राजस्थान में दीया-प्रेमचंद की नियुक्ति रद्द करने हाईकोर्ट में याचिका, तर्क-संविधान में डिप्टी सीएम पद का प्रावधान नहीं
BP Shrivastava | Dec 17, 2023, 24:00 IST
राजस्थान में दीया-प्रेमचंद की नियुक्ति रद्द करने हाईकोर्ट में याचिका, तर्क-संविधान में डिप्टी सीएम पद का प्रावधान नहीं
राजस्थान की डिप्टी सीएम पद दीया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा की शपथ को लेकर शनिवार को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा, डिप्टी सीएम पद का संविधान में प्रावधान नहीं है, इसलिए यह नियुक्ति रद्द की जाए।
JAIPUR. राजस्थान में बीजेपी की अड़चनें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीएम पद को लेकर शुरुआती खिंचतान जैसे-तैसे कम हुई, लेकिन अब डिप्टी सीएम पद दीया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा की शपथ को लेकर शनिवार, 16 दिसंबर को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि डिप्टी सीएम पद का संविधान में प्रावधान नहीं है, इसलिए यह नियुक्ति रद्द की जाए।
संविधान में डिप्टी सीएम पद का प्रावधान नहीं
जयपुर हाईकोर्ट अब इस मामले में सुनवाई की तारीख तय करेगा। याचिका दायर करने वाले एडवोकेट ओम प्रकाश सोलंकी ने कहा कि संविधान में डिप्टी सीएम पद का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद दीया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने डिप्टी सीएम के नाम शपथ ली है। यह कानूनी तौर पर गलत है।
वकील ने यह भी तर्क दिया
याचिकाकर्ता वकील ने तर्क दिया कि डिप्टी सीएम मंत्री ही होता है, केवल राजनीतिक पोस्ट है। दोनों ने मंत्री की जगह डिप्टी सीएम की शपथ ली है, जब डिप्टी सीएम का पद संविधान में है ही नहीं तो आप शपथ कैसे ले सकते हैं। दोनों की नियुक्ति को रद्द किया जाना चाहिए।
अब तक डिप्टी सीएम बने नेता कैबिनेट मंत्री की शपथ लेते रहे हैं
राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में पहले भी डिप्टी सीएम बनते रहे हैं। राजस्थान में भैरोंसिंह शेखावत सरकार में हरिशंकर भाभड़ा डिप्टी सीएम बने थे। अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार में 2002 में कमला बेनीवाल और बनवारीलाल बैरवा डिप्टी सीएम रह चुके हैं। गहलोत सरकार में ही 2018 में सचिन पायलट डिप्टी सीएम बनाए गए थे। इन सब नेताओं ने डिप्टी सीएम की जगह कैबिनेट मंत्री की ही शपथ ली थी।
एमपी और छत्तीसगढ़ में भी बनाए गए डिप्टी सीएम
इस बार राजस्थान के साथ ही छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में डिप्टी सीएम बने नेताओं ने कैबिनेट मंत्री की जगह डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी। एमपी में जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल को डिप्टी सीएम बनाया गया है तो छत्तीसगढ़ में अरुण साव और विजय शर्मा को।
सुप्रीम कोर्ट पूर्व में खारिज कर चुका इस पद की याचिकाएं
डिप्टी सीएम के पद की शपथ को लेकर पहले भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर हुई हैं। डिप्टी सीएम की शपथ पर आपत्ति को सुप्रीम कोर्ट 1990 में खारिज कर चुका है। कर्नाटक, पंजाब-हरियाणा, बॉम्बे हाईकोर्ट में भी डिप्टी सीएम की शपथ पर आपत्ति जताते हुए नियुक्ति अवैध घोषित करने की याचिकाएं दायर हुईं, सब जगह याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया था कि डिप्टी सीएम को भी संविधान के आर्टिकल 164(3) के तहत शपथ दिलाई जाती है, डिप्टी सीएम की शपथ लेना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है।
संविधान में डिप्टी सीएम पद का प्रावधान नहीं
जयपुर हाईकोर्ट अब इस मामले में सुनवाई की तारीख तय करेगा। याचिका दायर करने वाले एडवोकेट ओम प्रकाश सोलंकी ने कहा कि संविधान में डिप्टी सीएम पद का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद दीया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने डिप्टी सीएम के नाम शपथ ली है। यह कानूनी तौर पर गलत है।
वकील ने यह भी तर्क दिया
याचिकाकर्ता वकील ने तर्क दिया कि डिप्टी सीएम मंत्री ही होता है, केवल राजनीतिक पोस्ट है। दोनों ने मंत्री की जगह डिप्टी सीएम की शपथ ली है, जब डिप्टी सीएम का पद संविधान में है ही नहीं तो आप शपथ कैसे ले सकते हैं। दोनों की नियुक्ति को रद्द किया जाना चाहिए।
अब तक डिप्टी सीएम बने नेता कैबिनेट मंत्री की शपथ लेते रहे हैं
राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में पहले भी डिप्टी सीएम बनते रहे हैं। राजस्थान में भैरोंसिंह शेखावत सरकार में हरिशंकर भाभड़ा डिप्टी सीएम बने थे। अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार में 2002 में कमला बेनीवाल और बनवारीलाल बैरवा डिप्टी सीएम रह चुके हैं। गहलोत सरकार में ही 2018 में सचिन पायलट डिप्टी सीएम बनाए गए थे। इन सब नेताओं ने डिप्टी सीएम की जगह कैबिनेट मंत्री की ही शपथ ली थी।
एमपी और छत्तीसगढ़ में भी बनाए गए डिप्टी सीएम
इस बार राजस्थान के साथ ही छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में डिप्टी सीएम बने नेताओं ने कैबिनेट मंत्री की जगह डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी। एमपी में जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल को डिप्टी सीएम बनाया गया है तो छत्तीसगढ़ में अरुण साव और विजय शर्मा को।
सुप्रीम कोर्ट पूर्व में खारिज कर चुका इस पद की याचिकाएं
डिप्टी सीएम के पद की शपथ को लेकर पहले भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर हुई हैं। डिप्टी सीएम की शपथ पर आपत्ति को सुप्रीम कोर्ट 1990 में खारिज कर चुका है। कर्नाटक, पंजाब-हरियाणा, बॉम्बे हाईकोर्ट में भी डिप्टी सीएम की शपथ पर आपत्ति जताते हुए नियुक्ति अवैध घोषित करने की याचिकाएं दायर हुईं, सब जगह याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया था कि डिप्टी सीएम को भी संविधान के आर्टिकल 164(3) के तहत शपथ दिलाई जाती है, डिप्टी सीएम की शपथ लेना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है।
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA