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Photograph: (the sootr)
News In Short
- पूर्व विधायक बलजीत यादव पर क्रिकेट और बैडमिंटन किट घोटाले का आरोप।
- आरोप है कि यादव ने MLA-LAD फंड से 2.87 करोड़ रुपए की हेराफेरी की।
- ईडी ने जयपुर, दौसा और रेवाड़ी में 9 जगहों पर सर्च ऑपरेशन किया।
- जांच में घटिया खेल सामग्री खरीदने और काले धन का इस्तेमाल करने के सबूत मिले हैं।
- बलजीत यादव ने फर्जी कंपनियों के जरिए घोटाले को अंजाम दिया।
News In Detail
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने क्रिकेट और बैडमिंटन किट घोटाले में एक अहम खुलासा किया है। बहरोड़ से पूर्व विधायक बलजीत यादव पर आरोप है कि उन्होंने एमएलए-लैड (MLA-LAD) फंड से करीब 2.87 करोड़ रुपये की हेराफेरी की हैं। इन राशि को उन्होंने अपने रिश्तेदारों के खातों में डायवर्ट किया। इस फंड का एक हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में भी इस्तेमाल किया गया।
गिरफ्तारी और पूछताछ
ईडी ने मंगलवार रात को बलजीत यादव को अलवर के शाहजहांपुर टोल प्लाजा (दिल्ली-जयपुर हाईवे) से हिरासत में ले लिया था। फिर उन्हें जयपुर स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए लाया। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पीएमएलए (PMLA) एक्ट के तहत तीन दिन की रिमांड पर लिया गया है।
खेल किट घोटाला
साल 2021-22 में बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के करीब 32 सरकारी स्कूलों के लिए बैडमिंटन और क्रिकेट किट खरीदी गई थी। इसके लिए MLA-LAD फंड से 3.72 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। जांच में यह सामने आया कि इस रकम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया था। फंड का अधिकांश हिस्सा घटिया खेल सामग्री खरीदने और रिश्वत में खर्च किया गया।
सर्च ऑपरेशन और साक्ष्य
ईडी ने 24 जनवरी 2025 को जयपुर, दौसा और रेवाड़ी में नौ जगहों पर छापे मारे हैं। इस दौरान 31 लाख रुपये नकद, नकली दस्तावेज़, रिकॉर्ड और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। इन दस्तावेजों से MLA-LAD फंड की मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं।
काले धन का इस्तेमाल
ईडी की जांच से कई अहम् खुलासे सामने आये हैं। पूर्व विधायक ने इस फंड का इस्तेमाल न केवल खेल के लिए किया, बल्कि इन पैसों को कैश के रूप में निकाल कर विभिन्न प्रॉपर्टी खरीदने में भी लगाया। जांच में यह पाया गया कि फंड का अधिकांश हिस्सा उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों के खातों में डायवर्ट किया गया था।
कंपनियों का गठन
जांच में यह भी पाया गया कि मेसर्स बालाजी कम्प्लीट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और अन्य कंपनियों को फर्जी तरीके से स्पोर्ट्स इक्विपमेंट की खरीद में शामिल किया गया था। इन कंपनियों का स्पोर्ट्स इक्विपमेंट की ट्रेडिंग का कोई पूर्व अनुभव नहीं था और उन्हें जानबूझकर टेंडर में शामिल किया गया था। ताकि वे इस घोटाले का हिस्सा बन सकें।
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