पर जयपुर की कंज्यूमर कोर्ट ने ठोका जुर्माना
परिवादी पीयूष शर्मा की ओर से एडवोकेट विपुल शर्मा ने मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीयूष ने अगस्त 2017 में मारुति डिजायर खरीदी थी।कार खरीदने के बाद से ही इसमें कई तरह की परेशानी आने लगी। आरोप था कि बैलेंसिंग सही नहीं होने के कारण करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर कार डगमगाने लगती थी।
पहली फ्री सर्विस के दौरान इसकी शिकायत डीलर से की गई। उन्हें बताया गया कि सर्विस के बाद समस्या ठीक हो जाएगी, लेकिन परेशानी बनी रही।
कार की बैलेंसिंग को लेकर डीलर से ग्राहक ने की थी शिकायत
कार की दूसरी फ्री सर्विस के समय भी डीलर को बैलेंसिंग और डगमगाने की समस्या बताई गई। इसके बावजूद शिकायत दूर नहीं हुई। परिवादी का कहना था कि बार-बार जानकारी देने के बाद भी कार में आ रही परेशानी को ठीक नहीं किया गया।
सांड से टकराकर पलटी कार, नहीं खुले एयरबैग
1 जनवरी 2018 को कार हाईवे पर चल रही थी। इसी दौरान सामने आए सांड से उसकी टक्कर हो गई। टक्कर सामने की तरफ हुई और कार पलट गई।इसके बावजूद कार में सामने लगे दोनों एयरबैग नहीं खुले। हादसे में पीयूष शर्मा की रीढ़ की हड्डी में चोट आई। इसी को लेकर उन्होंने उपभोक्ता कोर्ट में मामला दायर किया।
एयरबैग के पार्ट बदलने के लिए बुलाई गई थीं दूसरी कारें
परिवादी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि मारुति सुजुकी ने एयरबैग से जुड़ी कमी के कारण करीब 1279 कार मालिकों से संपर्क किया था। इन कारों में एयरबैग से जुड़े पार्ट बदले गए थे। परिवादी का दावा था कि कंपनी ने उनसे कभी संपर्क नहीं किया। कार में परेशानी की शिकायत करने के बावजूद कमियों को भी ठीक नहीं किया गया।
जिला उपभोक्ता कोर्ट ने माना उत्पादकीय दोष
जयपुर जिला उपभोक्ता अदालत प्रथम ने मामले की सुनवाई के बाद सामने से टक्कर के बावजूद एयरबैग नहीं खुलने को मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट माना। अध्यक्ष डॉक्टर सुबेसिंह यादव की कोर्ट ने मारुति सुजुकी को शारीरिक और मानसिक परेशानी सहित क्षतिपूर्ति के रूप में 2 लाख रुपए देने का आदेश दिया।
इसके साथ ही डीलर केपी ऑटोमोटिव्स को 25 हजार रुपए परिवाद खर्च के रूप में देने को कहा गया है। कोर्ट ने यह पूरी राशि 45 दिन के भीतर परिवादी को देने का निर्देश दिया है।
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