NEET UG 2026: राजस्थान में MBBS की 1200 से ज्यादा सीटें खाली, भारी फीस बनी बड़ी वजह
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 21, 2026, 14:04 IST
NEET UG 2026: निजी मेडिकल कॉलेजों में क्यों नहीं भर रहीं MBBS सीटें?
राजस्थान में नीट यूजी-2026 की तीसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद निजी मेडिकल कॉलेजों में 1200 से अधिक एमबीबीएस सीटें खाली हैं, निजी कॉलेजों की सालाना फीस करीब 25 लाख रुपए होने से परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, सरकारी और राजमेस कॉलेजों की सीटें भर चुकी हैं, जबकि फीस और प्रवेश नियम खाली सीटों के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
राजस्थान में नीट यूजी-2026 की तीसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 1200 से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। हैरानी की बात यह है कि राज्य में मेडिकल की पढ़ाई के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी नीट परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन निजी कॉलेजों की महंगी फीस के कारण कई परिवार प्रवेश लेने से पीछे हट रहे हैं। वहीं, सरकारी और राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमेस) के मेडिकल कॉलेजों की सभी सीटें भर चुकी हैं। निजी डेंटल कॉलेजों में भी कई सीटें रिक्त हैं। इस स्थिति के पीछे भारी फीस, प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े नियम और न्यायालय के निर्देशों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
नीट यूजी-2026 की तीसरे चरण की काउंसलिंग के बाद राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 1200 से अधिक सीटें खाली बताई गई हैं। इसके विपरीत सरकारी और राजमेस मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सीटें भर चुकी हैं। इस अंतर ने निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस और चिकित्सा शिक्षा तक विद्यार्थियों की पहुंच को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
इस साल राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में करीब 1100 नई एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई थीं। उम्मीद थी कि सीटों की संख्या बढ़ने से अधिक विद्यार्थियों को मेडिकल में प्रवेश का अवसर मिलेगा। हालांकि, तीसरे राउंड के बाद भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से पता चलता है कि केवल सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। फीस और प्रवेश प्रक्रिया जैसे पहलू भी विद्यार्थियों के फैसले को प्रभावित करते हैं।
निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सालाना फीस करीब 25 लाख रुपए बताई गई है। वहीं, राजमेस कॉलेजों में यह करीब 10 लाख रुपए है। चार से पांच साल की पढ़ाई, हॉस्टल, भोजन और अन्य खर्चों को जोड़ने पर परिवारों पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाता है। कई परिवारों के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना मुश्किल हो सकता है, भले ही विद्यार्थी नीट परीक्षा में पात्रता हासिल कर चुका हो।
अभिभावक और चिकित्सा शिक्षा मामलों के जानकार डॉ. राजेन्द्र कुमार शर्मा का कहना है कि निजी मेडिकल कॉलेजों की खाली सीटें भरने के लिए प्रवेश की योग्यता के मानकों में कमी करने के बजाय फीस निर्धारण की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, फीस विद्यार्थियों और उनके परिवारों की आर्थिक क्षमता के अनुरूप हो तो अधिक योग्य विद्यार्थी निजी कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए आगे आ सकते हैं।
नीट यूजी में न्यूनतम निर्धारित अंक हासिल करने से विद्यार्थी काउंसलिंग में भाग लेने के लिए पात्र हो सकता है, लेकिन इससे एमबीबीएस की सीट मिलना तय नहीं होता। प्रवेश उपलब्ध सीटों, रैंक, श्रेणी, विद्यार्थियों की पसंद और काउंसलिंग के नियमों पर निर्भर करता है। निजी कॉलेजों में प्रवेश के दौरान निर्धारित योग्यता और लागू नियमों का पालन भी जरूरी होता है।
निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रहने के पीछे प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े नियमों और न्यायालय के निर्देशों को भी एक कारण माना जा रहा है। काउंसलिंग के अलग-अलग चरणों में सीट आवंटन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होता है। ऐसे में खाली सीटों को भरने के लिए नियमों में बदलाव करना आसान नहीं होता। फीस और प्रवेश व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संबंधित प्राधिकरणों के निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।
राजस्थान में निजी मेडिकल कॉलेजों के अलावा डेंटल कॉलेजों में भी कई सीटें खाली रहने की जानकारी सामने आई है। इससे चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में सीटों की उपलब्धता और विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति के बीच अंतर का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि फीस और अन्य खर्चों को लेकर स्पष्ट एवं व्यावहारिक व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को बेहतर विकल्प मिल सकते हैं।
नीट यूजी-2026 की काउंसलिंग के अगले चरणों में खाली सीटों की स्थिति बदल सकती है। यह संबंधित काउंसलिंग कार्यक्रम, पात्र विद्यार्थियों की उपलब्धता और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस, प्रवेश प्रक्रिया और खाली सीटों को लेकर आगे क्या निर्णय लिए जाते हैं, इस पर विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर रहेगी।
निजी मेडिकल कॉलेजों में 1200 से ज्यादा सीटें खाली
इसी साल बढ़ीं करीब 1100 नई सीटें
सालाना 25 लाख रुपए तक फीस
फीस में राहत देने की जरूरत
नीट में पात्रता का मतलब सीट मिलना नहीं
न्यायालय के निर्देश और प्रवेश नियम भी अहम
डेंटल कॉलेजों में भी सीटें रिक्त
आगे क्या?
FAQs :
- राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें खाली क्यों हैं?
राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में नीट यूजी-2026 की तीसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद 1200 से अधिक एमबीबीएस सीटें खाली हैं, जिसका मुख्य कारण कॉलेजों की महंगी फीस है। प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े नियम भी विद्यार्थियों के निर्णय को प्रभावित कर रहे हैं। - प्रवेश में सक्षम होने के बावजूद विद्यार्थियों को सीटें क्यों नहीं मिल रही हैं?
नीट परीक्षा में न्यूनतम अंक प्राप्त करने से विद्यार्थी काउंसलिंग में भाग लेने के लिए पात्र हो जाते हैं, लेकिन सीटें प्राप्त करना उपलब्धता, रैंक, श्रेणी, विद्यार्थियों की पसंद और काउंसलिंग के नियमों पर निर्भर करता है। - क्या निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस में कमी आएगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटें भरने के लिए फीस को विद्यार्थियों की आर्थिक क्षमता के अनुरूप तय किया जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले में निर्णय संबंधित प्राधिकरणों द्वारा लिया जाएगा।
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