मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बांधवगढ़ से 5 बाघ लाने की तैयारी, बाघों को करना होगा 15 घंटो का सफर

Ashish Bhardwaj | Jan 20, 2026, 12:41 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के मुकंदरा टाइगर रिजर्व में पांच बाघों को मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ से सड़क मार्ग से लाया जाएगा। कोटा से बांधवगढ़ की दुरी करीब 700 किलोमीटर हैं। सरकार से हेलिकॉप्टर की अनुमति नहीं मिलने के कारण अब सड़क मार्ग चुना गया हैं।

News In Short

  • मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघाें को बांधवगढ़ से सड़क मार्ग से लाया जाएगा क्योंकि हेलिकॉप्टर की अनुमति नहीं मिली है।
  • बाघिन को 'रेडियो कॉलर' के जरिए ट्रैक किया जाएगा ताकि उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।
  • पिछले ट्रायल में 'रामगढ़' में बाघिन को हेलिकॉप्टर से लाने में तकनीकी समस्या आई थी, जिससे विवाद हुआ था।
  • 'इंटरस्टेट रिलोकेशन योजना' के तहत 5 बाघिनों को मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से लाया जाएगा।
  • अरुणप्रसाद चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन, ने कहा कि बाघिन की शिफ्टिंग के बाद उसके स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी।

News In Detail

राजस्थान के मुकंदरा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन को मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है। इस शिफ्टिंग को सड़क मार्ग से किया जाएगा क्योंकि सरकार से हेलिकॉप्टर की अनुमति नहीं मिल पाई है। पिछले कुछ समय पहले पेंच नेशनल पार्क से बाघों को हेलिकॉप्टर से लाया गया था। लेकिन इस बार सड़क मार्ग को प्राथमिकता दी जा रही है। कोटा से बांधवगढ़ की दूरी 700 किलोमीटर से अधिक है। इस यात्रा में बाघिन को 15 से 20 घंटे का समय लग सकता है।



रेडियो कॉलर से की जा रही हैं निगरानी

बाघिन के लिए पहले से रेडियो कॉलर भेजे जा चुके हैं। इन रेडिओ कॉलर से बाघों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सकेगी। बाघिन के शिफ्ट होने के बाद उनकी स्थिति और आदतों का अध्ययन किया जाएगा। यह शिफ्टिंग फरवरी के पहले हफ्ते में की जाएगी। बांधवगढ़ में भी इस शिफ्टिंग की तैयारियां की जा रही हैं ताकि बाघिन को नई जगह पर आसानी से समायोजित किया जा सके।



सड़क मार्ग से होगी शिफ्टिंग

पिछली बार रामगढ़ में बाघिन को हेलिकॉप्टर से लाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए पहले सेना के हेलिकॉप्टर का ट्रायल किया गया था। लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए हेलिकॉप्टर को जयपुर में लैंड करना पड़ा था। जिससे काफी विवाद हुआ था। इस बार इस तरह की कंट्रोवर्सी से बचने के लिए सड़क मार्ग से शिफ्टिंग की जा रही है।



इंटरस्टेट रिलोकेशन योजना

पूर्व डीएफओ दौलत सिंह शक्तावत के अनुसार, बाघों की नस्ल सुधारने के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से पांच बाघिनों को लाने की योजना है। इन बाघिनों को अलग-अलग चरणों में पांच प्रमुख टाइगर रिजर्व से लाया जाएगा, जिनमें पेंच टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और माधव टाइगर रिजर्व शामिल हैं।



रेडियो कॉलर का महत्व और भविष्य की योजना

पशुपालन विभाग के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन अरुणप्रसाद ने कहा कि बाघिन को लाने के बाद उनकी निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। यह कॉलर बाघिन की गतिविधियों और उनके स्वास्थ्य की निगरानी करेगा। शिफ्टिंग की प्रक्रिया के बाद, उनकी स्थिति के आधार पर भविष्य में और भी निर्णय लिए जाएंगे।



क्यों बदली जाती है बाघों की लोकेशन

बाघों के संरक्षण और नस्ल सुधार के लिए विभिन्न क्षेत्रों से बाघों को एक दूसरे के टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जाता है। इससे जीन पूल में विविधता आती है और बाघों की नस्ल में सुधार होता है। बाघों की शिफ्टिंग से पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखा जाता है। कभी-कभी बाघों को नए स्थानों पर शिफ्ट करने से उनका शिकार करने के तरीके और वन्य जीवन पर उनके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है।



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