हाई कोर्ट ने पूछा- क्यों नहीं छोड़ा जा रहा पानी, आदेश नहीं मानने पर कलेक्टर तलब
समझें क्या है पूरा मामला
- पूर्वी राजस्थान के पांचना बांध से पानी छोड़ने को लेकर हाई कोर्ट सख्त।
- हाईकोर्ट ने पूछा,आदेश के बावजूद नहरों में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा।
- 15 दिन में पानी नहीं देने पर 27 जुलाई को कलेक्टर को होना होगा हाजिर।
- गुर्जर-मीणा विवाद की वजह 2006 से कमांड क्षेत्र के 35 गांवों के किसान पानी से वंचित।
- डूब वाले गांवों को जल संकट का डर, अंतिम छोर के गांवों को भी हो रहा नुकसान।
पूर्वी राजस्थान में पांचना बांध से पानी छोड़ने के विवाद के बीच राजस्थान हाई कोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं होने पर नाराजगी जताई हैं।
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की बैंच ने सरकार से पूछा है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी नहरों में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है।
सरकार ने अदालती आदेश की पालना के लिए 15 दिन का समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए कहा कि अगर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो कलक्टर और संबंधित अधिकारी 27 जुलाई को अदालत में पेश हो जाएं। कोर्ट ने यह निर्देश कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
पिछले 21 साल से नहीं मिल रहा पानी
अधिवक्ता सारांश सैनी ने कोर्ट को बताया कि पांचना बांध से 1987 से 2005 तक कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा जा रहा था। लेकिन प्रदेश में गुर्जर आंदोलन के बाद सरकार ने नहरों में पानी छोड़ना बंद कर दिया।
इसके कारण 2006 से नहरों के अंत में बसे कमांड एरिया के 35 गांवों (मीणा बाहुल्य) के किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है। इस मामले में हाईकोर्ट 2020 और इसी साल अप्रैल-मई में नहरों मे पानी छोड़ने का आदेश दे चुका हैं। लेकिन प्रशासन आदेश की पालना नहीं कर रहा हैं।
क्या है पांचना बांध विवाद?
पांचना बांध से पानी का विवाद करौली और सवाई माधोपुर जिलों के 74 गांवों के बीच 20 साल से चल रहा हैं।
बांध के आसपास के 39 गांवों (गुर्जर बाहुल्य) का कहना है कि बांध के निर्माण में उनकी जमीनें गईं, इसलिए पहला हक उनका है। उन्हें डर है कि नहरों में पानी छोड़ने से उनके खुद के क्षेत्र में जल संकट गहरा जाएगा।
वहीं दूसरी ओर,नहरों के अंत में बसे कमांड एरिया के 35 गांवों (मीणा बाहुल्य) के किसानों को 2006 से सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है। उनकी मांग है कि हाई कोर्ट के आदेशानुसार नहरों में तुरंत पानी छोड़ा जाए, क्योंकि पानी नहीं मिलने से उन्हें हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
पिछले महीने हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह मामला गरमा गया था। विवाद को लेकर दोनों तरफ से ग्रामीण धरने पर बैठ गए थे। हालांकि पांच दिन पहले सरकार के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हो गया था।
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