नरेश मीणा की प्रोपर्टी का मांगा रिकॉर्ड, 10 दिन पहले जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट
समझें क्या है पूरा मामला
- टोंक थप्पड़कांड के आरोपी नरेश मीणा की जमानत रद्द हो चुकी है।
- कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
- पुलिस ने उनकी चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा है।
- यह रिकॉर्ड एससी-एसटी विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
- सहयोगियों ने कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया है।
राजस्थान के प्रसिद्ध एसडीएम थप्पड़कांड के आरोपी नरेश मीणा की जमानत हाल ही में रद्द हुई थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया था। अब पुलिस ने उनकी चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा है। यह रिकॉर्ड एससी, एसटी विशेष अदालत टोंक में पेश किया जाएगा। उनके सहयोगियों ने इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया है।
पुलिस ने क्यों मांगा संपत्ति रिकॉर्ड
नगरफोर्ट थानाधिकारी राजेंद्र ताड़ा की ओर से एक पत्र भेजा गया है। यह पत्र ग्राम पंचायत नयागांव उर्फ नानवता के सरपंच प्रशासक को भेजा गया है।
पत्र में कहा गया है कि टोंक कोर्ट ने अभियुक्त नरेश मीणा का चल-अचल संपत्ति रिकॉर्ड मांगा है। नरेश मीणा, कल्याण सिंह मीणा के पुत्र हैं और नयागांव उर्फ नानवता, थाना मोठपुर, जिला बांरा के निवासी हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यह रिकॉर्ड इसलिए मांगा जा रहा है ताकि इसे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
कोर्ट ने क्यों जारी किया गिरफ्तारी वारंट
समरावता थप्पड़कांड के आरोपी नरेश मीणा को 13 जुलाई 2025 को राजस्थान हाई कोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी। आरोप है कि उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया।
इसी आधार पर नगरफोर्ट थाना पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक रामावतार सोनी के जरिए एससी, एसटी कोर्ट में जमानत रद्द करने का आवेदन दिया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस के तथ्यों को आधार मानते हुए जमानत रद्द कर दी।
इसके बाद कोर्ट ने नरेश मीणा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए थे।
सहयोगी ने लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप
पुलिस की ओर से अदालत में दिए गए आवेदन में बताया गया कि पीपलोदी के सरकारी स्कूल की छत गिरने से छात्रों की मौत के बाद हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान नरेश मीणा को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी।
वहीं नरेश मीणा के सहयोगी राकेश बैंसला का कहना है कि सरकार उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबरा गई है। उनके अनुसार पंचायत चुनाव से पहले नरेश मीणा को जेल में रखकर किसानों और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है।
बैंसला ने आरोप लगाया कि पहले स्पेशल लोक अभियोजक नियुक्त कर जमानत रद्द कराई गई। अब उनकी संपत्ति का रिकॉर्ड मंगवाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे न्यायपालिका के आदेश का सम्मान करते हैं और उन्हें भरोसा है कि अदालत नरेश मीणा को न्याय देगी।
पुलिस या प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या है थप्पड़कांड और समरावता हिंसा
यह पूरा मामला 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान शुरू हुआ था। समरावता गांव में वोटिंग के दिन नरेश मीणा ने उपखंड अधिकारी अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था।
इस घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। इसके बाद उनके समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया और वाहनों में आग लगा दी। समर्थकों ने नरेश मीणा को पुलिस हिरासत से भी छुड़ा लिया था।
अगले दिन, 14 नवंबर को भारी पुलिस बल ने नरेश मीणा को गिरफ्तार किया। इस मामले में पुलिस ने कुल 59 लोगों को नामजद किया था।
समरावता मामले में बाद में नरेश मीणा को राजस्थान हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी और वे टोंक जेल से रिहा हो गए थे।
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